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शिक्षा के जरिये बनाएं सशक्त पहचान : प्रोफेसर विजय कृष्ण
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एचआरपीजी कॉलेज में छात्र छात्राओ के बिदाई समारोह को संबोधित करते डॉ बिजय कृष्ण ओझा।संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद के रसायन विज्ञान विभाग में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इसमें स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को विदाई दी। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर विजय कृष्ण ओझा ने कहा कि शिक्षा अंतर निहित पूर्णता को प्राप्त करने का माध्यम है। आप सभी अपने आत्म में निहित पूर्णतत्व को प्राप्त करें। शिक्षा के जरिये समाज और देश में अपने- अपने गुरुओं और अपने परिवार को एक सशक्त पहचान प्रदान करें।
विज्ञान संकाय के प्रोफेसर विजय राय ने कहा कि आप सभी विज्ञान के छात्र हैं। आपका दायित्व है कि विज्ञान के साथ समाज के लिए भी आप कुछ करते रहें। स्वावलंबी बनने के साथ ही आपका ज्ञान सामाजिक संदर्भ में भी उपयोगी होगा।
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शिक्षा शारीरिक और मानसिक विकास के साथ ही सामाजिक विकास पर भी केंद्रित होनी चाहिए, तभी शिक्षा चरित्र निर्माण में सहायक होती हैं। रसायन शास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. राजकुमारी ओझा ने कहा कि आना जाना प्राकृतिक प्रक्रिया हैं और यही प्रकृति का सौंदर्य भी हैं।
इस अवसर पर डॉ. अनुपम पति त्रिपाठी, डॉ. आशा मिश्रा, डॉ. चंद्रभान ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान छात्र- छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार गुप्त, डॉ. कमलेश पांडेय, डॉ. शिवांगी सिंह, डॉ. सोयबा खातून, डॉ. हेमंत चतुर्वेदी, डॉ. इमरान अहमद आदि मौजूद रहे।
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संतकबीरनगर। एचआरपीजी कॉलेज खलीलाबाद के रसायन विज्ञान विभाग में विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इसमें स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को विदाई दी। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर विजय कृष्ण ओझा ने कहा कि शिक्षा अंतर निहित पूर्णता को प्राप्त करने का माध्यम है। आप सभी अपने आत्म में निहित पूर्णतत्व को प्राप्त करें। शिक्षा के जरिये समाज और देश में अपने- अपने गुरुओं और अपने परिवार को एक सशक्त पहचान प्रदान करें।
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विज्ञान संकाय के प्रोफेसर विजय राय ने कहा कि आप सभी विज्ञान के छात्र हैं। आपका दायित्व है कि विज्ञान के साथ समाज के लिए भी आप कुछ करते रहें। स्वावलंबी बनने के साथ ही आपका ज्ञान सामाजिक संदर्भ में भी उपयोगी होगा।
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शिक्षा शारीरिक और मानसिक विकास के साथ ही सामाजिक विकास पर भी केंद्रित होनी चाहिए, तभी शिक्षा चरित्र निर्माण में सहायक होती हैं। रसायन शास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. राजकुमारी ओझा ने कहा कि आना जाना प्राकृतिक प्रक्रिया हैं और यही प्रकृति का सौंदर्य भी हैं।
इस अवसर पर डॉ. अनुपम पति त्रिपाठी, डॉ. आशा मिश्रा, डॉ. चंद्रभान ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान छात्र- छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में डॉ. दिनेश कुमार गुप्त, डॉ. कमलेश पांडेय, डॉ. शिवांगी सिंह, डॉ. सोयबा खातून, डॉ. हेमंत चतुर्वेदी, डॉ. इमरान अहमद आदि मौजूद रहे।