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छह अस्थायी गोआश्रय केंद्रों में घटे पशु तो शिफ्ट करने की शुरू हुई तैयारी
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छह अस्थायी गोआश्रय केंद्रों में घटे पशु तो शिफ्ट करने की शुरू हुई तैयारी
सीवान और सड़कों पर घूमते हैं छुट्टा पशु, संरक्षित करने की दिशा में पहल नहीं
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। जिले में गोआश्रय केंद्रों की स्थिति दयनीय है। क्षमता के मुताबिक गोआश्रय केंद्रों पर पशु संरक्षित नहीं है। कई जगह तो व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ नहीं है। आलम यह है कि छह अस्थाई गोआश्रय केंद्रों पर संरक्षित पशुओं की संख्या घट गई तो वहां से दूसरी जगह पशुओं को शिफ्ट किए जाने की प्रशासन तैयारी कर रहा है।
वर्ष 2019 से छुट्टा पशुओं को संरक्षित किए जाने की योजना शासन ने संचालित किया है। इसके तहत जिले में दो वृहद आश्रय केंद्र स्थापित किए गए। जिसमें वृहद गोआश्रय केंद्र जिगिना में 200 पशुओं को रखने की क्षमता है और यहां वर्तमान में 85 पशु संरक्षित किए गए हैं। जबकि दूसरे केंद्र मझौरा पौली में 200 की क्षमता है और सिर्फ 71 पशु संरक्षित हैं। इसी तरह स्थायी गोआश्रय केंद्र बढ़या ठाठर में 300 की क्षमता है और यहां 226 पशु संरक्षित हैं। जिले में तीन कान्हा गोआश्रय केंद्र क्रमश: खलीलाबाद, मगहर और मेंहदावल में हैं। तीनों जगह 40-40 पशुओं को सरंक्षित किए जाने की क्षमता है, लेकिन खलीलाबाद में 35, मगहर में 36 और मेंहदावल में 36 पशु संरक्षित किए गए हैं। इसी तरह 20-20 पशुओं को संरक्षित किए जाने के लिए तीन कान्हा हाउस दुधारा, बखिरा और मगहर में है। जिसमें दुधारा में 20 पशु, बखिरा में 18 और मगहर में दस पशु रखे गए हैं। इसके अलावा जिले में 61 अस्थाई गोशालाएं स्थापित हुई थीं। जिसमें से पांच गोशालाएं ऐसी जगह स्थापित की गईं, जहां बारिश के मौसम में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। जिसकी वजह से इनका संचालन बंद कर दिया गया। वर्तमान में जिले की छह ऐसी अस्थाई गोशालाएं हैं, जहां क्षमता से कम पशु संरक्षित हैं। इसमें नावध में दस पशुओं की क्षमता है, लेकिन यहां आठ पशु संरक्षित किए गए थे, जिसमें से चार पशुओं को सुपुर्दगी में दे दिया गया और एक पशु की मौत हो गई। वर्तमान में यहां सिर्फ तीन पशु संरक्षित हैं। औरहिया-मंझरिया गोशाला की क्षमता दस की है और तीन पशु सुपुर्दगी में दिए गए। वैसे यहां दस पशु संरक्षित हैं। बभनी गोशाला की क्षमता 15 पशुओं की है। यहां अव्यवस्था देखने को मिली। यहां सिर्फ छह गोवंश संरक्षित हैं। न टंकी में पानी दिखा और न ही नाद में भूसा। कौवाठोर गोशाला में दस पशुओं की क्षमता है। यहां नौ पशु संरक्षित हैं। जबकि गोशाला भुजैनी में दस की क्षमता है और सात पशु संरक्षित किए गए हैं। इसी तरह दलेलगंज गोशाला में अव्यवस्था साफ झलकी। यहां बाड़ा टूट चुका है। पशुओं की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। यहां सिर्फ तीन पशु संरक्षित हैं। प्रशासन दस पशुओं से कम संख्या वाले गोशाला नावध, औरहिया मंझरिया, बभनी, कौवाठोर, भुजैनी और दलेलगंज में संरक्षित पशुओं को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी में जुटा हुआ है। नावध के पशुओं को कान्हा मेंहदावल, कौवाठोर के पशुओं को बढ़या ठाठर, बभनी के पशुओं को मलौली, औरहिया-मंझरिया के पशुओं को कांजी हाउस दुधारा और भुजैनी व दलेलगंज के पशुओं को जिगिना गोआश्रय केंद्र में शिफ्ट करने की रणनीति बना रहा है। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि कम क्षमता वाले अस्थाई गोशालाओं में पशुओं की संख्या कम है। इसी वजह से वहां से पशुओं को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की तैयारी चल रही है। वैसे सभी केंद्रों पर भूसा और चारा आदि की व्यवस्था की गई है। कहीं कोई समस्या नहीं है, यदि कहीं कोई कमी सामने आएगी तो वहां की समस्या दूर कराई जाएगी।
