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कुलाबे की बजाय पाइप से खींच रहे पानी
sant kabir nagar
Updated Thu, 25 Aug 2016 11:16 PM IST
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गड़सरपार में पाइप से खेतों में पहुंच रहा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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कम बारिश से किसान परेशान हैं। हाल यह है कि धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। वहीं सरकारी ट्यूबवेलों का लाभ भी चंद लोगों को ही मिल रहा है। कारण कि ऑपरेटर की मिलीभगत से कुलाबे की बजाय ट्यूबवेल के टैंक से पाइपों के सहारे चंद किसानों के खेतों में पानी पहुंच रहा है। इससे अधिकांश किसानों की फसलें सूख रही हैं। इससे वे आक्रोशित हैं।
गड़सरपार में सिंचाई के लिए सरकारी नलकूप की व्यवस्था है।
बारिश न होने पर किसान इसी का प्रयोग करते हैं। लेकिन यहां तो ट्यूबवेल ऑपरेटरों की चलती है। वे जिस पर मेहरबान हों उसके खेत में सिंचाई होगी, नहीं तो भगवान भरोसे रहिए। गड़सरपार निवासी किसान गरीब, गुरु प्रसाद, धर्मा सिंह, हबीबुल्लाह, लल्लू, राजेश आदि का कहना है कि गांव में लोगों के खेतों की सिंचाई के लिए नलकूप विभाग द्वारा सरकारी ट्यूबवेल नंबर 153 लगाया गया है। लेकिन यह ट्यूबवेल हाथी दांत साबित हो रहा है।
यहां ऑपरेटर कुलाबे में पानी छोड़ने की बजाय चंद लोगों को सीधे टैंक से पाइप के द्वारा सिंचाई के लिए पानी दे रहे हैं। शिकायत करने पर भी वे नहीं सुनते। जबकि कुलाबे और नालियां सही हैं। पिछले वर्ष ही इसकी मरम्मत हुई थी। किसानों के अनुसार उनके पास इतनी रकम नहीं लंबे पाइप खरीद सके। पिछली गेहूं की फसल सूखे की मार झेली अब धान की फसल भी पानी के बगैर सूख जाएगी। ऐसे में परिवार के लोग भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।
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किसानों ने नलकूप विभाग के अधिकारियों से कुलाबे में पानी देने की मांग की है। जिससे फसल को बचाई जा सके। वहीं ट्यूबवेल ऑपरेटर स्वामीनाथ ने बताया कि कुलाबे मिट्टी और खरपतवार से पट गए हैं। ऐसे मेें कुलाबे से पानी नहीं दिया जा सकता है। जबकि अधिशाषी अभियंता नलकूप अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं था, अब मालूम हुआ है। जांच करा कर किसानों की समस्या का समाधान कराएंगे। दोषी पाए जाने पर ऑपरेटर के खिलाफ नियमानुसार करवाई भी की जाएगी।
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गड़सरपार में सिंचाई के लिए सरकारी नलकूप की व्यवस्था है।
बारिश न होने पर किसान इसी का प्रयोग करते हैं। लेकिन यहां तो ट्यूबवेल ऑपरेटरों की चलती है। वे जिस पर मेहरबान हों उसके खेत में सिंचाई होगी, नहीं तो भगवान भरोसे रहिए। गड़सरपार निवासी किसान गरीब, गुरु प्रसाद, धर्मा सिंह, हबीबुल्लाह, लल्लू, राजेश आदि का कहना है कि गांव में लोगों के खेतों की सिंचाई के लिए नलकूप विभाग द्वारा सरकारी ट्यूबवेल नंबर 153 लगाया गया है। लेकिन यह ट्यूबवेल हाथी दांत साबित हो रहा है।
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यहां ऑपरेटर कुलाबे में पानी छोड़ने की बजाय चंद लोगों को सीधे टैंक से पाइप के द्वारा सिंचाई के लिए पानी दे रहे हैं। शिकायत करने पर भी वे नहीं सुनते। जबकि कुलाबे और नालियां सही हैं। पिछले वर्ष ही इसकी मरम्मत हुई थी। किसानों के अनुसार उनके पास इतनी रकम नहीं लंबे पाइप खरीद सके। पिछली गेहूं की फसल सूखे की मार झेली अब धान की फसल भी पानी के बगैर सूख जाएगी। ऐसे में परिवार के लोग भुखमरी का शिकार हो जाएंगे।
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किसानों ने नलकूप विभाग के अधिकारियों से कुलाबे में पानी देने की मांग की है। जिससे फसल को बचाई जा सके। वहीं ट्यूबवेल ऑपरेटर स्वामीनाथ ने बताया कि कुलाबे मिट्टी और खरपतवार से पट गए हैं। ऐसे मेें कुलाबे से पानी नहीं दिया जा सकता है। जबकि अधिशाषी अभियंता नलकूप अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं था, अब मालूम हुआ है। जांच करा कर किसानों की समस्या का समाधान कराएंगे। दोषी पाए जाने पर ऑपरेटर के खिलाफ नियमानुसार करवाई भी की जाएगी।