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Sant Kabir Nagar News: ''मिनिमम विजिबिलिटी'' में भी हाईवे पर स्लीपर बसों की है '' मैक्सिमम स्पीड''

Thu, 18 Dec 2025 11:31 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Dec 2025 11:31 PM IST
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Even in conditions of "minimum visibility," sleeper buses maintain "maximum speed" on the highway.
कोहरे के बीच चलती स्लीपर बस।
संतकबीरनगर। हाईवे और एक्सप्रेस वे पर शीतलहर और कोहरे के चलते स्लीपर बसों की होने वाली दुर्घटनाओं के बाद भी स्पीड पर नकेल नहीं कसी जा रही है। संतकबीरनगर में पड़ने वाले 23 किलोमीटर हाईवे पर भी स्लीपर बसें मिनिमम विजिबिलिटी के बीच भी मैक्सिमम स्पीड में चल रही हैं। इसके कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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कोहरे और शीतलहर के चलते जिले में पूरे दिन हाईवे पर बृहस्पतिवार को धुंध दिखाई दे रही थी। इस धुंध के बाद भी राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 28 पर इन स्लीपर बसों की स्पीड में कहीं कोई कमी नहीं दिखी। स्थिति यह रही कि लगातार हाॅर्न बजाते हुए स्लीपर बसें दूसरी गाड़ियों को ओवरटेक करते हुए चल रही थीं। चाहे सड़क पर ट्रैफिक कम हो या फिर विजिबिलिटी कम हो। इससे इनके चालकों के उपर कोई असर नहीं पड़ता है। वहीं अपने गंतव्य पर जाने की चाह में इन बसों में यात्रा करनी यात्रियों की मजबूरी बन गई है।
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स्टैंड पर चलते हुए ही बैठाती हैं यात्रियों को
स्लीपर बसों की स्थिति यह है कि अगर किसी यात्री का टिकट बस में बुक है और उसके पास अधिक सामान नहीं है तो बस का ड्राइवर स्पीड कम करता है और चलते हुए ही यात्री को खींचकर बस में बैठा लेता है। अगर यात्री के पास सामान अधिक है तो बस को स्टार्ट रखते हुए ही जल्दी में सामान रखवाया और यात्रियों को बैठाया जाता है।
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फुल स्पीड में ही होती है ओवरटेकिंग
स्लीपर बसों की स्थिति यह है कि अगर किसी वाहन को ओवर टेक करती हैं तो वह भी पूरी स्पीड में ही करती हैं। ऐसे में हाईवे की बार्डर लाइन को भी क्रास करने से इन बसों के चालक नहीं चूकते हैं। मड़या में स्थित कालीमंदिर पर पिछले दिनों एक बाइक सवार इसी ओवरटेकिंग के चलते गिरकर घायल हो गया था। इस दौरान उसे चोट आई ही, उसकी बाइक दूर तक घिसटती चली गई। वहीं बस चालक बस लेकर फरार हो गया।

क्या होता है विजिबिलिटी के हिसाब से स्पीड लिमिट
एचआर इंटर काॅलेज के भौतिक विज्ञान विभाग के व्याख्याता अभिषेक सिंह बताते हैं कि विजिबिलिटी (दृश्यता) के हिसाब से गाड़ी की स्पीड इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितना दूर तक देख पा रहे हैं। मुख्य नियम है कि आपकी गाड़ी की स्पीड इतनी हो कि आप अपनी देखने की दूरी के अंदर रुक सकें, यानी अगर दिखते ही ब्रेक लगाएं, तो गाड़ी रुक जाए। धुंध या कम रोशनी में यह 20-30 किमी प्रति घंटा है। यह स्पीड 35-60 मीटर विजिबिलिटी के लिए है। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड 140 से अधिक मीटर विजिबिलिटी के लिए होती है। तेज स्पीड से रिएक्शन टाइम कम हो जाता है और एक्सीडेंट का खतरा बढ़ता है।



बस चालकों को बसों में रिफ्लेक्टर लगाने के साथ ही स्पीड लिमिट में भी चलने के निर्देश दिए गए हैं। स्पीड मापने के लिए एक वाहन आया है। उसे इंस्टाल नहीं किया गया है। इंस्टाल होने के बाद स्पीड चेक की जाएगी।

प्रियंबदा सिंह, एआरटीओ, संतकबीरनगर
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