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राम नाम से अलग होती है अनुभूति : वेदव्यास
Tue, 07 Nov 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 07 Nov 2023 11:51 PM IST
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मेंहदावल। कुबेर स्थान शिव मंदिर में मुख्य प्रवचन कर्ता बाल संत वेदव्यास ने कहा कि राम शब्द दिखने में जहां सुंदर है, उससे कहीं महत्वपूर्ण है उच्चारण। राम नाम मात्र से शरीर और मन में अलग तरह की अनुभूति होती है।
उन्होंने कहा कि राम शब्द में प्रतिक्रिया होती है। आत्मिक शांति प्रदान करती है। तुलसीदास ने सच ही कहा है कि ...कलयुग बस एक नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा...। सतयुग और त्रेता युग में भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या करनी पड़ती थी। कलयुग में राम नाम का भजन ही पर्याप्त है। उन्होंने ने कहा कि लंका विजय प्राप्त करने और सीता माता को लाने के लिए भगवान रामचंद्र जी समुद्र के तट पर पहुंचे। उस वक्त विशाल समुद्र को पार करना पूरी सेना के लिए कठिन था। समुद्र पर पुल बांधने के लिए भगवान राम की सेना पत्थर पर केवल राम का नाम लेकर उसे समुद्र में डालती गई। राम नाम की महत्ता से वह पत्थर पानी पर तैरने लगा और पुल का निर्माण हो गया। इस अवसर पर संयोजक कमलेश चंद्र त्रिपाठी, विश्वक सेन मणि त्रिपाठी, पंडित कमला प्रसाद पति मिश्र, हरिशचंद्र गुप्त, पिंटू वर्मा, पंकज जायसवाल, राजन मोदनवाल आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि राम शब्द में प्रतिक्रिया होती है। आत्मिक शांति प्रदान करती है। तुलसीदास ने सच ही कहा है कि ...कलयुग बस एक नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहि पारा...। सतयुग और त्रेता युग में भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या करनी पड़ती थी। कलयुग में राम नाम का भजन ही पर्याप्त है। उन्होंने ने कहा कि लंका विजय प्राप्त करने और सीता माता को लाने के लिए भगवान रामचंद्र जी समुद्र के तट पर पहुंचे। उस वक्त विशाल समुद्र को पार करना पूरी सेना के लिए कठिन था। समुद्र पर पुल बांधने के लिए भगवान राम की सेना पत्थर पर केवल राम का नाम लेकर उसे समुद्र में डालती गई। राम नाम की महत्ता से वह पत्थर पानी पर तैरने लगा और पुल का निर्माण हो गया। इस अवसर पर संयोजक कमलेश चंद्र त्रिपाठी, विश्वक सेन मणि त्रिपाठी, पंडित कमला प्रसाद पति मिश्र, हरिशचंद्र गुप्त, पिंटू वर्मा, पंकज जायसवाल, राजन मोदनवाल आदि मौजूद रहे।
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