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मौसम की बेरुखी: संतकबीरनगर में सूखे के हालात, फसल बचाने की जद्दोजहद
Thu, 18 Aug 2022 10:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 18 Aug 2022 10:14 AM IST
सार
इस साल जिले में काफी कम बारिश होने से किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले मई माह में 183 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस बार मई में 9.8 मिमी ही बारिश हुई।
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धान के खेत में पानी न रहने के कारण पड़ रही दरार।
- फोटो : KHALILABAD
विस्तार
मौसम की बेरुखी से जिले में सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। इस साल अब तक औसत से काफी कम बारिश हुई है। जिससे खेतों में दरार पड़ गई है और किसान फसल बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। दूसरी तरफ प्रशासन अभी आकलन करने में जुटा है, जबकि जिले को सूखा ग्रस्त घोषित करने की मांग उठ रही है।
इस साल जिले में काफी कम बारिश होने से किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले मई माह में 183 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस बार मई में 9.8 मिमी ही बारिश हुई। पिछले साल जून माह में 276 मिमी बारिश हुई थी, लेकिन इस बार जून माह में सिर्फ 52 मिमी बारिश हुई।
इसी प्रकार पिछले साल जुलाई माह में 184 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस बार जुलाई में मात्र 84 मिमी ही बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से काफी कम है। अगस्त माह में भी कम बारिश हुई है। धान की फसल में दरारें पड़ गई हैं। अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर धान की रोपाई करने वाले किसान अब फसल बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।
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कारण यह है कि सिंचाई व्यवस्था भी बदहाल है। किसानों को मजबूरी में निजी संसाधनों के जरिए सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान राम करन, रामफल, जनार्दन आदि ने कहा कि बारिश न होने से फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। खेतों में दरारें पड़ गई हैं। महंगा डीजल खरीद कर सिंचाई कर पाना संभव नहीं है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित करें और किसानों को राहत प्रदान करें।
यह सही है कि पिछले साल की तुलना में इस साल काफी कम बारिश हुई है। इसका असर खेती पर पड़ा है। फसल क्षति का आकलन कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जैसा निर्देश होगा, उसके आधार पर कदम उठाया जाएगा। -पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी संतकबीरनगर
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इस साल जिले में काफी कम बारिश होने से किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले मई माह में 183 मिमी बारिश दर्ज की गई थी, जबकि इस बार मई में 9.8 मिमी ही बारिश हुई। पिछले साल जून माह में 276 मिमी बारिश हुई थी, लेकिन इस बार जून माह में सिर्फ 52 मिमी बारिश हुई।
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इसी प्रकार पिछले साल जुलाई माह में 184 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस बार जुलाई में मात्र 84 मिमी ही बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से काफी कम है। अगस्त माह में भी कम बारिश हुई है। धान की फसल में दरारें पड़ गई हैं। अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर धान की रोपाई करने वाले किसान अब फसल बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।
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कारण यह है कि सिंचाई व्यवस्था भी बदहाल है। किसानों को मजबूरी में निजी संसाधनों के जरिए सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान राम करन, रामफल, जनार्दन आदि ने कहा कि बारिश न होने से फसल बर्बाद होने के कगार पर पहुंच गई है। खेतों में दरारें पड़ गई हैं। महंगा डीजल खरीद कर सिंचाई कर पाना संभव नहीं है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित करें और किसानों को राहत प्रदान करें।
यह सही है कि पिछले साल की तुलना में इस साल काफी कम बारिश हुई है। इसका असर खेती पर पड़ा है। फसल क्षति का आकलन कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जैसा निर्देश होगा, उसके आधार पर कदम उठाया जाएगा। -पीसी विश्वकर्मा, जिला कृषि अधिकारी संतकबीरनगर