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Sant Kabir Nagar News: बभनौली में पक्के काम पर 54 तो कच्चे पर 4 लाख खर्च हुआ
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धनघटा। हैसर बाजार के ग्राम पंचायत बभनौली में वित्तीय वर्ष 2023-24 में मनरेगा गाइड लाइन की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। पूरे वित्तीय वर्ष में पक्का काम की 14 परियोजनाओं पर 56 लाख रुपए खर्च किए गए तो वहीं चार लाख रुपये के काम पर 30 मजदूरों को 32 दिन का काम दिया गया। सोशल ऑडिट के दौरान हुए खुलासे के बाद वहां मौजूद मजदूर भड़क गए और हंगामा करते हुए जमकर प्रदर्शन किया।
विकास खंड हैसर बाजार में बभनौली में मनरेगा के 60-40 अनुपात पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसका नतीजा है कि 56 लाख रुपए वित्तीय वर्ष 2023-24 में व्यय किए गए तो कच्चा काम पर मात्र 4 लाख रुपए खर्च कर 32 मजदूरों को 30 दिन का काम दिया गया। गांव में 360 जॉब कार्ड धारकों में से 32 को छोड़ शेष मजदूर रोजगार की मांग करते रहे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जॉब कार्ड धारक चंद्रजोता, लालती, सुनरा, गुजराती, खैरुन्निसा व अन्य का कहना है कि मनरेगा के तहत रोजगार की मांग करते-करते थक गए लेकिन 1 दिन का भी काम नहीं मिला।
काम नहीं मिलने की वजह से गांव के पुरुष बाहर जाकर मजदूरी करने को विवश हैं। इस गांव में केवल पक्का कार्य कराया जाता है। काम करने के लिए दूसरे गांव के मजदूर लगाए जाते हैं और हाजिरी प्रधान के चहेते लोगों की ही लगती है। गांव वालों के प्रदर्शन के दौरान ऑडिट का काम ठप रहा सोशल ऑडिट टीम के लोगों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझा-बूझाकर शांत किया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में किसी के पीएम आवास का निर्माण किसी का नहीं हुआ है। कोऑर्डिनेटर नीलम का कहना है कि जांच कर ली गई। जिसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी।
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विकास खंड हैसर बाजार में बभनौली में मनरेगा के 60-40 अनुपात पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिसका नतीजा है कि 56 लाख रुपए वित्तीय वर्ष 2023-24 में व्यय किए गए तो कच्चा काम पर मात्र 4 लाख रुपए खर्च कर 32 मजदूरों को 30 दिन का काम दिया गया। गांव में 360 जॉब कार्ड धारकों में से 32 को छोड़ शेष मजदूर रोजगार की मांग करते रहे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। जॉब कार्ड धारक चंद्रजोता, लालती, सुनरा, गुजराती, खैरुन्निसा व अन्य का कहना है कि मनरेगा के तहत रोजगार की मांग करते-करते थक गए लेकिन 1 दिन का भी काम नहीं मिला।
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काम नहीं मिलने की वजह से गांव के पुरुष बाहर जाकर मजदूरी करने को विवश हैं। इस गांव में केवल पक्का कार्य कराया जाता है। काम करने के लिए दूसरे गांव के मजदूर लगाए जाते हैं और हाजिरी प्रधान के चहेते लोगों की ही लगती है। गांव वालों के प्रदर्शन के दौरान ऑडिट का काम ठप रहा सोशल ऑडिट टीम के लोगों ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझा-बूझाकर शांत किया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में किसी के पीएम आवास का निर्माण किसी का नहीं हुआ है। कोऑर्डिनेटर नीलम का कहना है कि जांच कर ली गई। जिसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी।

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