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Sant Kabir Nagar News: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने दिया धरना
Wed, 07 Jan 2026 12:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 07 Jan 2026 12:08 AM IST
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संतकबीरनगर। बिजली निगमों के निजीकरण के विरोध में मंगलवार को भी बिजली कर्मियों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर धरना दिया। इस दौरान बिजली कर्मियों ने कहा कि जब तक निजीकरण का फैसना निरस्त नहीं होगा, तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
विद्युत संघर्ष समिति के पदाधिकारी सुनील प्रजापति ने कहा कि झूठे आंकड़ों के आधार पर विद्युत निगमों के निजीकरण की साजिश की जा रही है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली निगम के निजीकरण की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद पुडुचेरी के निजीकरण के लिए साढे तीन साल पहले टेंडर नोटिस प्रकाशित की गई थी। निजीकरण की घोषणा होते ही पुडुचेरी के बिजली कर्मियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। इसके बाद निजीकरण का टेंडर निरस्त कर दिया गया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी भास्कर पांडेय ने कहा की पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश है और पुडुचेरी के निजीकरण का टेंडर रद्द करने का फैसला केंद्र सरकार की अनुमति से लिया गया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी रमेश प्रजापति ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने पुडुचेरी के निजीकरण का टेंडर रद्द कर दिया है और केंद्र सरकार के सहयोगी दल ने आंध्र प्रदेश में बिजली का निजीकरण न करने का ऐलान कर दिया है तब यह जरूरी हो गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की पहल करे।
धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, रंजन कुमार, श्रवण प्रजापति, धीरेंद्र यादव, पुष्पेंद्र भारती, विजय कुमार, अशोक कुमार, आशीष कुमार, वीरेंद्र मौर्य, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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विद्युत संघर्ष समिति के पदाधिकारी सुनील प्रजापति ने कहा कि झूठे आंकड़ों के आधार पर विद्युत निगमों के निजीकरण की साजिश की जा रही है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली निगम के निजीकरण की केंद्र सरकार की घोषणा के बाद पुडुचेरी के निजीकरण के लिए साढे तीन साल पहले टेंडर नोटिस प्रकाशित की गई थी। निजीकरण की घोषणा होते ही पुडुचेरी के बिजली कर्मियों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। इसके बाद निजीकरण का टेंडर निरस्त कर दिया गया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी भास्कर पांडेय ने कहा की पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश है और पुडुचेरी के निजीकरण का टेंडर रद्द करने का फैसला केंद्र सरकार की अनुमति से लिया गया है। संघर्ष समिति के पदाधिकारी रमेश प्रजापति ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने पुडुचेरी के निजीकरण का टेंडर रद्द कर दिया है और केंद्र सरकार के सहयोगी दल ने आंध्र प्रदेश में बिजली का निजीकरण न करने का ऐलान कर दिया है तब यह जरूरी हो गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार भी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की पहल करे।
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धरना में इंजीनियर मुकेश गुप्ता, सूरज प्रजापति, नारायण चंद्र चौरसिया, रंजन कुमार, श्रवण प्रजापति, धीरेंद्र यादव, पुष्पेंद्र भारती, विजय कुमार, अशोक कुमार, आशीष कुमार, वीरेंद्र मौर्य, अमरनाथ यादव, दुर्गा प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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