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Sant Kabir Nagar News: कबीर निर्वाण स्थली पर देशभर से पहुंच रहे अनुयायी

Fri, 17 Jan 2025 11:54 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर Updated Fri, 17 Jan 2025 11:54 PM IST
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Followers from all over the country are reaching the place of Kabir Nirvana.
मगहर। कबीर निर्वाण स्थली मगहर में लगने वाले खिचड़ी मेले में श्रद्धालु का पहुंचना जारी है। यहां आकर लोग कबीर के विचारों को आत्मसात कर रहे हैं। आस्था और श्रद्धा ऐसी कि दूसरे राज्यों के अनुयायी भी पहुंच रहे हैं और संत कबीर के जीवन से परिचित हो रहे हैं।
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संत कबीर की निर्वाण स्थली परिसर मगहर में लगे खिचड़ी मेले में भीड़ जुट रही है। इससे मेले में रौनक बढ़ गई है। विभिन्न प्रकार के लगे झूले मेले के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। संत कबीर की निर्वाण स्थली पर लगने वाला मेला पुराना और परंपरागत है। मेले में मीना बाजार से झूला और खजला देखने को मिल रहा है। झूले का आनंद ले रहे हैं बच्चे और युवा : मेले में छोटे बड़े झूले, ड्रेगन ट्रेन, ब्रेक डांस, टोरा-टोरा, बच्चों के लिए अप्पू झूला, नाव और झूला आदि का प्रबंध किया गया है। अप्पू झूला बच्चों को बहुत भा रहा है। वहीं जंपिग झूले पर बच्चे खूब मस्ती करते हुए दिखाई दिए।
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वहीं मेले में आए लोग खजला की खरीदारी खूब कर रहे हैं। बहराइच और अन्य स्थानों से आए खजला के दुकानदार मीठा, नमकीन, खजला बना रहे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सादी वर्दी में भी पुलिस : लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेले में बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है। यहां पर मेला थाना भी बनाया गया है। चौकी प्रभारी मगहर मनीष जायसवाल अपनी पूरी टीम के साथ मेले में आए लोगो की सुरक्षा देख रहे हैं।
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वर्ष 1518 से लग रहा है मेला
कबीर चौरा के महंथ विचारदास बताते हैं कि यह मेला 1518 ईस्वी में संत कबीर के निर्वाण के बाद से लगातार लग रहा है। लोग पहले कबीरदास को खिचड़ी अन्न देते थे, जब वह जीवित थे। उनके निर्वाण के बाद लोगों ने खिचड़ी को उनकी समाधि पर समर्पित करना शुरू कर दिया था। खिचड़ी देने की परंपरा 1515 ईस्वी में कबीर धूनी पर आयोजित संत सम्मेलन से शुरू हुई है। इस संत सम्मेलन में कबीरदास के अतिरिक्त गुरुनानक, गुरु गोरक्षनाथ, संत रविदास, वैष्णव संत केशवदास के साथ सूफी साहेब जुटे थे। इन्हीं संतों की वजह से इस क्षेत्र को भीषण अकाल से मुक्ति मिली थी।
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