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Sant Kabir Nagar News: बरगदों को काटकर सब खुश हैं हिंदुस्तान में...
Sun, 27 Jul 2025 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 27 Jul 2025 11:17 PM IST
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खलीलाबाद के गोला बाजार में जन साहित्यिक मंच के जरिए कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में गोला बाजार में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमे कवियों ने अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कवि राजेंद्र बहादुर सिंह ने बालकनी में लॉन में नागफनी सजी गुलदान में, बरगदों को काटकर सब खुश हैं हिंदुस्तान में पंक्तियां सुनाई तो लोगों ने तालिया बजाकर स्वागत किया।
कवि महमूद गोरखपुरी ने तूफान उठ रहा है दिले बेकरार में, करवट बदल रहा हूं तेरे इंतजार में सुनाकर माहौल काे खुशनुमा बना दिया। राधेश्याम मिश्र ने वर्षा है पानी खुश हाेई गइल मनवा, चला चली खेतवा में गाड़ल जाय धनवा सुनाया। मजहर खलीलाबादी ने उठी मयकढे पर घटा धीरे-धीरे मए अदे साकी पिला धीरे-धीरे। कवि कौसर गोरखपुरी ने सिर्फ इतनी हुई खता हमसे झूठ बोला नहीं गया हमसे सुनाकर सत्य के महत्व का बताया। कवि ओम प्रकाश गौतम ने जनमत में इंकलाब अभी तक नहीं हुआ वह मुल्क कामयाब अभी तक नहीं हुआ सुनाकर इंकलाब को आवश्यक बताया।
सरदार हरिभजन सिंह ने जो लम्हे है चलो हंस कर बिता ले, भजन जाने कल क्या जिंदगी का फैसला होगा। वरिष्ठ कवि अवधेश पांडेय ने खेल चुके हम बहुत चांदनी के आंगन में, आओ थोड़ा सूरज से भी आंख मिलाए। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने बेजा सताया जाना ही आतंकवाद है, लोगों ने सोचने का नजरिया बदल दिया सुनाकर अन्याय को ही आतंकवाद बताया। इसी तरह से नजर मगहरी, सूरज कुंवर हसरस, नरसिंह नारायण कमल आदि ने भी अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
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इस दौरान शिवा पांडेय, ज्योति सिंह अहसास, कैलाश चंद दुबे चंचल, ब्रह्मनाथ पांडेय, रहबर मेंहदावली, राजेश मृदुल, मोहम्मद अली, देवानंद बच्चन, अवनीश कुमार, मुहम्मद आमिर खान आदि ने भी अपनी रचनाएं सुनाई।
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कवि महमूद गोरखपुरी ने तूफान उठ रहा है दिले बेकरार में, करवट बदल रहा हूं तेरे इंतजार में सुनाकर माहौल काे खुशनुमा बना दिया। राधेश्याम मिश्र ने वर्षा है पानी खुश हाेई गइल मनवा, चला चली खेतवा में गाड़ल जाय धनवा सुनाया। मजहर खलीलाबादी ने उठी मयकढे पर घटा धीरे-धीरे मए अदे साकी पिला धीरे-धीरे। कवि कौसर गोरखपुरी ने सिर्फ इतनी हुई खता हमसे झूठ बोला नहीं गया हमसे सुनाकर सत्य के महत्व का बताया। कवि ओम प्रकाश गौतम ने जनमत में इंकलाब अभी तक नहीं हुआ वह मुल्क कामयाब अभी तक नहीं हुआ सुनाकर इंकलाब को आवश्यक बताया।
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सरदार हरिभजन सिंह ने जो लम्हे है चलो हंस कर बिता ले, भजन जाने कल क्या जिंदगी का फैसला होगा। वरिष्ठ कवि अवधेश पांडेय ने खेल चुके हम बहुत चांदनी के आंगन में, आओ थोड़ा सूरज से भी आंख मिलाए। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने बेजा सताया जाना ही आतंकवाद है, लोगों ने सोचने का नजरिया बदल दिया सुनाकर अन्याय को ही आतंकवाद बताया। इसी तरह से नजर मगहरी, सूरज कुंवर हसरस, नरसिंह नारायण कमल आदि ने भी अपनी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
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इस दौरान शिवा पांडेय, ज्योति सिंह अहसास, कैलाश चंद दुबे चंचल, ब्रह्मनाथ पांडेय, रहबर मेंहदावली, राजेश मृदुल, मोहम्मद अली, देवानंद बच्चन, अवनीश कुमार, मुहम्मद आमिर खान आदि ने भी अपनी रचनाएं सुनाई।