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Sant Kabir Nagar News: डीपीआर डंप... आमी को प्रदूषण से बचाने की योजना पर अमल नहीं
Fri, 06 Sep 2024 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 06 Sep 2024 12:06 AM IST
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- तीन साल पहले एनजीटी की हाईपावर कमेटी ने मांगी थी रिपोर्ट
- पर्यटकों विकास को नहीं मिल रहा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सूफी संत कबीर की परिनिर्वाण स्थल से होकर बहने वाली आमी नदी अभी तक प्रदूषण से मुक्त नहीं हो सकी है। यह स्थिति तब है जबकि नमामी गंगे योजना में आमी को भी शामिल किया गया है। इसके लिए एनजीटी की टीम ने यहां आकर सर्वे भी किया था, जिसके बाद डीपीआर तैयार कराया गया लेकिन योजना अमल में नहीं आ सकी है। लोगों का कहना है कि अगर आमी प्रदूषण से मुक्त हो जाए तो पर्यटन को बढ़ावा मिल जाएगा।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व सिवरेज के प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से आंदोलन चल रहा है, लेकिन पूरा मामला एनजीटी की हाईपावर कमेटी के पास है।
करीब तीन साल पहले कमेटी ने यहां आकर निरीक्षण किया था और गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की कार्ययोजना बनी थी। साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने व नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खोदाई आदि के कार्य कराए जाने थे, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हुआ।
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आमी नदी में सिवरेज का गंदा पानी गिरने के साथ औद्योगिक क्षेत्र का कचरा भी सीधे जा रहा है। जिससे आमी प्रदूषित हो रही है। पशुओं के साथ ही आम लोगों के लिए बीमारियों का खतरा बना रहता है। अगर आमी प्रदूषण मुक्त हो जाए तो यहां आने वाले पर्यटक व श्रद्धालुओं को सहूलियत मिलेगी।
- अमीरुद्दीन कादरी, सभासद
कारखानों व नगर का गंदा पानी और कचरा नदी में जा रहा है। जिससे आमी प्रदूषित हो रही है। मछलियों, नदी के किनारे की फसल और जानवरों को बड़ा नुकसान हो रहा है। पर्यटक व श्रद्धालु स्नान करने से डरते हैं। आमी नदी साफ हो जाए तो इस क्षेत्र की काया पलट जाएगी।
- त्रिलोकीनाथ वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
आमी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए पहल की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र और शहर के नालों का गंदा पानी नदी में सीधे न जाए इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
- महेंद्र सिंह तंवर, डीएम
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- पर्यटकों विकास को नहीं मिल रहा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। सूफी संत कबीर की परिनिर्वाण स्थल से होकर बहने वाली आमी नदी अभी तक प्रदूषण से मुक्त नहीं हो सकी है। यह स्थिति तब है जबकि नमामी गंगे योजना में आमी को भी शामिल किया गया है। इसके लिए एनजीटी की टीम ने यहां आकर सर्वे भी किया था, जिसके बाद डीपीआर तैयार कराया गया लेकिन योजना अमल में नहीं आ सकी है। लोगों का कहना है कि अगर आमी प्रदूषण से मुक्त हो जाए तो पर्यटन को बढ़ावा मिल जाएगा।
सिद्धार्थनगर के सिकोहरा ताल से निकलकर गोरखपुर जिले में राप्ती नदी में मिलने वाली 135 किलोमीटर लंबी आमी नदी का अधिकांश हिस्सा प्रदूषित है। औद्योगिक कचरा और शहरी क्षेत्रों के नालों व सिवरेज के प्रदूषित पानी से नदी का प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इसे प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक दशक से आंदोलन चल रहा है, लेकिन पूरा मामला एनजीटी की हाईपावर कमेटी के पास है।
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करीब तीन साल पहले कमेटी ने यहां आकर निरीक्षण किया था और गंदे नाले का पानी सीधे नदी में गिराने से रोकने के लिए सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव बनाकर भेजने को कहा था। इसमें खलीलाबाद विकास खंड के चकपिहानी व मगहर के रेलवे पुल के पास सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसमें चकपिहनी में 42 करोड़ व मगहर में 28 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की कार्ययोजना बनी थी। साथ ही नदी के दोनों तरफ पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में आम, बरगद और अन्य प्रजाति के पौधे लगाने व नदी में पानी के प्रवाह को बनाए रखने के लिए अगल-बगल के गांवों के जलाशयों की खोदाई आदि के कार्य कराए जाने थे, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हुआ।
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आमी नदी में सिवरेज का गंदा पानी गिरने के साथ औद्योगिक क्षेत्र का कचरा भी सीधे जा रहा है। जिससे आमी प्रदूषित हो रही है। पशुओं के साथ ही आम लोगों के लिए बीमारियों का खतरा बना रहता है। अगर आमी प्रदूषण मुक्त हो जाए तो यहां आने वाले पर्यटक व श्रद्धालुओं को सहूलियत मिलेगी।
- अमीरुद्दीन कादरी, सभासद
कारखानों व नगर का गंदा पानी और कचरा नदी में जा रहा है। जिससे आमी प्रदूषित हो रही है। मछलियों, नदी के किनारे की फसल और जानवरों को बड़ा नुकसान हो रहा है। पर्यटक व श्रद्धालु स्नान करने से डरते हैं। आमी नदी साफ हो जाए तो इस क्षेत्र की काया पलट जाएगी।
- त्रिलोकीनाथ वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता
आमी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए पहल की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्र और शहर के नालों का गंदा पानी नदी में सीधे न जाए इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
- महेंद्र सिंह तंवर, डीएम