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Sant Kabir Nagar News: विश्व विरासत दिवस पर एचआरपीजी कॉलेज में लगी प्रदर्शनी
Sat, 22 Nov 2025 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 22 Nov 2025 12:54 AM IST
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एचआरपीजी कॉलेज में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन करते प्राचार्य-स्रोत कॉलेज
संतकबीरनगर। एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद में शुक्रवार को विश्व विरासत सप्ताह के तहत क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, गोरखपुर की ओर से भविष्य की प्रेरणा के लिए धरोहर का संरक्षण विषयक प्रदर्शनी एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्राचार्य प्रोफेसर ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने किया। प्रदर्शित चित्रों में कौवाखोह, अहरौरा और हथवनिया के शैलचित्र प्रमुख रहे।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. कृष्ण मोहन दुबे ने कहा कि इन चित्रों का निर्माण उच्च पुरापाषाण काल से लेकर आधुनिक काल तक हुआ है। जौनपुर में स्थित पत्थर का शेर, सोनिक उत्खनित स्थल, लखनऊ जनपद स्थित उत्खननित पुरास्थल हुलास खेड़ा के चित्र प्रदर्शित किए गए। जनपद चंदौली के मल्हर पुरास्थल से लोहे के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इसकी तिथि लगभग 1800 ईसा पूर्व निर्धारित की गई है।
जनपद महराजगंज स्थित राजधानी पुरास्थल के उत्खनन का दृश्य, बटेश्वर के मंदिर, चुनार का किला, दिगारा की गढ़ी टिकैत राय का शिव मंदिर, बिठूर, जनपद मथुरा के महावन में स्थित ताज बीबी एवं रसखान की समाधि, लखनऊ के कैसरबाग में स्थित छतर मंजिल एवं फरहत बख्श कोठी, कुसुम मानसरोवर, गोवर्धन, मथुरा आदि के दृश्य प्रदर्शित किए गए।
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डॉ. कृष्ण मोहन दुबे ने कहा कि अपने पूर्वजों द्वारा प्राप्त धरोहरों का संरक्षण संवर्धन एवं इसी रूप में भावी पीढ़ी को समर्पित करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। हमारा यह दायित्व है की जो धरोहर हमारे लिए उपलब्ध हैं उनको हम इसी रूप में आगे आने वाली पीढि़याें को प्रदान करें। विश्व धरोहर सप्ताह 19 से 25 नवंबर तक मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रोफेसर प्रताप विजय कुमार, डाॅ. राम प्रताप राज, डॉ विजय मिश्र समेत आदि मौजूद रहे।
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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. कृष्ण मोहन दुबे ने कहा कि इन चित्रों का निर्माण उच्च पुरापाषाण काल से लेकर आधुनिक काल तक हुआ है। जौनपुर में स्थित पत्थर का शेर, सोनिक उत्खनित स्थल, लखनऊ जनपद स्थित उत्खननित पुरास्थल हुलास खेड़ा के चित्र प्रदर्शित किए गए। जनपद चंदौली के मल्हर पुरास्थल से लोहे के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इसकी तिथि लगभग 1800 ईसा पूर्व निर्धारित की गई है।
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जनपद महराजगंज स्थित राजधानी पुरास्थल के उत्खनन का दृश्य, बटेश्वर के मंदिर, चुनार का किला, दिगारा की गढ़ी टिकैत राय का शिव मंदिर, बिठूर, जनपद मथुरा के महावन में स्थित ताज बीबी एवं रसखान की समाधि, लखनऊ के कैसरबाग में स्थित छतर मंजिल एवं फरहत बख्श कोठी, कुसुम मानसरोवर, गोवर्धन, मथुरा आदि के दृश्य प्रदर्शित किए गए।
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डॉ. कृष्ण मोहन दुबे ने कहा कि अपने पूर्वजों द्वारा प्राप्त धरोहरों का संरक्षण संवर्धन एवं इसी रूप में भावी पीढ़ी को समर्पित करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। हमारा यह दायित्व है की जो धरोहर हमारे लिए उपलब्ध हैं उनको हम इसी रूप में आगे आने वाली पीढि़याें को प्रदान करें। विश्व धरोहर सप्ताह 19 से 25 नवंबर तक मनाया जा रहा है। इस दौरान प्रोफेसर प्रताप विजय कुमार, डाॅ. राम प्रताप राज, डॉ विजय मिश्र समेत आदि मौजूद रहे।