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Sant Kabir Nagar News: गोलीकांड के दो लोगों का नहीं हुआ मेडिकोलीगल, डीएम ने मांगी रिपोर्ट
Tue, 28 May 2024 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 28 May 2024 11:45 PM IST
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- 21 मई को मुखलिसपुर में कूड़ा फेंकने के विवाद में मारी थी गोली
- शिकायत के बाद डीएम ने सीएमओ को जांच सौंपी
- सीएमएस ने रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को भेजी
- डीएम के निर्देश पर सीएमओ गठित करेंगे जांच पैनल
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मुखलिसपुर में 21 मई को कूड़ा फेंकने के विवाद में दो लोगों को गोली मार दी गई थी, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सीएचसी नाथनगर और जिला अस्पताल में दोनों घायलों का मेडिकोलीगल नहीं कराया गया। बल्कि उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां इलाज में परेशानी हुई। इसके बाद पीड़ित ने डीएम से शिकायत की। मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच सीएमओ को सौंपी। अब जिला अस्पताल और सीएचसी अपनी-अपनी सफाई दे रहे हैं।
बता दें कि 21 मई को मुखलिसपुर में झाडू लगाते समय कूड़ा उड़ने के चलते कुछ लोगों ने छोटेलाल और धीरज को गोली मार दी थी। मनोज ने डीएम को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि चाचा छोटे लाल और भतीजे धीरज को गोली लगने के बाद सीएचसी नाथनगर ले गए वहां से जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने दो घंटे उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। जब मेडिकल कॉलेज ले गए तो वहां बताया कि गया कि जिला अस्पताल से चिकित्सकों के जरिए लापरवाही की गई है और चोट का विवरण न देने के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ा। जिसकी वजह से घायलों का ऑपरेशन 40 घंटे बाद हुआ। जब वह सीएमएस से संपर्क किए तो उन्होंने एक डाॅक्टर को मेडिकल कॉलेज भेजा। रात में डॉक्टर आए और चोट का विवरण दर्ज किया। लेकिन यह विवरण अभी तक जिला अस्पताल में दर्ज नहीं किया गया। जिससे विधिक कार्रवाई में परेशानी हो रही है। मामले की गंभीरता काे देखते ही डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सीएमओ और सीएमएस से जवाब तलब किया। सीएमओ ने इस प्रकरण में सीएमएस से जवाब मांगा तो सीएमएस ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
सीएचसी नाथनगर में चोट का अंकन अभिलेखों में नहीं
सीएमएस डॉ. भवनाथ पांडेय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गोली लगने के बाद मरीजों को उपचार के लिए सीएचसी नाथनगर लेकर गए थे। जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था। सीएचसी नाथनगर में मरीजों के चोटों का अंकन किया गया था अथवा नहीं यह अभिलेखों में अंकित नहीं है।
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डयूटी के दौरान तैनात चिकित्सकों से मांगा स्पष्टीकरण
सीएमएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मनोज कुमार की शिकायत पत्र पर डयूटी में तैनात चिकित्सक डॉ. आशीष श्रीवास्तव और डॉ. सेराज अहमद से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सीएमएस ने रिपोर्ट में बताया है कि मरीज की इंजरी रिपोर्ट सीएचसी पर होना उचित था, क्योंकि गनशॉट में घाव की मरहम पट्टी के बाद संभव है कि ब्लैकिंग यदि रही भी होती तो भी अगले चिकित्सक के घाव घुल देने के बाद नहीं मिलेगी।
इस मामले में डीएम के निर्देश पर पैनल बनाया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच होगी, मेडिकोलीगल क्यों नहीं बनाया गया। इसमें जिसकी भी लापरवाही होगी उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रामानुज कन्नौजिया, सीएमओ
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- शिकायत के बाद डीएम ने सीएमओ को जांच सौंपी
- सीएमएस ने रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को भेजी
- डीएम के निर्देश पर सीएमओ गठित करेंगे जांच पैनल
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। मुखलिसपुर में 21 मई को कूड़ा फेंकने के विवाद में दो लोगों को गोली मार दी गई थी, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सीएचसी नाथनगर और जिला अस्पताल में दोनों घायलों का मेडिकोलीगल नहीं कराया गया। बल्कि उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वहां इलाज में परेशानी हुई। इसके बाद पीड़ित ने डीएम से शिकायत की। मामले का संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच सीएमओ को सौंपी। अब जिला अस्पताल और सीएचसी अपनी-अपनी सफाई दे रहे हैं।
बता दें कि 21 मई को मुखलिसपुर में झाडू लगाते समय कूड़ा उड़ने के चलते कुछ लोगों ने छोटेलाल और धीरज को गोली मार दी थी। मनोज ने डीएम को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि चाचा छोटे लाल और भतीजे धीरज को गोली लगने के बाद सीएचसी नाथनगर ले गए वहां से जिला अस्पताल भेज दिया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने दो घंटे उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया। जब मेडिकल कॉलेज ले गए तो वहां बताया कि गया कि जिला अस्पताल से चिकित्सकों के जरिए लापरवाही की गई है और चोट का विवरण न देने के कारण दिक्कत का सामना करना पड़ा। जिसकी वजह से घायलों का ऑपरेशन 40 घंटे बाद हुआ। जब वह सीएमएस से संपर्क किए तो उन्होंने एक डाॅक्टर को मेडिकल कॉलेज भेजा। रात में डॉक्टर आए और चोट का विवरण दर्ज किया। लेकिन यह विवरण अभी तक जिला अस्पताल में दर्ज नहीं किया गया। जिससे विधिक कार्रवाई में परेशानी हो रही है। मामले की गंभीरता काे देखते ही डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सीएमओ और सीएमएस से जवाब तलब किया। सीएमओ ने इस प्रकरण में सीएमएस से जवाब मांगा तो सीएमएस ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
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सीएचसी नाथनगर में चोट का अंकन अभिलेखों में नहीं
सीएमएस डॉ. भवनाथ पांडेय ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि गोली लगने के बाद मरीजों को उपचार के लिए सीएचसी नाथनगर लेकर गए थे। जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था। सीएचसी नाथनगर में मरीजों के चोटों का अंकन किया गया था अथवा नहीं यह अभिलेखों में अंकित नहीं है।
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डयूटी के दौरान तैनात चिकित्सकों से मांगा स्पष्टीकरण
सीएमएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मनोज कुमार की शिकायत पत्र पर डयूटी में तैनात चिकित्सक डॉ. आशीष श्रीवास्तव और डॉ. सेराज अहमद से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सीएमएस ने रिपोर्ट में बताया है कि मरीज की इंजरी रिपोर्ट सीएचसी पर होना उचित था, क्योंकि गनशॉट में घाव की मरहम पट्टी के बाद संभव है कि ब्लैकिंग यदि रही भी होती तो भी अगले चिकित्सक के घाव घुल देने के बाद नहीं मिलेगी।
इस मामले में डीएम के निर्देश पर पैनल बनाया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच होगी, मेडिकोलीगल क्यों नहीं बनाया गया। इसमें जिसकी भी लापरवाही होगी उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रामानुज कन्नौजिया, सीएमओ