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Sant Kabir Nagar News: बख्शी है जिसने जिंदगी इंसां के रूप में, भ्रम जाल में फंसा ये समंदर उसी का है
Sun, 25 Jun 2023 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 25 Jun 2023 11:41 PM IST
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संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को खलीलाबाद पब्लिक स्कूल में कवि गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें मंच के महामंत्री सुरेश यादव ने अपनी रचना- बख्शी है जिसने जिंदगी इंसां के रूप में, भ्रम जाल में फंसा ये समंदर उसी का है। सुनाकर शुरूआत की।
ओम प्रकाश गौतम ने- परवाज हुनर को ही मिटाने पे लगे हैं, जिस दिन से मेरे तीर निशाने पर लगे हैं। सुनाकर वाहवाही लूटी। उस्ताद शायर शारिक खलीलाबादी ने- अजब चेहरे पे उसके बेकली थी, अजल के सामने जब जिंदगी थी, सुनाया। जिसे सराहा गया।
पवन सबा ने- हम समझते रहे रह जन जिसे अब तक दोस्त, वो कोई और नहीं अपना ही रहबर ठहरा। सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। मंच के कोषाध्यक्ष राधेश्याम मिश्र श्याम ने- काहे मणिपुर जल रहा, वहां बढ़ा क्यों रोष, कोई बतलाता नहीं किसका है ये दोष। मौन हैं सारे वक्ता, सुनाकर मणिपुर की ओर सबका ध्यान खींचा।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमले ने- धर्म ना पर लूटते, आज देश के लोग, रोजगार अब बन गया कैसा है संयोग। सुनाकर धर्म के व्यवसायीकरण को रोकने की सलाह दी। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने- भूलूं न एक पल भी जिसे देखकर तुझे मैं, ऐसी कोई निशानी मुझे मेरे यार दे दे। सुनाकर माहौल को रोमांटिक बना दिया। मनोज कुमार अनिल ने- बजर करेजवा कइली सुन मोरी माई रे, हमरो बलमुआ हमसे गइलै रिसियाई रे। सुनाकर खूब मनोरंजन किया।
शिवा पांडेय ने- वो मुख्तसर मिलता है फिर घर चला जाता है, पेड़ गांव में रह जाते हैं फल शहर चला जाता है। सुनाया, जिसे पसंद किया गया। युवा कवि अवनीश कुमार ने- बदल जाएगी तकदीर दिखेगी मौज की तस्वीर, सफर करिए तो सही लहर तूफानी में। सुनाकर दाद बटोरी। इस दौरान दीपक, राम कुबेर, संदीप आदि मौजूद रहे।
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ओम प्रकाश गौतम ने- परवाज हुनर को ही मिटाने पे लगे हैं, जिस दिन से मेरे तीर निशाने पर लगे हैं। सुनाकर वाहवाही लूटी। उस्ताद शायर शारिक खलीलाबादी ने- अजब चेहरे पे उसके बेकली थी, अजल के सामने जब जिंदगी थी, सुनाया। जिसे सराहा गया।
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पवन सबा ने- हम समझते रहे रह जन जिसे अब तक दोस्त, वो कोई और नहीं अपना ही रहबर ठहरा। सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। मंच के कोषाध्यक्ष राधेश्याम मिश्र श्याम ने- काहे मणिपुर जल रहा, वहां बढ़ा क्यों रोष, कोई बतलाता नहीं किसका है ये दोष। मौन हैं सारे वक्ता, सुनाकर मणिपुर की ओर सबका ध्यान खींचा।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमले ने- धर्म ना पर लूटते, आज देश के लोग, रोजगार अब बन गया कैसा है संयोग। सुनाकर धर्म के व्यवसायीकरण को रोकने की सलाह दी। संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने- भूलूं न एक पल भी जिसे देखकर तुझे मैं, ऐसी कोई निशानी मुझे मेरे यार दे दे। सुनाकर माहौल को रोमांटिक बना दिया। मनोज कुमार अनिल ने- बजर करेजवा कइली सुन मोरी माई रे, हमरो बलमुआ हमसे गइलै रिसियाई रे। सुनाकर खूब मनोरंजन किया।
शिवा पांडेय ने- वो मुख्तसर मिलता है फिर घर चला जाता है, पेड़ गांव में रह जाते हैं फल शहर चला जाता है। सुनाया, जिसे पसंद किया गया। युवा कवि अवनीश कुमार ने- बदल जाएगी तकदीर दिखेगी मौज की तस्वीर, सफर करिए तो सही लहर तूफानी में। सुनाकर दाद बटोरी। इस दौरान दीपक, राम कुबेर, संदीप आदि मौजूद रहे।