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घाघरा नदी के जल स्तर में बढ़ोत्तरी
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धनघटा तहसील क्षेत्र में घाघटा नदी का जलस्तर बढने से फसल हुआ जलमग्न
- फोटो : KHALILABAD
घाघरा का बढ़ा जलस्तर, डूबी धान की फसल
हैंसर(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले 24 घंटे में 30 सेंटीमीटर पानी बढ़ने से नदी के तट पर बोई गई फसल जलमग्न हो गई है। फसलों में पानी भरने से कुछ किसान जहां खुश है, वहीं कुछ के चेहरे पर फसल नष्ट होने की आशंका से मायूसी छा गई है।
घाघरा नदी का जल स्तर तुर्कवलिया नायक के पास शनिवार की सुबह 78 सेंटीमीटर मापा गया था तो रविवार की सुबह वह 78.30 सेंटी मीटर पर पहुंच गया। सिंचाई विभाग के जिम्मेदार बताते है कि नदी 24 घंटे में 30 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बरसात न होने के कारण धान की फसल की सिंचाई करने को किसान विवश है। ऐसे में शनिवार की सुबह से घाघरा का पानी बढ़कर नदी के किनारे बोई गई धान की फसल को डूबों दिया है। जिन किसानों की फसल दिखाई दे रही है, वह तो पानी को फसल के लिए वरदान मान रहे है, लेकिन जिन लोगों की फसल पानी के कारण नही दिख रही है, वह लोग फसल बर्बाद होने की आशंका से मायूस है। किसानों का कहना है कि नदी का जल स्तर और अधिक नही बढ़ा तो यह पानी फसल के लिए बरदान साबित होगी, क्योकि बरसात न होने के कारण खेत सूख रहे थे। अब जब नदी का पानी बढ़कर फसलों में जाकर हिलोरे मार रही है तो फसल के लिए फायदे मंद है। अगर पानी और बढ़ा तो फसल बर्बाद हो सकती है। किसानों का कहना है कि नदी का जल स्तर इस बार तेजी के साथ बढ़ रहा है। जिन किसानों की फसल पानी के कारण दिखाई नही दे रही है। उनके माथे पर चिंता की लकीर दिखने लगी है। उनका कहना है कि अगर दो से तीन दिन तक फसल के ऊपर इसी तरह पानी रहा तो धान की फसल नष्ट हो सकती है।
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हैंसर(संतकबीरनगर)। घाघरा नदी के जलस्तर में एक बार फिर बढ़ोत्तरी हो रही है। पिछले 24 घंटे में 30 सेंटीमीटर पानी बढ़ने से नदी के तट पर बोई गई फसल जलमग्न हो गई है। फसलों में पानी भरने से कुछ किसान जहां खुश है, वहीं कुछ के चेहरे पर फसल नष्ट होने की आशंका से मायूसी छा गई है।
घाघरा नदी का जल स्तर तुर्कवलिया नायक के पास शनिवार की सुबह 78 सेंटीमीटर मापा गया था तो रविवार की सुबह वह 78.30 सेंटी मीटर पर पहुंच गया। सिंचाई विभाग के जिम्मेदार बताते है कि नदी 24 घंटे में 30 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी हुई है। बरसात न होने के कारण धान की फसल की सिंचाई करने को किसान विवश है। ऐसे में शनिवार की सुबह से घाघरा का पानी बढ़कर नदी के किनारे बोई गई धान की फसल को डूबों दिया है। जिन किसानों की फसल दिखाई दे रही है, वह तो पानी को फसल के लिए वरदान मान रहे है, लेकिन जिन लोगों की फसल पानी के कारण नही दिख रही है, वह लोग फसल बर्बाद होने की आशंका से मायूस है। किसानों का कहना है कि नदी का जल स्तर और अधिक नही बढ़ा तो यह पानी फसल के लिए बरदान साबित होगी, क्योकि बरसात न होने के कारण खेत सूख रहे थे। अब जब नदी का पानी बढ़कर फसलों में जाकर हिलोरे मार रही है तो फसल के लिए फायदे मंद है। अगर पानी और बढ़ा तो फसल बर्बाद हो सकती है। किसानों का कहना है कि नदी का जल स्तर इस बार तेजी के साथ बढ़ रहा है। जिन किसानों की फसल पानी के कारण दिखाई नही दे रही है। उनके माथे पर चिंता की लकीर दिखने लगी है। उनका कहना है कि अगर दो से तीन दिन तक फसल के ऊपर इसी तरह पानी रहा तो धान की फसल नष्ट हो सकती है।
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