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Sant Kabir Nagar News: लक्ष्मण हत्याकांड में दोषी साले-बहनोई को आजीवन कारावास
Tue, 07 Mar 2023 02:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 07 Mar 2023 02:51 PM IST
सार
सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने जिले के चर्चित लक्ष्मण शर्मा हत्याकांड के मामले में दोष सिद्घ होने पर दोषी साले-बहनोई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों दोषियों को 25,000-25,000 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया।
विस्तार
सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने जिले के चर्चित लक्ष्मण शर्मा हत्याकांड के मामले में दोष सिद्घ होने पर दोषी साले-बहनोई को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोनों दोषियों को 25,000-25,000 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि कोल्हुआ लकड़ा गांव निवासी श्रवण कुमार शर्मा ने पांच जून 2014 को कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। जिसमें कहा कि उसके पिता लक्षण शर्मा की खलीलाबाद तहसील गेट के पास सैलून है। पिता बाल काटने का कार्य करते थे। प्रत्येक दिन सुबह आठ बजे घर से निकल जाते थे। रात में 10 बजे के करीब बाइक से घर आते थे।
चार जून 2014 को पिता दुकान बंद करके बाइक से खलीलाबाद से गांव आ रहे थे। रास्ते में जीरा देवी कॉलेज से 100 मीटर दक्षिण पहले ही बाइक से पश्चिम तरफ खेत में पड़े थे। जब उन्हें घर पहुंचने में विलंब हुआ और उनके मोबाइल पर फोन किया तो कई बार घंटी बजने के बाद भी जवाब नहीं मिला। बरात जा रहे युवकों में किसी ने रिसीव कर उसके पिता की मौत की सूचना दी।
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वह और उसके गांव के कुछ लोग पहुंचे तो देखा कि उसके पिता के दाहिने कनपटी व सिर पर धारदार हथियार से चोट पहुंचाकर हत्या कर दी गई है। मौके पर बाइक गिरी मिली। घटना रात साढ़े नौ बजे के आस-पास की थी। उसके गांव के बेचू शर्मा व उनके पट्टीदार के बीच विवाद हुआ था। जिसमें उसके पिता ने पंचायत करके मामला समाप्त करा दिया था।
उसी बात से बेचू शर्मा तथा उसका बेटा रविन्द्र शर्मा व दामाद रिंकू नाराज रहते थे। इस कांड में उनका हाथ होने की आशंका है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजन की तरफ से कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई। जिसमें सभी गवाहों ने अभियोजन कथानक का समर्थन किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी दलीलें पेश की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोष सिद्घ होने पर दोषी रविंद्र शर्मा और उसके बहनोई रिंकू शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 25-25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने अर्थदंड की धनराशि में से 40,000 रुपये मृतक के आश्रित को प्रतिकर के रूप में भी देने का आदेश दिया।
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जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि कोल्हुआ लकड़ा गांव निवासी श्रवण कुमार शर्मा ने पांच जून 2014 को कोतवाली पुलिस को तहरीर दी। जिसमें कहा कि उसके पिता लक्षण शर्मा की खलीलाबाद तहसील गेट के पास सैलून है। पिता बाल काटने का कार्य करते थे। प्रत्येक दिन सुबह आठ बजे घर से निकल जाते थे। रात में 10 बजे के करीब बाइक से घर आते थे।
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चार जून 2014 को पिता दुकान बंद करके बाइक से खलीलाबाद से गांव आ रहे थे। रास्ते में जीरा देवी कॉलेज से 100 मीटर दक्षिण पहले ही बाइक से पश्चिम तरफ खेत में पड़े थे। जब उन्हें घर पहुंचने में विलंब हुआ और उनके मोबाइल पर फोन किया तो कई बार घंटी बजने के बाद भी जवाब नहीं मिला। बरात जा रहे युवकों में किसी ने रिसीव कर उसके पिता की मौत की सूचना दी।
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वह और उसके गांव के कुछ लोग पहुंचे तो देखा कि उसके पिता के दाहिने कनपटी व सिर पर धारदार हथियार से चोट पहुंचाकर हत्या कर दी गई है। मौके पर बाइक गिरी मिली। घटना रात साढ़े नौ बजे के आस-पास की थी। उसके गांव के बेचू शर्मा व उनके पट्टीदार के बीच विवाद हुआ था। जिसमें उसके पिता ने पंचायत करके मामला समाप्त करा दिया था।
उसी बात से बेचू शर्मा तथा उसका बेटा रविन्द्र शर्मा व दामाद रिंकू नाराज रहते थे। इस कांड में उनका हाथ होने की आशंका है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजन की तरफ से कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई। जिसमें सभी गवाहों ने अभियोजन कथानक का समर्थन किया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने भी दलीलें पेश की। कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोष सिद्घ होने पर दोषी रविंद्र शर्मा और उसके बहनोई रिंकू शर्मा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 25-25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कोर्ट ने अर्थदंड की धनराशि में से 40,000 रुपये मृतक के आश्रित को प्रतिकर के रूप में भी देने का आदेश दिया।