{"_id":"637680f7019fac221e2b7a15","slug":"had-the-administration-been-alert-in-time-the-player-would-not-have-died-khalilabad-news-gkp4577803148","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sant kabir nagar: समय से चेत जाता प्रशासन तो नहीं होती खेलई की मौत, खुद को जिंदा दिखाने में बीत गई उम्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sant kabir nagar: समय से चेत जाता प्रशासन तो नहीं होती खेलई की मौत, खुद को जिंदा दिखाने में बीत गई उम्र
Fri, 18 Nov 2022 03:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2022 03:29 PM IST
सार
पन्नेलाल ने बताया कि पिता अपनी जमीन पाने के प्रयास में तहसील पर आयोजित होने वाले प्रत्येक संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र लेकर पहुंच जाते थे और अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते थे, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी आश्वासन का घूंट पिला कर वापस कर देते थे।
विज्ञापन
धनघटा थाना क्षेत्र के कोड़रा गांव निवासी खेलई की फाइल फोटो।
- फोटो : KHALILABAD
विस्तार
आमजन को त्वरित न्याय मिले और छोटी-छोटी समस्याओं का आसानी से समाधान हो सके, इस उद्देश्य से संपूर्ण समाधान दिवस व समाधान दिवस आयोजित होता है, लेकिन इसका फायदा फरियादियों को मिल नहीं पाता है। इसका जीता जागता प्रमाण अभिलेखों में खुद को जिंदा साबित करने की कोशिश के दौरान खेलई की मौत होना है। यदि जिम्मेदार समय से चेत गए होते तो शायद खेलई की जान नहीं जाती।
कोडरा गांव निवासी फेरई की मौत वर्ष 2016 में हो गई थी। उनके हिस्से की संपत्ति उनकी संतानों और पत्नी के नाम वरासत होनी थी, लेकिन धनघटा तहसील के कर्मचारी और अधिकारी फेरई की जगह उनके छोटे भाई खेलई को अभिलेखों में मृतक दर्शा दिया। खेलई के हिस्से की जमीन फेरई की पत्नी व बेटों के नाम से वरासत कर दिया। इसकी जानकारी खेलई को तब हुई, जब उन्होंने केसीसी बनवाने के लिए खतौनी निकलवाया।
खतौनी से नाम गायब होने के बाद खेलई परेशान हो गए और खुद को जिंदा साबित करते हुए अपने हिस्से की जमीन पाने के लिए अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने लगे। पीड़ित बेटे पन्ने लाल ने बताया कि वह सभी भाई बाहर मेहनत मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे। घर पर वृद्ध पिता खेलई रहते थे।
विज्ञापन
पन्नेलाल ने बताया कि पिता अपनी जमीन पाने के प्रयास में तहसील पर आयोजित होने वाले प्रत्येक संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र लेकर पहुंच जाते थे और अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते थे, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी आश्वासन का घूंट पिला कर वापस कर देते थे। जमीन भतीजों के नाम से हो जाने के बाद खेलई इतना परेशान रहा करते थे कि समय पर भोजन तक नहीं करते थे।
इधर जब गांव में चकबंदी की बारी आई और चकबंदी विभाग के लोगों ने फार्म पांच गांव में वितरण किया तो उनकी उम्मीद बढ़ गई कि अब चकबंदी विभाग सच्चाई का पता कर उनकी जमीन उनके नाम कर देगा। चकबंदी कार्यालय में बयान देने वह बुधवार को धनघटा तहसील गए थे और बयान देने से पूर्व ही उनकी परिसर में मौत हो गई।
पन्नेलाल का आरोप है कि तहसील प्रशासन के जिम्मेदारों ने उसके पिता को इतना परेशान कर दिया कि अंत में उनकी जान तहसील परिसर में चल गई। संपूर्ण समाधान दिवस हो या थाना समाधान दिवस हर जगह पिता ने फरियाद की। यदि समय से जिम्मेदार चेत गए होते तो शायद पिता की जान नहीं जाती।
सीओ चकबंदी खेलई के प्रकरण की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. रवींद्र कुमार, एसडीएम
विज्ञापन
कोडरा गांव निवासी फेरई की मौत वर्ष 2016 में हो गई थी। उनके हिस्से की संपत्ति उनकी संतानों और पत्नी के नाम वरासत होनी थी, लेकिन धनघटा तहसील के कर्मचारी और अधिकारी फेरई की जगह उनके छोटे भाई खेलई को अभिलेखों में मृतक दर्शा दिया। खेलई के हिस्से की जमीन फेरई की पत्नी व बेटों के नाम से वरासत कर दिया। इसकी जानकारी खेलई को तब हुई, जब उन्होंने केसीसी बनवाने के लिए खतौनी निकलवाया।
विज्ञापन
खतौनी से नाम गायब होने के बाद खेलई परेशान हो गए और खुद को जिंदा साबित करते हुए अपने हिस्से की जमीन पाने के लिए अधिकारियों का दरवाजा खटखटाने लगे। पीड़ित बेटे पन्ने लाल ने बताया कि वह सभी भाई बाहर मेहनत मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे। घर पर वृद्ध पिता खेलई रहते थे।
विज्ञापन
पन्नेलाल ने बताया कि पिता अपनी जमीन पाने के प्रयास में तहसील पर आयोजित होने वाले प्रत्येक संपूर्ण समाधान दिवस में प्रार्थनापत्र लेकर पहुंच जाते थे और अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते थे, लेकिन अधिकारी-कर्मचारी आश्वासन का घूंट पिला कर वापस कर देते थे। जमीन भतीजों के नाम से हो जाने के बाद खेलई इतना परेशान रहा करते थे कि समय पर भोजन तक नहीं करते थे।
इधर जब गांव में चकबंदी की बारी आई और चकबंदी विभाग के लोगों ने फार्म पांच गांव में वितरण किया तो उनकी उम्मीद बढ़ गई कि अब चकबंदी विभाग सच्चाई का पता कर उनकी जमीन उनके नाम कर देगा। चकबंदी कार्यालय में बयान देने वह बुधवार को धनघटा तहसील गए थे और बयान देने से पूर्व ही उनकी परिसर में मौत हो गई।
पन्नेलाल का आरोप है कि तहसील प्रशासन के जिम्मेदारों ने उसके पिता को इतना परेशान कर दिया कि अंत में उनकी जान तहसील परिसर में चल गई। संपूर्ण समाधान दिवस हो या थाना समाधान दिवस हर जगह पिता ने फरियाद की। यदि समय से जिम्मेदार चेत गए होते तो शायद पिता की जान नहीं जाती।
सीओ चकबंदी खेलई के प्रकरण की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। जांच में लापरवाही सामने आने पर संबंधित पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।-डॉ. रवींद्र कुमार, एसडीएम