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Sant Kabir Nagar News: आज काम पर न जाते तो बच जाती बेटी की जान
Sun, 07 Apr 2024 11:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 07 Apr 2024 11:37 PM IST
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- मां और पिता ने रो-रोकर बयां किया दर्द
- पिता सैलून की दुकान चलाता है तो मां सामुदायिक शौचालय की केयर टेकर है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। काश आज काम पर न जाते तो बेटी की जान बच जाती। ये कहना है डेढ़ वर्षीय मासूम के मां-बाप का। उनकी आखें आसुओं से भर गईं। गला रूद गया था। शब्द साथ नहीं दे रहे थे। दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दुधारा क्षेत्र के बाघनगर गांव में झोपड़ी में लगी आग से डेढ़ वर्षीय मासूम की मौत से परिवार में चीख-पुकार मच गई है। आसपास के लोग उन्हे सांत्वना दे रहे थे। बाघनगर गांव के लल्ला उर्फ अहमद ने पक्के मकान के आगे झोपड़ी डाल रखीं हैं। वह बाघनगर बिजली पावर हाउस के पास सैलून की दुकान चलाते हैं। सुबह करीब नौ बजे वह दुकान पर चले गए। उनकी पत्नी शफीकुन्निशा सामुदायिक शौचालय की केयर टेकर हैं। घर पर तीन वर्षीय बेटी और डेढ़ साल की मामूम रहनूमा घर पर ही थी। तीन वर्षीय बेटी बाहर खेल रही थी। दोपहर करीब एक बजे आग लगी। आग देख गांव के लोग दौड़े और आग को बुझाने की कोशिश में जुट गए। आग ने 15 मिनट में सब कुछ राख कर दिया। गांव वालों ने आग बुझाने का काफी प्रयास किया। लेकिन मासूम बच्ची रहनुमा को नही बचा सके।
गांववालों के मुताबिक आग झोंपड़ी में लगी। झोपड़ी के ऊपर प्लास्टिक डाल रखीं थीं। आग से प्लास्टिक पिघल कर नीचे टपक रही थी, जिससे बच्ची को नहीं बचाया जा सका। लल्ला और शफीकुन्निशा का कहना था कि आज अगर काम पर नहीं गए होते तो उनकी बेटी की जान बच जाती है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मुनीर अहमद ने बताया कि परिवार बेहद गरीब है। जिसे मदद की दरकार है।
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- पिता सैलून की दुकान चलाता है तो मां सामुदायिक शौचालय की केयर टेकर है
संवाद न्यूज एजेंसी
सेमरियावां। काश आज काम पर न जाते तो बेटी की जान बच जाती। ये कहना है डेढ़ वर्षीय मासूम के मां-बाप का। उनकी आखें आसुओं से भर गईं। गला रूद गया था। शब्द साथ नहीं दे रहे थे। दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दुधारा क्षेत्र के बाघनगर गांव में झोपड़ी में लगी आग से डेढ़ वर्षीय मासूम की मौत से परिवार में चीख-पुकार मच गई है। आसपास के लोग उन्हे सांत्वना दे रहे थे। बाघनगर गांव के लल्ला उर्फ अहमद ने पक्के मकान के आगे झोपड़ी डाल रखीं हैं। वह बाघनगर बिजली पावर हाउस के पास सैलून की दुकान चलाते हैं। सुबह करीब नौ बजे वह दुकान पर चले गए। उनकी पत्नी शफीकुन्निशा सामुदायिक शौचालय की केयर टेकर हैं। घर पर तीन वर्षीय बेटी और डेढ़ साल की मामूम रहनूमा घर पर ही थी। तीन वर्षीय बेटी बाहर खेल रही थी। दोपहर करीब एक बजे आग लगी। आग देख गांव के लोग दौड़े और आग को बुझाने की कोशिश में जुट गए। आग ने 15 मिनट में सब कुछ राख कर दिया। गांव वालों ने आग बुझाने का काफी प्रयास किया। लेकिन मासूम बच्ची रहनुमा को नही बचा सके।
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गांववालों के मुताबिक आग झोंपड़ी में लगी। झोपड़ी के ऊपर प्लास्टिक डाल रखीं थीं। आग से प्लास्टिक पिघल कर नीचे टपक रही थी, जिससे बच्ची को नहीं बचाया जा सका। लल्ला और शफीकुन्निशा का कहना था कि आज अगर काम पर नहीं गए होते तो उनकी बेटी की जान बच जाती है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मुनीर अहमद ने बताया कि परिवार बेहद गरीब है। जिसे मदद की दरकार है।
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