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Sant Kabir Nagar News: चार संदिग्ध के शामिल होने के मिले इनपुट...पुलिस की जांच तेज
Sun, 14 Jul 2024 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 14 Jul 2024 11:42 PM IST
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- फर्जी नियुक्ति पत्र देने के मामले में दो गए जेल, अब अन्य के शामिल होने की बात आ रही सामने
- गिरोह तक पहुंचाने के लिए चार संदिग्धों पर पुलिस की नजर, खंगाल रही कुंडली
- बलिया के आसपास के जनपद के हैं संदिग्ध
- 29 जून को विद्यालय आवंटन में फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचा था फर्जी शिक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक की फर्जी नियुक्ति पत्र देकर वाले आरोपी को पकड़े जाने के बाद पुलिस के सामने नये तथ्य सामने आ रहे हैं। नियुक्ति पत्र देने में सहयोग करने वाले आरोपी के पकड़े जाने के बाद जांच टीम के हाथ चार अन्य संदिग्धों के बारे में जानकारी मिली है। जिसे टीम खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि रडार पर आए संदिग्ध बलिया व उसके आसपास के जनपद के हैं। जल्द ही पुलिस को कुछ बड़ा कर सकती है, जिससे गिरोह के दायरे के बारे में असलियत पता चल जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों की बर्खास्तगी और जांच चल रही है। एसटीएफ की नजर में अभी भी अभिलेख है। दूसरे के दस्तावेज पर नौकरी करने का खेल से लोग वाकिफ हो गए थे। लेकिन 29 जून को फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर विद्यालय आवंटन की कोशिश करते हुए युवक के पकड़े जाने के मामले में विभाग और पुलिस टीम को ही हैरत में डाल दिया। क्योंकि कंप्यूटर से जांच न होता तो शायद घुसपैठ करने में कामयाब हो गया होता। एक के पकड़े जाने के बाद नियुक्ति पत्र दिलाने वाले को टीम के प्रभारी अनूप कुमार मिश्र की टीम ने दबोच लिया था। पुलिस को यह पता था कि बीएसए कार्यालय के पास से जिसे ज्ञानेंद्र यादव को दबोच गया, वह अंतिम सदस्य नहीं है। इसकेे बाद जांच की लिस्ट और दायरे को बढ़ाया गया। जिसमें चार और संदिग्ध के शामिल होने के इनपुट मिले हैं।
सूत्रों की माने तो पुलिस को संदिग्धों के लोकेशन के बारे में भी जानकारी मिली है। उन्हें रडार पर लेकर तहकीकात कर रही है। उम्मीद है कि जल्द दबोच लिए जाए। इनके पकड़े जाने के बाद यह पता चलेगा कि फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने और बेचने में यही है या और लोग शामिल हैं। वहीं, एक फर्जी नियुक्ति पत्र के साथ पकड़े जाने के बाद विभाग भी सकते हैं। इस संबंध में शहर कोतवाल गौरव कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। इसमें जो भी संलिप्त मिलने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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यह है घटनाक्रम
29 जून को बेसिक शिक्षा विभाग में विद्यालय का आवंटन हो रहा था। इसी बीच काउंसिलिंग में पहुंचे आफाक अहमद निवासी राजबारी कादीपुर थाना चौबेपुर जिला वाराणसी द्वारा सहायक अध्यापक भर्ती के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र के साथ बीएसए ने कागजात की जांच में पकड़ लिया था। वह जेल चला गया था। मामले की जांच कर रहे पुरानी नौगढ़ चौकी प्रभारी अनूप कुमार मिश्र को ६ जुलाई को जानकारी मिली की एक संदिग्ध बलिया से आया है जो जेल में बंद आफाक से मिलने वाला है। वह बीएसए कार्यालय के पास है। इसी बीच चौकी प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस टीम को देखकर एक संदिग्ध हड़बड़ा गया। उसकी हरकत को देखकर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान ज्ञानेन्द्र कुमार यादव निवासी गोडवरा थाना खेजुरी जनपद बलिया के रूप में हुई। मुकदमें में इसे वांछित किया गया था। पूछताछ करने के बाद उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
