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जांच में मिली अनियमितता
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जांच में अनियमितता उजागार, कार्रवाई की तैयारी
फर्जी मस्टर रोल भरने, ट्रैक्टर से कार्य कराने और अनियमित भुगतान का मिला मामला
जांच में प्रधान, रोजगार सेवक, सचिव और तकनीकी सहायक दोषी पाए गए
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। विकास खंड खलीलाबाद के भाटपार में हुई जांच में अनियमितता उजागर हुई है। जांच में प्रधान, रोजगार सेवक, सचिव और तकनीकी सहायक दोषी पाए गए हैं। सीडीओ की ओर से कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी गई है।
डीडीओ आरआर मिश्र ने बताया कि भाटपार में हुई अनियमितता की शिकायत की 29 जून को जांच की थी। इसमें केकरहवा पोखरे की खुदाई एवं सफाई का कार्य वर्ष 2019-20 में प्रारंभ हुआ था। जिस पर कुल 2 लाख 44 हजार 045 रुपये का भुगतान हुआ है। मस्टर रोल के सत्यापन के लिए कार्य करने वाले मजदूूूूरों को निर्देश देने के बाद भी प्रधान, सचिव व रोजगार सेवक के जरिए नहीं बुलाया गया जिसकी वजह से मस्टर रोल का सत्यापन नहीं हो पाया। शिकायतकर्ता रामदास और उसके बेटे नरसिंह चौधरी ने साक्ष्य के रूप में ट्रैक्टर से कार्य कराए जाने की वीडियो क्लिप प्रस्तुत की। इस संबंध में प्रधान, रोजगार सेवक व सचिव ने स्वीकार किया कि तलहटी में मिट्टी खोदने में ट्रैक्टर लगाया गया था। जांच में पाया गया कि प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक ने मिलीभगत कर शासकीय धन के गबन और मनरेगा की मार्ग निर्देशिका का उल्लंघन करते हुए ट्रैक्टर से कार्य कराया है। जबकि मनरेगा का कार्य कराना मशीन या ट्रैक्टर से पूर्णतया प्रतिबंधित है। जांच में पाया गया कि पंचायत भवन मानक के अनुसार निर्मित नहीं कराया जा रहा है। पंचायत भवन के निर्माण में वित्तीय नियमों का पालन न करते हुए बिना टेंडर के ही मनचाहे फर्म से सामग्री क्रय की गई। इस प्रकार ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रधान ने पंचायत भवन निर्माण में फर्जी मस्टर रोल तैयार कर 1,98,000 रुपये का दुरुपयोग करते हुए अनियमित भुगतान किया गया है जो एक आपराधिक कृत्य है।
सचिव/ग्राम विकास अधिकारी सुनीता मिश्रा ने यह भी बताया कि अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में बीपी मिश्र उनके पति हैं तथा गोरखपुर में तैनात हैं। इस प्रकार सचिव ने अनधिकृत रूप से अपने पति द्वारा प्राक्कलन तैयार कराकर उसका मनचाहे ढंग से मूल्यांकन करा कर भुगतान करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई है। इसी तरह प्रधान और सचिव ने शौचालय के लाभार्थियों की सूची उपलब्ध नहीं कराई। शिकायतकर्ता के जरिए बताए गए लाभार्थियों के शौचालयों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि शौचालयों का निर्माण लाभार्थियों के जरिए कराया जाना चाहिए, लेकिन प्रधान व सचिव द्वारा गंभीर अनियमितता करते हुए लाभार्थियों से बैंक से रकम निकलवाकर स्वयं शौचालय का निर्माण कराया गया। राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त आयोग और मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की जांच के लिए सचिव के जरिए लिखित निर्देश के बाद भी पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई जिससे सभी कार्यों की जांच नहीं की जा सकी। डीडीओ ने बताया कि उनकी जांच में ग्राम प्रधान, सचिव/ग्राम विकास अधिकारी, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक के जरिए ग्राम पंचायत में गंभीर अनियमिता की गई है। इन सभी ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया गया है जिसके लिए यह सभी दोषी हैं। सीडीओ अतुल मिश्र ने बताया कि डीडीओ की जांच रिपोर्ट में अनियमितता उजागर हुई है। संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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फर्जी मस्टर रोल भरने, ट्रैक्टर से कार्य कराने और अनियमित भुगतान का मिला मामला
