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Sant Kabir Nagar News: औद्योगिक क्षेत्र में दो साल बाद भी नहीं बन सका विद्युत उपकेंद्र
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खलीलाबाद स्थित पावर हाउस। संवाद
संतकबीरनगर। जिला मुख्यालय स्थित औद्योगिक क्षेत्र में रिवैंप योजना के तहत 33 केवी का विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए जाने के प्रस्ताव पर अब तक शासन की मंजूरी नहीं मिल पाई है। इसके कारण औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों को बिजली किल्लत से जूझना पड़ रहा है। बार-बार ट्रिपिंग के कारण इकाइयां अचानक बंद हो जा रही हैं। इससे उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार की निवेश पाॅलिसी के तहत उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने का कार्य कर रही है पर बिजली संकट इसमें बाधा बन रही है। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्र खलीलाबाद के अधीन स्थापित 33/11 केवी के औद्योगिक उपकेंद्र से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को बिजली की आपूर्ति की जाती है, जिससे उपकेंद्र पर भार अधिक है।
ऐसे में व्यस्त समय में बार-बार बिजली की ट्रिपिंग होती है। ट्रिपिंग के कारण औद्योगिक क्षेत्र में कारखानों की मशीनें बार-बार बंद हो जाती हैं। बिजली के आने-जाने पर मशीनों के गर्म होने में समय लगता है। इससे जहां माल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है वहीं हर माह उद्यमियों को करीब 20 से 25 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए रिवैंप योजना योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्र में 33/11 केवी का नया उपकेंद्र स्थापित किए जाने के लिए करीब दो साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया , लेकिन अब तक शासन की मंजूरी नहीं मिल पाई है। यदि नया उपकेंद्र स्थापित हो जाए तो औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों को काफी राहत मिल सकती है।
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वैसे औद्योगिक क्षेत्र का विकास वर्ष 1973-74 के आसपास शुरू हुआ था। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित यह औद्योगिक क्षेत्र लगभग 231.34 एकड़ में फैला है। इसमें बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। औद्योगिक क्षेत्र के विकास के बाद उस समय की आवश्यकता के अनुरूप विद्युत व्यवस्था के लिए सब स्टेशन विकसित किया गया था।
खलीलाबाद में 132 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र पहले से है। कैग की ऑडिट रिपोर्ट में इसकी 80 एमवीए क्षमता और नवंबर 2018 तक 90 एमवीए कनेक्टेड लोड दर्ज किया गया है। औद्योगिक विस्तार के लिए केवल मौजूदा व्यवस्था पर निर्भर रहने की बजाय अतिरिक्त ट्रांसमिशन क्षमता की दीर्घकालिक योजना आवश्यक है।
उद्योगों में आधुनिक मशीनरी, ऑटोमेशन, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, नई इकाइयों की स्थापना और भविष्य में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के कारण विद्युत भार लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में केवल पुराने वितरण ढांचे पर निर्भर रहना औद्योगिक विकास की गति को प्रभावित कर सकता है। भविष्य में टेक्सटाइल पार्क, होजरी एवं अन्य विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की योजना है।
ऐसे में अभी बिजली का लोड और बढ़ेगा, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। उद्यमी पवन सर्राफ, जय प्रकाश आदि ने कहा कि बिजली संकट को देखते हुए औद्योगिक क्षेत्र में स्वतंत्र फीडर स्थापित किया जाना आवश्यक है।
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औद्योगिक क्षेत्र खलीलाबाद जनपद के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र है। यहां वर्तमान में विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं तथा क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना एवं वर्तमान इकाइयों के विस्तार की निरंतर संभावनाएं बनी हुई हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर स्वतंत्र फीडर स्थापित करने की मांग उठाई गई है।
-अरविंद पाठक, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश इंडस्टि्रयल एसोसिएशन
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सरकार की निवेश पाॅलिसी के तहत उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने का कार्य कर रही है पर बिजली संकट इसमें बाधा बन रही है। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्र खलीलाबाद के अधीन स्थापित 33/11 केवी के औद्योगिक उपकेंद्र से शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को बिजली की आपूर्ति की जाती है, जिससे उपकेंद्र पर भार अधिक है।
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ऐसे में व्यस्त समय में बार-बार बिजली की ट्रिपिंग होती है। ट्रिपिंग के कारण औद्योगिक क्षेत्र में कारखानों की मशीनें बार-बार बंद हो जाती हैं। बिजली के आने-जाने पर मशीनों के गर्म होने में समय लगता है। इससे जहां माल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है वहीं हर माह उद्यमियों को करीब 20 से 25 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। इस समस्या को दूर करने के लिए रिवैंप योजना योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्र में 33/11 केवी का नया उपकेंद्र स्थापित किए जाने के लिए करीब दो साल पहले शासन को प्रस्ताव भेजा गया , लेकिन अब तक शासन की मंजूरी नहीं मिल पाई है। यदि नया उपकेंद्र स्थापित हो जाए तो औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों को काफी राहत मिल सकती है।
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वैसे औद्योगिक क्षेत्र का विकास वर्ष 1973-74 के आसपास शुरू हुआ था। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित यह औद्योगिक क्षेत्र लगभग 231.34 एकड़ में फैला है। इसमें बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। औद्योगिक क्षेत्र के विकास के बाद उस समय की आवश्यकता के अनुरूप विद्युत व्यवस्था के लिए सब स्टेशन विकसित किया गया था।
खलीलाबाद में 132 केवी ट्रांसमिशन उपकेंद्र पहले से है। कैग की ऑडिट रिपोर्ट में इसकी 80 एमवीए क्षमता और नवंबर 2018 तक 90 एमवीए कनेक्टेड लोड दर्ज किया गया है। औद्योगिक विस्तार के लिए केवल मौजूदा व्यवस्था पर निर्भर रहने की बजाय अतिरिक्त ट्रांसमिशन क्षमता की दीर्घकालिक योजना आवश्यक है।
उद्योगों में आधुनिक मशीनरी, ऑटोमेशन, उत्पादन क्षमता में वृद्धि, नई इकाइयों की स्थापना और भविष्य में प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं के कारण विद्युत भार लगातार बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति में केवल पुराने वितरण ढांचे पर निर्भर रहना औद्योगिक विकास की गति को प्रभावित कर सकता है। भविष्य में टेक्सटाइल पार्क, होजरी एवं अन्य विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की योजना है।
ऐसे में अभी बिजली का लोड और बढ़ेगा, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। उद्यमी पवन सर्राफ, जय प्रकाश आदि ने कहा कि बिजली संकट को देखते हुए औद्योगिक क्षेत्र में स्वतंत्र फीडर स्थापित किया जाना आवश्यक है।
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औद्योगिक क्षेत्र खलीलाबाद जनपद के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र है। यहां वर्तमान में विभिन्न प्रकार की औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं तथा क्षेत्र में नए उद्योगों की स्थापना एवं वर्तमान इकाइयों के विस्तार की निरंतर संभावनाएं बनी हुई हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष को पत्र लिखकर स्वतंत्र फीडर स्थापित करने की मांग उठाई गई है।
-अरविंद पाठक, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश इंडस्टि्रयल एसोसिएशन