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दिन-रात चल रहा आशा कार्यकर्ताओं का धरना
Sant Kabir Nagar
Updated Tue, 27 Sep 2016 11:18 PM IST
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अपनी मांगों को लेकर सीएचसी खलीलाबाद में धरना देतीं आशा कार्यकर्ता ।
- फोटो : अमर उजाला
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राज्य महिला आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री संघ के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 22 सितंबर से चल रहा धरना जारी है।कुछ दिनों से धरना दिन-रात चल रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को भी धरना दिन-रात चलता रहा। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी घोषित करने तथा 15 हजार रुपये मानदेय दिए जाने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि यदि मांगे पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरने में जिलाध्यक्ष माया सिंह ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने पोलियो अभियान के बहिष्कार का निर्णय लिया था, जो पूर्ण रूप से सफल रहा। आशा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न तत्काल बंद होना चाहिए। जिला संरक्षक बाल गोविंद सिंह ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अब तक धरना दिया है, लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उन्होंने मांग किया की कि जो मांगे स्थानीय स्तर की है, उसका निस्तारण विभाग तत्काल करें। जिला महामंत्री एवं ब्लाक अध्यक्ष सरोज यादव ने कहा कि आशा कार्यकर्ता दस वर्ष तक निष्ठा के साथ काम करती रहीं।
इसी की नतीजा है कि मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी आई। इसके बाद भी आशा कार्यकर्ताओं को मानदेय नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ पारिश्रमिक मिलता है वह भी समय से नहीं मिलता। ऐसे में आशा कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठेंगी। इस दौरान मुन्नी देवी, सुनीता देवी, गुड्डी देवी, विंद्रावती देवी, सुनीता सिंह, मीरा देवी, सुमित्रा देवी, लीलावती देवी, गीता गुप्ता, इंद्रजीत कमल, जाहिदा खातून, ऊषा देवी, मनोरमा, पूनम देवी, द्रोपदी, विंदु, आरती देवी, कौशिल्या मौजूद रहीं।
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धरने में जिलाध्यक्ष माया सिंह ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने पोलियो अभियान के बहिष्कार का निर्णय लिया था, जो पूर्ण रूप से सफल रहा। आशा कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न तत्काल बंद होना चाहिए। जिला संरक्षक बाल गोविंद सिंह ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से अब तक धरना दिया है, लेकिन अभी तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उन्होंने मांग किया की कि जो मांगे स्थानीय स्तर की है, उसका निस्तारण विभाग तत्काल करें। जिला महामंत्री एवं ब्लाक अध्यक्ष सरोज यादव ने कहा कि आशा कार्यकर्ता दस वर्ष तक निष्ठा के साथ काम करती रहीं।
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इसी की नतीजा है कि मातृ व शिशु मृत्यु दर में कमी आई। इसके बाद भी आशा कार्यकर्ताओं को मानदेय नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ पारिश्रमिक मिलता है वह भी समय से नहीं मिलता। ऐसे में आशा कार्यकर्ता अब चुप नहीं बैठेंगी। इस दौरान मुन्नी देवी, सुनीता देवी, गुड्डी देवी, विंद्रावती देवी, सुनीता सिंह, मीरा देवी, सुमित्रा देवी, लीलावती देवी, गीता गुप्ता, इंद्रजीत कमल, जाहिदा खातून, ऊषा देवी, मनोरमा, पूनम देवी, द्रोपदी, विंदु, आरती देवी, कौशिल्या मौजूद रहीं।
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