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Sant Kabir Nagar News: ऑनलाइन नंबर न मिलने पर खाते में आएगी कटी रकम
Wed, 16 Jul 2025 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 16 Jul 2025 11:21 PM IST
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संतकबीरनगर। वाहनों पर ऑनलाइन वीआईपी नंबर अलॉट न होने की दशा में अब धन वापसी की राह आसान होगा। ट्रांजेक्शन फेल होने की दशा में ई-पेमेंट मोड से राज्य सरकार के खाते में धनराशि जमा हो जाता था।
धन वापसी के लिए वीआईपी नंबर की चाह रखने वाले लोगों को लखनऊ का चक्कर लगाने से अब छुटकारा मिल जाएगा। एआरटीओ कार्यालय की मदद से आसानी से धन संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में वापस होगा।
परिवहन विभाग में वीआईपी नंबर अलॉट करने के लिए अतिरिक्त धन देना पड़ता है। ऑनलाइन पेमेंट के दौरान किसी कारणवश अगर नंबर अलॉट नहीं हो पाता तो इस धन की वापसी के लिए पहले बहुत दौड़ लगानी पड़ती थी।
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ट्रांजेक्शन फेल होने की दशा में ई-पेमेंट मोड से राज्य सरकार के खाते में धनराशि जमा हो जाता था। ऐसे अनवांटेड धनराशि जिसकी देयता विभाग के लिए नियमानुसार नही बनती है, वापसी की प्रक्रिया में शासन द्वारा कलेक्ट्रेट कोषागार लखनऊ को नोडल अफसर बनाया गया था। कलेक्ट्रेट कोषागार लखनऊ में संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय आहरण वितरण अधिकारी एआरटीओ प्रशासन के कोड से संचालित होता था। इस परेशानी को दूर करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की गई है। इससे अब धन की वापसी का राह आसान हो जाएगा और संबंधित को लखनऊ का चक्कर नही काटना पड़ेगा, उनका समय और धन दोनों बचत होगा।
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धन वापसी के लिए वीआईपी नंबर की चाह रखने वाले लोगों को लखनऊ का चक्कर लगाने से अब छुटकारा मिल जाएगा। एआरटीओ कार्यालय की मदद से आसानी से धन संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते में वापस होगा।
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परिवहन विभाग में वीआईपी नंबर अलॉट करने के लिए अतिरिक्त धन देना पड़ता है। ऑनलाइन पेमेंट के दौरान किसी कारणवश अगर नंबर अलॉट नहीं हो पाता तो इस धन की वापसी के लिए पहले बहुत दौड़ लगानी पड़ती थी।
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ट्रांजेक्शन फेल होने की दशा में ई-पेमेंट मोड से राज्य सरकार के खाते में धनराशि जमा हो जाता था। ऐसे अनवांटेड धनराशि जिसकी देयता विभाग के लिए नियमानुसार नही बनती है, वापसी की प्रक्रिया में शासन द्वारा कलेक्ट्रेट कोषागार लखनऊ को नोडल अफसर बनाया गया था। कलेक्ट्रेट कोषागार लखनऊ में संभागीय परिवहन विभाग कार्यालय आहरण वितरण अधिकारी एआरटीओ प्रशासन के कोड से संचालित होता था। इस परेशानी को दूर करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की गई है। इससे अब धन की वापसी का राह आसान हो जाएगा और संबंधित को लखनऊ का चक्कर नही काटना पड़ेगा, उनका समय और धन दोनों बचत होगा।