गणना में 2926 निराश्रित पशु और संरक्षित किए गए हैं 2094 पशु
चार साल पहले 20 वीं पशु गणना हुई थी। जिसमें जिले में 2926 निराश्रित पशुओं की संख्या थी। जबकि 76,000 गोवंश, 1. 50 लाख भैंस वंश, 1. 50 लाख बकरी, तीन लाख भेड़ और 1100 सूअर की संख्या आंकी गई थी। अब सवाल यह है कि जिले में स्थापित किए गए सभी केंद्रों में 3500 पशुओं को संरक्षित किए जाने की क्षमता है। जबकि वर्तमान में 1470 पशु ही संरक्षित किए गए हैं। जबकि 624 पशुओं को सुपुर्दगी में पालने के लिए दिया गया है। सालों में निराश्रित पशुओं की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ी होगी। क्षेत्र के सीवान में छुट्टा पशु घूमते दिखाई देते हैं और उन्हें संरक्षित किए जाने की जहमत जिम्मेदार नहीं उठा रहे हैं।
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इंसेट
नियम के अनुसार प्रत्येक पशुओं पर प्रतिदिन 30 रुपये खर्च किए जाने हैं। पशुओं को पालने के लिए भी जिन्हें दिया जाता है, उन्हें प्रति पशु प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से दिया जाता है। वर्ष 2019 से वर्ष 2022 तक 514 .29 लाख रुपये पशुओं के संरक्षण पर खर्च किया गया है। इसमें से 480. 17 लाख का उपभोग प्रमाणपत्र भी दिया जा चुका है। जबकि सुपुर्दगी में दिए गए पशुओं की देखरेख पर 57 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इंसेट
जिन छह अस्थायी गोशालाओं में पशुओं की संख्या दस से कम है, वहां से पशुओं को नजदीक के गोआश्रय केंद्रों पर शिफ्ट किए जाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे ठीक प्रकार से पशुओं की देखरेख होगी। पशुओं के लिए प्रत्येक केंद्रों पर भूसा और चारा आदि की व्यवस्था कराई गई है। नियमित केंद्रों की जांच भी कराई जाती है। जिससे व्यवस्था सुदृढ़ रहें।
- सुरेंद्र नाथ श्रीवास्तव, सीडीओ
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सीवान और सड़कों पर घूमते हैं छुट्टा पशु, संरक्षित करने की दिशा में पहल नहीं
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। जिले में गोआश्रय केंद्रों की स्थिति दयनीय है। क्षमता के मुताबिक गोआश्रय केंद्रों पर पशु संरक्षित नहीं है। कई जगह तो व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ नहीं है। आलम यह है कि छह अस्थाई गोआश्रय केंद्रों पर संरक्षित पशुओं की संख्या घट गई तो वहां से दूसरी जगह पशुओं को शिफ्ट किए जाने की प्रशासन तैयारी कर रहा है।
वर्ष 2019 से छुट्टा पशुओं को संरक्षित किए जाने की योजना शासन ने संचालित किया है। इसके तहत जिले में दो वृहद आश्रय केंद्र स्थापित किए गए। जिसमें वृहद गोआश्रय केंद्र जिगिना में 200 पशुओं को रखने की क्षमता है और यहां वर्तमान में 85 पशु संरक्षित किए गए हैं। जबकि दूसरे केंद्र मझौरा पौली में 200 की क्षमता है और सिर्फ 71 पशु संरक्षित हैं। इसी तरह स्थायी गोआश्रय केंद्र बढ़या ठाठर में 300 की क्षमता है और यहां 226 पशु संरक्षित हैं। जिले में तीन कान्हा गोआश्रय केंद्र क्रमश: खलीलाबाद, मगहर और मेंहदावल में हैं। तीनों जगह 40-40 पशुओं को सरंक्षित किए जाने की क्षमता है, लेकिन खलीलाबाद में 35, मगहर में 36 और मेंहदावल में 36 पशु संरक्षित किए गए हैं। इसी तरह 20-20 पशुओं को संरक्षित किए जाने के लिए तीन कान्हा हाउस दुधारा, बखिरा और मगहर में है। जिसमें दुधारा में 20 पशु, बखिरा में 18 और मगहर में दस पशु रखे गए हैं। इसके अलावा जिले में 61 अस्थाई गोशालाएं स्थापित हुई थीं। जिसमें से पांच गोशालाएं ऐसी जगह स्थापित की गईं, जहां बारिश के मौसम में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। जिसकी