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Sant Kabir Nagar News: सुख की निरंतर खोज में मनुष्य दुखी हो रहा
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उतरावल में चल रही श्रीमद्भागत कथा में डॉ. धरणीधर महाराज ने किया प्रवचन
तिघरा। विकासखंड बघौली अंतर्गत उतरावल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को अयोध्या धाम से आए कथा वाचक डाॅ. धरणीधर महाराज ने कहा कि सुख का सागर भगवान है, और धर्म का पालन ही मनुष्य की रक्षा करता है। सुख की निरंतर खोज से मनुष्य दुखी हो रहा है, क्योंकि इस संसार में सुख नहीं है।
कथा वाचक ने कहा कि सुख मनुष्य अंदर है और मनुष्य उसे बाहर खोज रहा है। आनंद का स्वरूप परमात्मा है और उसका अंश जीव है। माया के आवरण से ही मनुष्य दुख को ही सुख समझ लेता है। डाॅ.धरणीधर महाराज ने कहा कि सुख की चाह रखने वालों को भगवान की शरण में जाना चाहिए, क्योंकि वह सुख के सागर हैं। परमात्मा ही परम सत्य है। जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार गायब हो जाएगा।
प्रश्न यह है कि परमात्मा संसार में घुले-मिले हैं, तो संसार का नाश होने पर भी परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता।इसका उत्तर यही है कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं। आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। इसी तरह संसार गायब होने पर भी परमात्मा गायब नहीं होते। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है।
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कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के जन्म एवं लीलाओं की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम राय, शशिकला राय, मधुसूदन राय, रमेश राय, शेषनाग पांडेय, राकेश राय आदि उपस्थित रहे।
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तिघरा। विकासखंड बघौली अंतर्गत उतरावल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को अयोध्या धाम से आए कथा वाचक डाॅ. धरणीधर महाराज ने कहा कि सुख का सागर भगवान है, और धर्म का पालन ही मनुष्य की रक्षा करता है। सुख की निरंतर खोज से मनुष्य दुखी हो रहा है, क्योंकि इस संसार में सुख नहीं है।
कथा वाचक ने कहा कि सुख मनुष्य अंदर है और मनुष्य उसे बाहर खोज रहा है। आनंद का स्वरूप परमात्मा है और उसका अंश जीव है। माया के आवरण से ही मनुष्य दुख को ही सुख समझ लेता है। डाॅ.धरणीधर महाराज ने कहा कि सुख की चाह रखने वालों को भगवान की शरण में जाना चाहिए, क्योंकि वह सुख के सागर हैं। परमात्मा ही परम सत्य है। जब हमारी वृत्ति परमात्मा में लगेगी तो संसार गायब हो जाएगा।
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प्रश्न यह है कि परमात्मा संसार में घुले-मिले हैं, तो संसार का नाश होने पर भी परमात्मा का नाश क्यों नहीं होता।इसका उत्तर यही है कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और अलग भी हैं। आकाश में बादल रहता है और बादल के अंदर भी आकाश तत्व है। बादल के गायब होने पर भी आकाश गायब नहीं होता। इसी तरह संसार गायब होने पर भी परमात्मा गायब नहीं होते। संसार की कोई भी वस्तु भगवान से अलग नहीं है।
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कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के जन्म एवं लीलाओं की कथा सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर मुख्य यजमान राधेश्याम राय, शशिकला राय, मधुसूदन राय, रमेश राय, शेषनाग पांडेय, राकेश राय आदि उपस्थित रहे।