- गिरोह तक पहुंचाने के लिए चार संदिग्धों पर पुलिस की नजर, खंगाल रही कुंडली
- बलिया के आसपास के जनपद के हैं संदिग्ध
- 29 जून को विद्यालय आवंटन में फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचा था फर्जी शिक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक की फर्जी नियुक्ति पत्र देकर वाले आरोपी को पकड़े जाने के बाद पुलिस के सामने नये तथ्य सामने आ रहे हैं। नियुक्ति पत्र देने में सहयोग करने वाले आरोपी के पकड़े जाने के बाद जांच टीम के हाथ चार अन्य संदिग्धों के बारे में जानकारी मिली है। जिसे टीम खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि रडार पर आए संदिग्ध बलिया व उसके आसपास के जनपद के हैं। जल्द ही पुलिस को कुछ बड़ा कर सकती है, जिससे गिरोह के दायरे के बारे में असलियत पता चल जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों की बर्खास्तगी और जांच चल रही है। एसटीएफ की नजर में अभी भी अभिलेख है। दूसरे के दस्तावेज पर नौकरी करने का खेल से लोग वाकिफ हो गए थे। लेकिन 29 जून को फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर विद्यालय आवंटन की कोशिश करते हुए युवक के पकड़े जाने के मामले में विभाग और पुलिस टीम को ही हैरत में डाल दिया। क्योंकि कंप्यूटर से जांच न होता तो शायद घुसपैठ करने में कामयाब हो गया होता। एक के पकड़े जाने के बाद नियुक्ति पत्र दिलाने वाले को टीम के प्रभारी अनूप कुमार मिश्र की टीम ने दबोच लिया था। पुलिस को यह पता था कि बीएसए कार्यालय के पास से जिसे ज्ञानेंद्र यादव को दबोच गया, वह अंतिम सदस्य नहीं है। इसकेे बाद जांच की लिस्ट और दायरे को बढ़ाया गया। जिसमें चार और संदिग्ध के शामिल होने के इनपुट मिले हैं।
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सूत्रों की माने तो पुलिस को संदिग्धों के लोकेशन के बारे में भी जानकारी मिली है। उन्हें रडार पर लेकर तहकीकात कर रही है। उम्मीद है कि जल्द दबोच लिए जाए। इनके पकड़े जाने के बाद यह पता चलेगा कि फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने और बेचने में यही है या और लोग शामिल हैं। वहीं, एक फर्जी नियुक्ति पत्र के साथ पकड़े जाने के बाद विभाग भी सकते हैं। इस संबंध में शहर कोतवाल गौरव कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। इसमें जो भी संलिप्त मिलने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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यह है घटनाक्रम
29 जून को बेसिक शिक्षा विभाग में विद्यालय का आवंटन हो रहा था। इसी बीच काउंसिलिंग में पहुंचे आफाक अहमद निवासी राजबारी कादीपुर थाना चौबेपुर जिला वाराणसी द्वारा सहायक अध्यापक भर्ती के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र के साथ बीएसए ने कागजात की जांच में पकड़ लिया था। वह जेल चला गया था। मामले की जांच कर रहे पुरानी नौगढ़ चौकी प्रभारी अनूप कुमार मिश्र को ६ जुलाई को जानकारी मिली की एक संदिग्ध बलिया से आया है जो जेल में बंद आफाक से मिलने वाला है। वह बीएसए कार्यालय के पास है। इसी बीच चौकी प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस टीम को देखकर एक संदिग्ध हड़बड़ा गया। उसकी हरकत को देखकर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपनी पहचान ज्ञानेन्द्र कुमार यादव निवासी गोडवरा थाना खेजुरी जनपद बलिया के रूप में हुई। मुकदमें में इसे वांछित किया गया था। पूछताछ करने के बाद उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।