जांच में प्रधान, रोजगार सेवक, सचिव और तकनीकी सहायक दोषी पाए गए
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। विकास खंड खलीलाबाद के भाटपार में हुई जांच में अनियमितता उजागर हुई है। जांच में प्रधान, रोजगार सेवक, सचिव और तकनीकी सहायक दोषी पाए गए हैं। सीडीओ की ओर से कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी गई है।
डीडीओ आरआर मिश्र ने बताया कि भाटपार में हुई अनियमितता की शिकायत की 29 जून को जांच की थी। इसमें केकरहवा पोखरे की खुदाई एवं सफाई का कार्य वर्ष 2019-20 में प्रारंभ हुआ था। जिस पर कुल 2 लाख 44 हजार 045 रुपये का भुगतान हुआ है। मस्टर रोल के सत्यापन के लिए कार्य करने वाले मजदूूूूरों को निर्देश देने के बाद भी प्रधान, सचिव व रोजगार सेवक के जरिए नहीं बुलाया गया जिसकी वजह से मस्टर रोल का सत्यापन नहीं हो पाया। शिकायतकर्ता रामदास और उसके बेटे नरसिंह चौधरी ने साक्ष्य के रूप में ट्रैक्टर से कार्य कराए जाने की वीडियो क्लिप प्रस्तुत की। इस संबंध में प्रधान, रोजगार सेवक व सचिव ने स्वीकार किया कि तलहटी में मिट्टी खोदने में ट्रैक्टर लगाया गया था। जांच में पाया गया कि प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक ने मिलीभगत कर शासकीय धन के गबन और मनरेगा की मार्ग निर्देशिका का उल्लंघन करते हुए ट्रैक्टर से कार्य कराया है। जबकि मनरेगा का कार्य कराना मशीन या ट्रैक्टर से पूर्णतया प्रतिबंधित है। जांच में पाया गया कि पंचायत भवन मानक के अनुसार निर्मित नहीं कराया जा रहा है। पंचायत भवन के निर्माण में वित्तीय नियमों का पालन न करते हुए बिना टेंडर के ही मनचाहे फर्म से सामग्री क्रय की गई। इस प्रकार ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रधान ने पंचायत भवन निर्माण में फर्जी मस्टर रोल तैयार कर 1,98,000 रुपये का दुरुपयोग करते हुए अनियमित भुगतान किया गया है जो एक आपराधिक कृत्य है।
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सचिव/ग्राम विकास अधिकारी सुनीता मिश्रा ने यह भी बताया कि अवर अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में बीपी मिश्र उनके पति हैं तथा गोरखपुर में तैनात हैं। इस प्रकार सचिव ने अनधिकृत रूप से अपने पति द्वारा प्राक्कलन तैयार कराकर उसका मनचाहे ढंग से मूल्यांकन करा कर भुगतान करते हुए गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई है। इसी तरह प्रधान और सचिव ने शौचालय के लाभार्थियों की सूची उपलब्ध नहीं कराई। शिकायतकर्ता के जरिए बताए गए लाभार्थियों के शौचालयों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि शौचालयों का निर्माण लाभार्थियों के जरिए कराया जाना चाहिए, लेकिन प्रधान व सचिव द्वारा गंभीर अनियमितता करते हुए लाभार्थियों से बैंक से रकम निकलवाकर स्वयं शौचालय का निर्माण कराया गया। राज्य वित्त एवं चौदहवां वित्त आयोग और मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की जांच के लिए सचिव के जरिए लिखित निर्देश के बाद भी पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई जिससे सभी कार्यों की जांच नहीं की जा सकी। डीडीओ ने बताया कि उनकी जांच में ग्राम प्रधान, सचिव/ग्राम विकास अधिकारी, रोजगार सेवक और तकनीकी सहायक के जरिए ग्राम पंचायत में गंभीर अनियमिता की गई है। इन सभी ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं किया गया है जिसके लिए यह सभी दोषी हैं। सीडीओ अतुल मिश्र ने बताया कि डीडीओ की जांच रिपोर्ट में अनियमितता उजागर हुई है। संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के लिए डीएम को रिपोर्ट भेज दी गई है।
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