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सुलह-समझौते के आधार पर मामले का करें निस्तारण : जिला जज
Sat, 09 Dec 2023 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 09 Dec 2023 12:25 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण निर्देश पर नौ दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसमें किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराया जा सकता है।
जिला जज अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि लोक अदालत में पक्षकार स्वयं उपस्थित होकर प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। लोक अदालत में सुलह योग्य फौजदारी मामले, दीवानी वाद, भरण पोषण वाद, मोटर अधिनियम वाद, स्टांप वाद एवं पंजीयन वाद, चकबंदी वाद, श्रम वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, उपभोक्ता फोरम वाद, किराएदारी वाद, चेक बाउंस से संबंधित मामले, बैंक लोन मामले, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र से संबंधित मामले, कराधान प्रकरण, बिजली चोरी से संबंधित शमनीय वाद, वन अधिनियम के मामले, पुलिस अधिनियम के अंतर्गत समनीय वाद, स्थाई लोक अदालत के मामले, गृह कर सहित अन्य मामलों का भी निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जा सकता है। ऐसे पारिवारिक मामलों जो किसी न्यायालय में लंबित नहीं है, वो प्री-लिटिगेशन स्तर पर पक्षकार द्वारा प्रार्थना पत्र देकर सुलह समझौते के माध्यम से निस्तारित कराया जा सकता है। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेकर आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने वादों का निस्तारण कराने की अपील किया।
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संतकबीरनगर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण निर्देश पर नौ दिसंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इसमें किसी भी न्यायालय अथवा विभागीय मामलों को सुलह समझौते के आधार पर निस्तारित कराया जा सकता है।
जिला जज अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि लोक अदालत में पक्षकार स्वयं उपस्थित होकर प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। लोक अदालत में सुलह योग्य फौजदारी मामले, दीवानी वाद, भरण पोषण वाद, मोटर अधिनियम वाद, स्टांप वाद एवं पंजीयन वाद, चकबंदी वाद, श्रम वाद, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, उपभोक्ता फोरम वाद, किराएदारी वाद, चेक बाउंस से संबंधित मामले, बैंक लोन मामले, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र से संबंधित मामले, कराधान प्रकरण, बिजली चोरी से संबंधित शमनीय वाद, वन अधिनियम के मामले, पुलिस अधिनियम के अंतर्गत समनीय वाद, स्थाई लोक अदालत के मामले, गृह कर सहित अन्य मामलों का भी निस्तारण सुलह समझौते के आधार पर किया जा सकता है। ऐसे पारिवारिक मामलों जो किसी न्यायालय में लंबित नहीं है, वो प्री-लिटिगेशन स्तर पर पक्षकार द्वारा प्रार्थना पत्र देकर सुलह समझौते के माध्यम से निस्तारित कराया जा सकता है। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में भाग लेकर आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने वादों का निस्तारण कराने की अपील किया।
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