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दहेज हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास

Wed, 26 Oct 2022 11:01 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Oct 2022 11:01 PM IST
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Life imprisonment for three convicts of dowry death
दहेज हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास
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तीनों दोषियों पर 6,30000 रुपये लगाया अर्थदंड
पांच लाख रुपये मृतका की बेटी के नाम बैंक में जमा कराने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मी कांत शुक्ला ने बुधवार को दहेज हत्या के दोषी पति, जेठ व सास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों पर 6,30000 रुपये का अर्थदंड लगाया। इसमें से पांच लाख रुपये मृतका की पुत्री के नाम राष्ट्रीय कृत बैंक में जमा करने का आदेश दिया। अर्थदंड न अदा करने पर दो वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि नौरंगिया निवासी हरीश चंद्र चौधरी ने थाना महुली में प्रार्थनापत्र देकर कहा कि उनकी बेटी निशा का विवाह महुली क्षेत्र के हरपुर निवासी प्रमोद चौधरी के साथ 26 मई 2013 को हुआ था। शादी के बाद निशा के पति, सास, ससुर, जेठानी दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे और लगातार दहेज के नाम पर एक लाख रुपये, मोटर साइकिल व आभूषण की मांग करने लगे। आरोप है कि मांग पूरी नहीं होने पर मार डालने की धमकी दी। हरीश चंद चौधरी बीच बचाव में अपनी लड़की के वहां जाते थे तो उनकी लड़की अपनी आपबीती अपने पिता से बताती थी। 11 अप्रैल 2017 की शाम निशा ने हरिश्चंद्र को फोन किया और अपनी मां से बात कर अपने ऊपर प्रताड़ना की बात कही। 14 अप्रैल 2017 की सुबह रिश्तेदार से सूचना मिली कि उसकी लड़की निशा का देहांत हो गया।
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हरिश्चंद्र के प्रार्थनापत्र पर थाना महुली में दहेज हत्या का मुकदमा पंजीकृत हुआ तथा विवेचक ने विवेचना उपरांत आरोपपत्र निशा के पति प्रमोद चौधरी, जेठ विनोद चौधरी और सास सोहरता देवी के विरुद्ध प्रेषित किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि मृतका का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने अपने बयान में ट्रेकियल रिंग फ्रैक्चर व हाइड बोन फ्रैक्चर का कथन किए तथा न्यायालय में बयान दिया कि मृतका के गले पर जो अब्रेजन आया है, वह हाथ से दबाने पर नहीं बल्कि कपड़े और रस्सी से आया है तथा स्ट्रेगुलेशन मार्क भी गले पर आया है।
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अभियोजन साक्षियों ने घटना को समर्थित किया। बचाव पक्ष की ओर से अपने आप को निर्दोष साबित किए जाने का कथन किया गया तथा बचाव पक्ष से एक साक्षी का साक्ष्य कराया गया।

मामले में अभियोजन पक्ष एवं बचाव पक्ष को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश लक्ष्मीकांत शुक्ल ने दहेज हत्या के दोषी पति, सास और जेठ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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