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Sant Kabir Nagar News: चुनिंदा ग्राम पंचायतों में जांच करते थे पूर्व सीडीओ, उच्च अधिकारी को नहीं देते थे रिपोर्ट

Mon, 14 Oct 2024 11:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Mon, 14 Oct 2024 11:14 PM IST
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Former CDO used to investigate in selected gram panchayats, did not give report to higher officials
- विधायक के पत्र के बाद अधिकारियों के कार्यप्रणाली की खुली पोल
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- जांच के नाम पर ग्राम पंचायतों से लगा धन उगाही का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले में पूर्व में तैनात रहे सीडीओ संत कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी के बाद अधिकारियों के कार्यप्रणाली की पोल खुल गई। जनपद से स्थानांतरित होने के बाद पूर्व सीडीओ संत कुमार को जेडीसी बस्ती बना दिया गया। आरोप है कि जिले में तैनात रहने के वजह से उन्हें सभी ब्लॉक एवं ग्राम पंचायतों के बारे में जानकारी थी, जिसके बाद वह अपने कारखास के सहयोग से चुनिंदा ग्राम पंचायतों में जांच करते थे। और जांच के बाद उच्च अधिकारी को कोई रिपोर्ट नहीं दी जाती थी। वहीं कार्रवाई के भय से ग्राम पंचायतों के जिम्मेदारों की सांस अटकी रहती थी।

विधायक ने इन आरोपों की जांच की उठाई मांग
1. निदेशक पंचायत राज उत्तर प्रदेश के कार्यालय आदेश 29 नवंबर 2023 के विपरीत तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी संत कुमार ने अपर जिला पंचायतराज अधिकारी प्रमोद कुमार यादव के खिलाफ शासन में जांच प्रचलित थी, उनको वित्तीय अधिकार दे दिया गया और राजवित्त और केंद्रीय वित्त योजना के तहत अनुचित भुगतान कराया।
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2. संयुक्त विकास आयुक्त बस्ती मंडल के द्वारा जिले में अनैतिक रूप से जांच की जा रही है। समस्त विकास खंड के ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों की जांच के नाम पर बड़े पैमाने पर धनउगाही की जा रही है। धनउगाही करने के बाद जहां घोटाले हैं, वहां किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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3. समस्त विकास खण्डों में ग्राम पंचायत सचिवों को ग्राम पंचायत (कलस्टर आवंटन का अधिकार) जिला अधिकारी को है। तत्कालीन सीडीओ ने जनपद में तीन सप्ताह में ही ग्राम पंचायतों के सचिवों का कलस्टर बदल कर दूसरे सचिव को आवंटन कर दिया। उक्त कार्य में प्रमोद कुमार यादव अपर जिलापंचायत राज अधिकारी की संलिप्तता है, जो शासन के नीति के विपरीत है।
4. जनपद में कार्यरत रहते कई विभाग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर अनुचित दबाव बनाकर शासन के नीति के विपरीत कार्य कराया गया है। उनके कुछ ठेकेदार विभिन्न योजनाओं में खण्ड विकास अधिकारी/कार्यक्रम अधिकारी पर दबाव बनाकर कार्य करते थे और धनउगाही की जाती थी।
5. जिले में तैनाती के दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) विजयश्री तैनात थी। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद सीडीपीओ सांथा सतेन्द्र कुमार को अनुचित रूप से जिला कार्यक्रम अधिकारी का वित्तीय अधिकार दे दिया गया, जो शासन के नीति के विपरीत है।
6. शासन के आदेशों के विपरीत आकांक्षी विकास खंडों में पीडीएस संवर्ग के बीडीओ की तैनाती नहीं की गई। पदोन्नत हुए बीडीओ को विकास खंड का प्रभार दे दिया गया, जबकि विकास खण्ड आकांक्षी की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं तत्कालीन सीडीओ ने मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन के आदेशों के विपरीत जाकर खंड विकास अधिकारियों को एक से अधिक विकास खंड का प्रभार दे दिया गया था, जो शासन के आदेशों एवं निर्देशों की प्रत्यक्ष अवहेलना है।
7. जेडीसी बिना किसी शिकायत के विकास खंडों में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने कार्यालय से खंड विकास अधिकारी को जांच के लिए पत्र जारी करते हैं। वह ग्राम पंचायतों में जाकर अनावश्यक रूप से जांच करते हैं। संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान सचिव को अपने पद का दबाव बनाकर अनुचित वसूली करते हैं। इनका विकास ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम दो दिन का होता है। इनके द्वारा ग्राम पंचायतों में किए गए जांच के क्रम में कोई निरीक्षण आख्या जनपद संतकबीरनगर में नहीं आती है, जो यह स्पष्ट करता है कि उनका यह कृत्य अनुचित और धन उगाही के उद्देश्य से है।

बोले जिम्मेदार
विधायक एक जनप्रतिनिधि हैं, वह आरोप लगाने के लिए स्वतंत्र हैं। उनके द्वारा लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्हें जो भी जांच मिलती है वह करते हैं। वह नियमानुसार काम कर रहे हैं।


- संत कुमार, संयुक्त विकास आयुक्त, बस्ती मंडल

सीडीओ रहने के दौरान उन्हें सभी ब्लॉकों के बारे में जानकारी थी। जेडीसी बनने के बाद वह चुनिंदा ग्राम पंचायतों का निरीक्षण करते रहे, जबकि जांच रिपोर्ट किसी भी उच्चाधिकारी को नहीं दिया। तमाम ग्राम पंचायतों से शिकायत मिलने के बाद उन्होंने शासन स्तर पर जांच व कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
- अनिल कुमार त्रिपाठी, विधायक मेंहदावल
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