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नहीं मिली बाढ़ राहत की रकम, कर्ज लेकर गेहूं बो रहे किसान
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नहीं मिली बाढ़ राहत की रकम, कर्ज लेकर गेहूं बो रहे किसान
मेंहदावल। बाढ़ और अतिवृष्टि से फसलों को हुई क्षति का मुआवजा अभी तक किसानों को नहीं मिल पाया है। किसान कर्ज लेकर गेहूं की बुवाई करने के लिए विवश हैं। बाढ़ राहत की रकम पाने के लिए किसान तहसील का चक्कर भी काट रहे हैं। अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं कि शासन से बजट मिलते ही किसानों के खाते में रकम भेज दी जाएगी।
मेंहदावल तहसील क्षेत्र के विकास खंड मेहदावल, सांथा और बेलहर कला में वर्ष 2020-21 में भीषण बरसात व बाढ़ के कारण किसानों के धान की फसल नष्ट हो गई थी। किसानों ने कई बार सपा नेता जयराम पांडेय के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन करते हुए तहसील का घेराव भी किया था। शासन के निर्देश पर बाढ़ से नष्ट हुई फसल का मुआवजा देने के लिए पीड़ित किसानों की सूची तैयार करने का निर्देश हुआ। इस पर राजस्व कर्मियों ने बाढ़ग्रस्त इलाकों के किसानों का विवरण फीड करते हुए खाता नंबर व नष्ट हुई कृषि भूमि की जानकारी तहसील को उपलब्ध कराई। फीडिंग के दो माह बाद भी किसानों के खाते में बाढ़ राहत का धन अब तक नहीं आया। जबकि शासन ने लघु किसानों का प्रति बीघा 1350 रुपये व सीमांत किसानों के 18 सौ रुपये प्रति बीघा बाढ़ सहायता धनराशि तय की थी।
जो सहायता राशि गेहूं की फसल बुवाई से पूर्व किसानों के खाते में आनी चाहिए थी, वह अब भी किसानों को नहीं मिली। किसान कर्ज लेकर गेहूं की फसल की बुवाई कर रहे हैं। किसान चंद्रलोक पांडेय, संजय पांडेय, गुनाई गुप्ता, देवेंद्र बहादुर सिंह, अमरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, बैजनाथ यादव, जगदंबा तिवारी, मकसूदन तिवारी, राजेंद्र तिवारी आदि का कहना है कि बाढ़ राहत की सूची बनने व चस्पा होने के बाद भी तहसील प्रशासन ने किसानों का सूची फीडिंग का कार्य एक माह पूर्व ही करा दिया, लेकिन अब तक खाते में बाढ़ राहत की रकम नहीं आई। इससे किसान गेहूं की फसल बुवाई के लिए चिंतित हैं। वे कर्ज लेकर खेती करने के लिए मजबूर हैं। हर दिन तहसील का चक्कर बाढ़ राहत राशि के लिए लगाना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन यह कहकर लौटा देता है कि जब शासन से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी तो खाते में भेज दी जाएगी। पिछले वर्ष भी प्रभावित सभी किसानों को बाढ़ राहत की रकम नहीं दी गई थी।
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इस बारे में तहसीलदार निशा श्रीवास्तव ने कहा कि बारिश और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों की सूची तैयार करते हुए शासन को भेजी गई है। इस क्षेत्र में करीब 13 हजार किसानों को बाढ़ राहत की रकम दी जानी है, लेकिन अब तक शासन से धनराशि उपलब्ध न होने के कारण बाढ़ पीड़ित किसानों के खाते में रकम नहीं भेजी जा सकी है। जैसे ही धनराशि उपलब्ध होगी, वैसे ही किसानों के खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
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मेंहदावल। बाढ़ और अतिवृष्टि से फसलों को हुई क्षति का मुआवजा अभी तक किसानों को नहीं मिल पाया है। किसान कर्ज लेकर गेहूं की बुवाई करने के लिए विवश हैं। बाढ़ राहत की रकम पाने के लिए किसान तहसील का चक्कर भी काट रहे हैं। अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ ले रहे हैं कि शासन से बजट मिलते ही किसानों के खाते में रकम भेज दी जाएगी।
मेंहदावल तहसील क्षेत्र के विकास खंड मेहदावल, सांथा और बेलहर कला में वर्ष 2020-21 में भीषण बरसात व बाढ़ के कारण किसानों के धान की फसल नष्ट हो गई थी। किसानों ने कई बार सपा नेता जयराम पांडेय के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन करते हुए तहसील का घेराव भी किया था। शासन के निर्देश पर बाढ़ से नष्ट हुई फसल का मुआवजा देने के लिए पीड़ित किसानों की सूची तैयार करने का निर्देश हुआ। इस पर राजस्व कर्मियों ने बाढ़ग्रस्त इलाकों के किसानों का विवरण फीड करते हुए खाता नंबर व नष्ट हुई कृषि भूमि की जानकारी तहसील को उपलब्ध कराई। फीडिंग के दो माह बाद भी किसानों के खाते में बाढ़ राहत का धन अब तक नहीं आया। जबकि शासन ने लघु किसानों का प्रति बीघा 1350 रुपये व सीमांत किसानों के 18 सौ रुपये प्रति बीघा बाढ़ सहायता धनराशि तय की थी।
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जो सहायता राशि गेहूं की फसल बुवाई से पूर्व किसानों के खाते में आनी चाहिए थी, वह अब भी किसानों को नहीं मिली। किसान कर्ज लेकर गेहूं की फसल की बुवाई कर रहे हैं। किसान चंद्रलोक पांडेय, संजय पांडेय, गुनाई गुप्ता, देवेंद्र बहादुर सिंह, अमरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, बैजनाथ यादव, जगदंबा तिवारी, मकसूदन तिवारी, राजेंद्र तिवारी आदि का कहना है कि बाढ़ राहत की सूची बनने व चस्पा होने के बाद भी तहसील प्रशासन ने किसानों का सूची फीडिंग का कार्य एक माह पूर्व ही करा दिया, लेकिन अब तक खाते में बाढ़ राहत की रकम नहीं आई। इससे किसान गेहूं की फसल बुवाई के लिए चिंतित हैं। वे कर्ज लेकर खेती करने के लिए मजबूर हैं। हर दिन तहसील का चक्कर बाढ़ राहत राशि के लिए लगाना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन यह कहकर लौटा देता है कि जब शासन से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी तो खाते में भेज दी जाएगी। पिछले वर्ष भी प्रभावित सभी किसानों को बाढ़ राहत की रकम नहीं दी गई थी।
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इस बारे में तहसीलदार निशा श्रीवास्तव ने कहा कि बारिश और अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों की सूची तैयार करते हुए शासन को भेजी गई है। इस क्षेत्र में करीब 13 हजार किसानों को बाढ़ राहत की रकम दी जानी है, लेकिन अब तक शासन से धनराशि उपलब्ध न होने के कारण बाढ़ पीड़ित किसानों के खाते में रकम नहीं भेजी जा सकी है। जैसे ही धनराशि उपलब्ध होगी, वैसे ही किसानों के खाते में हस्तांतरित कर दी जाएगी।