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Sant Kabir Nagar News: दुबारा दुनिया देखने से पहले ही बंद हो गई आंखें

Tue, 06 Feb 2024 02:45 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Feb 2024 02:45 AM IST
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Eyes closed before seeing the world again
सुकरौली बाजार।
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आंखों के आपरेशन के बाद धुंधली हो चुकी दुनिया को दुबारा देख सकने की खुशी झुरर्रयों वाले उन चेहरों पर साफ झलक रही थी। न जाने क्या-क्या सपने उन बूढ़ी आंखों में तैर रहे होंगे इस खुशी को जीने के लिए। आर्थिक तंगी के कारण बोझिल हो चुकी उनकी दुनिया में उम्मीद का सवेरा बस आने वाला ही था, पर.. नियति ने तो कुछ और ही तय कर रखा था। बस एक पल... और इस खुशी को जी सकने से पहले ही उन चार बुजुर्गों की आंखें सड़क हादसे में सदा के लिए बंद हो गईं।

रविवार को आंखों का ऑपरेशन कराने के लिए निकले आठ बुजुर्ग लंबे समय से मोतियाबिंद से पीड़ित थे लेकिन आर्थिक तंगी के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था। गोरखपुर के एक निजी नेत्र अस्पताल की ओर से लगे कैंप के बाद निशुल्क मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने के लिए इनको रविवार को बुलाया गया था। ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में विलंब हो गया। गोरखपुर में रहने की व्यवस्था नहीं होने और टेंपो चालक की जल्दी के कारण सभी लोग रात करीब 8 बजे गोरखपुर से चल दिए। कोहरा होने के कारण रास्ते में देर हो गई। जोल्हिनिया चौराहा से गांव वाली सड़क पर जाने के लिए हाईवे का कट पार करते समय उनकी टेंपो को एक वाहन ने टक्कर मार दी जिसमें गुलाबी देवी, उषा देवी, श्रीराम और इंद्रावती देवी ने दम तोड़ दिया। चार अन्य बुजुर्ग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। हादसे में घर के बुजुर्ग की मौत की खबर मिलते ही उनके घरों में चीख पुकार मच गई। सोमवार को हाटा कोतवाली में मृतकों के परिजनों के साथ उनके गांववालों का जमघट लग गया। मृतक के परिजन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। हादसे के बाद एसडीएम राजेश कुमार वर्मा मृतकों के परिजनों से मिलकर ढाढ़स बंधाया। शासकीय मदद दिलाने का आश्वासन दिया। वहीं, शंखापार का टेंपो चालक अनिरुद्ध घटना के बाद से ही लापता है। उसके परिजन भी घर पर मौजूद नहीं हैं।
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आयुष्मान के तहत हुआ था ऑपरेशन

आर्थिक तंगी से जूझ रहे बुजुर्गों के पास आयुष्मान कार्ड था। इसी योजना के तहत गोरखपुर के निजी अस्पताल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने गए थे। घर वालों की माने तो आयुष्मान कार्ड को लेकर मेडिकल कॉलेज के अलावा कई सरकारी अस्पतालों पर मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए बुजुर्ग गए थे, लेकिन किसी भी अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो सका था।
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पति का पहले छूट गया था साथ, बेटियों की शादी के बाद खुद छोड़ी दुनिया

मृतक इंद्रावती देवी के पति की दो साल पहले मौत हो चुकी थी। उसकी छह बेटियां हैं, छोटी बेटी की शादी दिसंबर 2023 में कर दी थी। इंद्रावती की मौत के बाद रिश्तेदार दरवाजे पर पहुंच गए और बेटिया दहाड़े मारकर रो रही थी। इंद्रावती का अंतिम संस्कार पोते ने किया। पिड़रा की रहने वाली गुलाबी देवी का एक बेटा है, जो मजदूरी कर परिवार चलाता है। मृतक और घायलों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण गांव वालों ने दाह संस्कार में सहयोग किया। गांव वालों ने प्रशासन से सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता देने की मांग की है।




घने कोहरे में कुछ भी पता नहीं चल रहा था
वाहन की टक्कर इतनी तेज थी कि उसकी आवाज सुनकर मौके पर आसपास के गांव के लोग मौके पर पहुंच गए। टेंपो में दबे लोग चीख रहे थे। कोहरा इतना था कि कुछ समझ में नहीं आ रहा था। करीब आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस बुलाकर अस्पताल भेजा गया। जब लोग पहुंचे तो मौके पर टेंपो चालक नहीं था। टेंपो में सभी लोग दबे हुए थे, काफी प्रयास के बाद सभी को बाहर निकाला गया।
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