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--गम में जीता हर कोई गम के मारे सारे है
ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
Updated Sun, 22 May 2016 11:29 PM IST
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कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया।
- फोटो : अंबरीश मिश्रा
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जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जहा पर कवियों ने अपनी रचनाओं को प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी।
एहसास मगहरी ने तुम भी गम के मारे हो हम भी गम के मारे है, गम में जीता हर कोई गम के मारे सारे है सुनाकर गोष्ठी की शुरूआत की। कवि सूरज कुंवर सरस ने मां के आंचल सा प्यारा कोई आंचल और नहीं, सुनाकर मां के महिमा को बताया। अवधेश पांडेय ने पुत्र भले हो जाए पराए माता होती नहीं पराई, हम सब उससे जुड़े हुए है डोर नेह नाता की, बोलो जय भारत माता की, सुनाकर भारत माता की जय जयकार किया। पवन सबा ने फिर तुम करने लगे हो हकबयानी सोच लो, डर है बन जाओ न इक दिन तुम कहानी सोच लो सुनाकर वाहवाही लूटी।
डॉक्टर एमएम इस्लाम सूफी बस्तवी ने मुसीबतों से घिरा है जो वक्त टल जाए, खुदा करे तूफां का रूख बदल जाए, सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। कैलाश चंद दुबे ने कविता के माध्यम से अपना परिचय दिया। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने बड़ी तकलीफ होती है मुझे उस वक्त ऐ हामिद, कोई जब लूटता है कारवां को पारसा बनकर, सुनाकर आज कल के रहनुमाओं पर तंज किया। राधेश्याम मिश्र ने मानव को चाहिए की वो अवकात में रहे, अपनो से लगातार मुलाकात में रहे, सुनाकर सबको अपनो से मिलकर रहने की सलाह दिया। सरदार हरिभजन सिंह ने एक मोहरा खेल का क्या ले गया, लुफ्त सारी बाजियों का ले गया, सुनाकर एक मोहरे के महत्व को बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नरसिंह नारायण कमल ने की। इस अवसर पर मनोज कुमार, श्यामकार्तिकेय, असलम खलीलाबादी, शिवा पांडेय, उदय भान भट्ठ, निर्मल यादव आदि कवि मौजूद रहे।
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एहसास मगहरी ने तुम भी गम के मारे हो हम भी गम के मारे है, गम में जीता हर कोई गम के मारे सारे है सुनाकर गोष्ठी की शुरूआत की। कवि सूरज कुंवर सरस ने मां के आंचल सा प्यारा कोई आंचल और नहीं, सुनाकर मां के महिमा को बताया। अवधेश पांडेय ने पुत्र भले हो जाए पराए माता होती नहीं पराई, हम सब उससे जुड़े हुए है डोर नेह नाता की, बोलो जय भारत माता की, सुनाकर भारत माता की जय जयकार किया। पवन सबा ने फिर तुम करने लगे हो हकबयानी सोच लो, डर है बन जाओ न इक दिन तुम कहानी सोच लो सुनाकर वाहवाही लूटी।
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डॉक्टर एमएम इस्लाम सूफी बस्तवी ने मुसीबतों से घिरा है जो वक्त टल जाए, खुदा करे तूफां का रूख बदल जाए, सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। कैलाश चंद दुबे ने कविता के माध्यम से अपना परिचय दिया। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने बड़ी तकलीफ होती है मुझे उस वक्त ऐ हामिद, कोई जब लूटता है कारवां को पारसा बनकर, सुनाकर आज कल के रहनुमाओं पर तंज किया। राधेश्याम मिश्र ने मानव को चाहिए की वो अवकात में रहे, अपनो से लगातार मुलाकात में रहे, सुनाकर सबको अपनो से मिलकर रहने की सलाह दिया। सरदार हरिभजन सिंह ने एक मोहरा खेल का क्या ले गया, लुफ्त सारी बाजियों का ले गया, सुनाकर एक मोहरे के महत्व को बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नरसिंह नारायण कमल ने की। इस अवसर पर मनोज कुमार, श्यामकार्तिकेय, असलम खलीलाबादी, शिवा पांडेय, उदय भान भट्ठ, निर्मल यादव आदि कवि मौजूद रहे।
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