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हरितालिका तीज : पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत
Tue, 26 Aug 2025 11:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 26 Aug 2025 11:03 PM IST
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तीज पर भगवान कृष्ण और राधा के दर्शन को जुटी महिलाएं
संतकबीरनगर। हरितालिका तीज पर मंगलवार को सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और पति के दीर्घायु होने की कामना की। इस दौरान शिव की पूजा-अर्चना की गई। शहर के लक्ष्मीनारायण मंदिर में सामूहिक कथा का आयोजन हुआ।
हरितालिका तीज के दिन भोर में सहरी का सेवन करने के बाद सुहागिनों ने पति की दीर्घायु और कुंआरी कन्याओं ने मन वांछित वर की प्राप्ति के लिए दिन भर निर्जल व्रत रखा। शाम के समय शिव मंदिरों पर जाकर गौरीशंकर का फल फूल और सुहाग के वस्तु चूड़ी, सिंदूर, आलता, आदि से पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद ब्राह्मणों को दान दिया गया।
पंडित अभिषेक मिश्र ने बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तीज को देवी पार्वती ने निर्जल व्रत रखते हुए व्रती महिलाओं ने सौभाग्य सूचक वस्त्र और आभूषण धारण किए शिव की उपासना की थी और शिव को वर के रूप में प्राप्त किया था। सुहागिन महिलाएं ने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। शिव ने पार्वती को पूर्व जन्म का स्मरण कराने के लिए यह व्रत रखा था। ऐसा विद्वानों का मानना है।
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व्रती महिलाएं, निर्जल व्रत रखकर सौभाग्य सूचक वस्त्र और आभूषण धारण किया। हाथ में मेंहदी और पैरों में आलता लगाकर तामेश्वरनाथ, शहर के गोला बाजार स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर व ग्रामीण क्षेत्र के शिव मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की। तीज व्रत की महिला का बखान करते हुए घर पहुंची और अपने सास और बडो के पैर छुए। लक्ष्मीनारायण मंदिर में महिलाओं ने सामूहिक रूप से तीज व्रत की कथा सुनी। इस दौरान संगीता, विंदू, आरती, सुमन, आराध्या, विनीता, सारिका, ह्दया, शालिनी समेत अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।
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हरितालिका तीज के दिन भोर में सहरी का सेवन करने के बाद सुहागिनों ने पति की दीर्घायु और कुंआरी कन्याओं ने मन वांछित वर की प्राप्ति के लिए दिन भर निर्जल व्रत रखा। शाम के समय शिव मंदिरों पर जाकर गौरीशंकर का फल फूल और सुहाग के वस्तु चूड़ी, सिंदूर, आलता, आदि से पूजन किया। पूजा-अर्चना के बाद ब्राह्मणों को दान दिया गया।
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पंडित अभिषेक मिश्र ने बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तीज को देवी पार्वती ने निर्जल व्रत रखते हुए व्रती महिलाओं ने सौभाग्य सूचक वस्त्र और आभूषण धारण किए शिव की उपासना की थी और शिव को वर के रूप में प्राप्त किया था। सुहागिन महिलाएं ने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करती हैं। शिव ने पार्वती को पूर्व जन्म का स्मरण कराने के लिए यह व्रत रखा था। ऐसा विद्वानों का मानना है।
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व्रती महिलाएं, निर्जल व्रत रखकर सौभाग्य सूचक वस्त्र और आभूषण धारण किया। हाथ में मेंहदी और पैरों में आलता लगाकर तामेश्वरनाथ, शहर के गोला बाजार स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर व ग्रामीण क्षेत्र के शिव मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की। तीज व्रत की महिला का बखान करते हुए घर पहुंची और अपने सास और बडो के पैर छुए। लक्ष्मीनारायण मंदिर में महिलाओं ने सामूहिक रूप से तीज व्रत की कथा सुनी। इस दौरान संगीता, विंदू, आरती, सुमन, आराध्या, विनीता, सारिका, ह्दया, शालिनी समेत अन्य महिलाएं मौजूद रहीं।