वजह से इनका संचालन बंद कर दिया गया। वर्तमान में जिले की छह ऐसी अस्थाई गोशालाएं हैं, जहां क्षमता से कम पशु संरक्षित हैं। इसमें नावध में दस पशुओं की क्षमता है, लेकिन यहां आठ पशु संरक्षित किए गए थे, जिसमें से चार पशुओं को सुपुर्दगी में दे दिया गया और एक पशु की मौत हो गई। वर्तमान में यहां सिर्फ तीन पशु संरक्षित हैं। औरहिया-मंझरिया गोशाला की क्षमता दस की है और तीन पशु सुपुर्दगी में दिए गए। वैसे यहां दस पशु संरक्षित हैं। बभनी गोशाला की क्षमता 15 पशुओं की है। यहां अव्यवस्था देखने को मिली। यहां सिर्फ छह गोवंश संरक्षित हैं। न टंकी में पानी दिखा और न ही नाद में भूसा। कौवाठोर गोशाला में दस पशुओं की क्षमता है। यहां नौ पशु संरक्षित हैं। जबकि गोशाला भुजैनी में दस की क्षमता है और सात पशु संरक्षित किए गए हैं। इसी तरह दलेलगंज गोशाला में अव्यवस्था साफ झलकी। यहां बाड़ा टूट चुका है। पशुओं की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। यहां सिर्फ तीन पशु संरक्षित हैं। प्रशासन दस पशुओं से कम संख्या वाले गोशाला नावध, औरहिया मंझरिया, बभनी, कौवाठोर, भुजैनी और दलेलगंज में संरक्षित पशुओं को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी में जुटा हुआ है। नावध के पशुओं को कान्हा मेंहदावल, कौवाठोर के पशुओं को बढ़या ठाठर, बभनी के पशुओं को मलौली, औरहिया-मंझरिया के पशुओं को कांजी हाउस दुधारा और भुजैनी व दलेलगंज के पशुओं को जिगिना गोआश्रय केंद्र में शिफ्ट करने की रणनीति बना रहा है। प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि कम क्षमता वाले अस्थाई गोशालाओं में पशुओं की संख्या कम है। इसी वजह से वहां से पशुओं को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की तैयारी चल रही है। वैसे सभी केंद्रों पर भूसा और चारा आदि की व्यवस्था की गई है। कहीं कोई समस्या नहीं है, यदि कहीं कोई कमी सामने आएगी तो वहां की समस्या दूर कराई जाएगी।
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चार साल पहले 20 वीं पशु गणना हुई थी। जिसमें जिले में 2926 निराश्रित पशुओं की संख्या थी। जबकि 76,000 गोवंश, 1. 50 लाख भैंस वंश, 1. 50 लाख बकरी, तीन लाख भेड़ और 1100 सूअर की संख्या आंकी गई थी। अब सवाल यह है कि जिले में स्थापित किए गए सभी केंद्रों में 3500 पशुओं को संरक्षित किए जाने की क्षमता है। जबकि वर्तमान में 1470 पशु ही संरक्षित किए गए हैं। जबकि 624 पशुओं को सुपुर्दगी में पालने के लिए दिया गया है। सालों में निराश्रित पशुओं की संख्या निश्चित तौर पर बढ़ी होगी। क्षेत्र के सीवान में छुट्टा पशु घूमते दिखाई देते हैं और उन्हें संरक्षित किए जाने की जहमत जिम्मेदार नहीं उठा रहे हैं।
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नियम के अनुसार प्रत्येक पशुओं पर प्रतिदिन 30 रुपये खर्च किए जाने हैं। पशुओं को पालने के लिए भी जिन्हें दिया जाता है, उन्हें प्रति पशु प्रतिदिन 30 रुपये के हिसाब से दिया जाता है। वर्ष 2019 से वर्ष 2022 तक 514 .29 लाख रुपये पशुओं के संरक्षण पर खर्च किया गया है। इसमें से 480. 17 लाख का उपभोग प्रमाणपत्र भी दिया जा चुका है। जबकि सुपुर्दगी में दिए गए पशुओं की देखरेख पर 57 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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जिन छह अस्थायी गोशालाओं में पशुओं की संख्या दस से कम है, वहां से पशुओं को नजदीक के गोआश्रय केंद्रों पर शिफ्ट किए जाने की व्यवस्था की जा रही है। इससे ठीक प्रकार से पशुओं की देखरेख होगी। पशुओं के लिए प्रत्येक केंद्रों पर भूसा और चारा आदि की व्यवस्था कराई गई है। नियमित केंद्रों की जांच भी कराई जाती है। जिससे व्यवस्था सुदृढ़ रहें।
- सुरेंद्र नाथ श्रीवास्तव, सीडीओ