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Sant Kabir Nagar News: खेल और अन्य गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को दें बुनियादी ज्ञान
Fri, 08 Aug 2025 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:13 PM IST
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बीआरसी भवन पर प्रशिक्षण समापन अवसर पर प्रशिक्षणार्थी को संबोधित करते बीईओ
मेंहदावल। बीआरसी सभागार में चल रहे नई शिक्षा नीति 2020 के एफएलएन आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण के पहले बैच का समापन शुक्रवार को हुआ। इस प्रशिक्षण में 100 शिक्षामित्रों ने भाग लिया।
समापन अवसर पर बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र ने बताया कि प्रशिक्षण में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सभी प्रशिक्षणार्थियों को जानकारी मिली है। ऐसे में सभी प्रशिक्षणार्थी नई शिक्षा नीति के तहत पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों में खेल-खेल और गतिविधियों के माध्यम से बुनियादी ज्ञान सिखाएं।
उन्होंने कहा कि भाषा शिक्षण के वर्णों का पहचान, पठन कौशल, लिखित कौशल और स्वयं से सीखना, गली मित्र, विषय मित्र, पीयर लर्निंग पर विशेष चर्चा किया गया। प्रशिक्षणार्थियों में अपने दायित्वों के प्रति हौंसला व निष्ठा से कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। इसके साथ प्रशिक्षण में सीखें सभी नवाचार को बच्चों तक शत प्रतिशत लागू करने के लिए निर्देश दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें बच्चों को पढ़ना है। उन्हें समझना है कि वह किस वातावरण से आ रहे हैं। बच्चों में जन्मजात क्षमताएं होती है। ऐसे में बच्चों में जन्मजात क्षमता होने के साथ-साथ एक उत्साह जनक परिवेश का होना अत्यंत आवश्यक है। बच्चे अपनी समझ और अनुभव को स्वाभाविक रूप से अपने हाव-भाव के साथ घर की भाषा में सहजता से सीखते हैं।
उन्होंने ने कहा कि बच्चे जब पहली बार विद्यालय आते हैं तो अपने साथ वह एक समृद्ध अनुभव लेकर आते हैं।
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समापन अवसर पर बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र ने बताया कि प्रशिक्षण में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सभी प्रशिक्षणार्थियों को जानकारी मिली है। ऐसे में सभी प्रशिक्षणार्थी नई शिक्षा नीति के तहत पहली से तीसरी कक्षा के बच्चों में खेल-खेल और गतिविधियों के माध्यम से बुनियादी ज्ञान सिखाएं।
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उन्होंने कहा कि भाषा शिक्षण के वर्णों का पहचान, पठन कौशल, लिखित कौशल और स्वयं से सीखना, गली मित्र, विषय मित्र, पीयर लर्निंग पर विशेष चर्चा किया गया। प्रशिक्षणार्थियों में अपने दायित्वों के प्रति हौंसला व निष्ठा से कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। इसके साथ प्रशिक्षण में सीखें सभी नवाचार को बच्चों तक शत प्रतिशत लागू करने के लिए निर्देश दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि सबसे पहले हमें बच्चों को पढ़ना है। उन्हें समझना है कि वह किस वातावरण से आ रहे हैं। बच्चों में जन्मजात क्षमताएं होती है। ऐसे में बच्चों में जन्मजात क्षमता होने के साथ-साथ एक उत्साह जनक परिवेश का होना अत्यंत आवश्यक है। बच्चे अपनी समझ और अनुभव को स्वाभाविक रूप से अपने हाव-भाव के साथ घर की भाषा में सहजता से सीखते हैं।
उन्होंने ने कहा कि बच्चे जब पहली बार विद्यालय आते हैं तो अपने साथ वह एक समृद्ध अनुभव लेकर आते हैं।