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Sant Kabir Nagar News: खरीफ की फसलों की जगह ले रही हरी सब्जियों की खेती
Sun, 24 Aug 2025 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 24 Aug 2025 11:23 PM IST
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महुली क्षेत्र के बौरिहवा गांव के सिवान में हरी सब्जियों की खेती
हरिहरपुर। जंगली जानवरों की बढ़ती तादाद के चलते खरीफ की कई फसलें क्षेत्र से विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई हैं। ऐसे में किसान हरी सब्जी की खेती को जरिया बनाकर अपनी जीविका चला रहे हैं। विकल्प के रूप में किसान इन सब्जियों को बेचकर अपनी आय का जरिया बना रहे हैं।
महुली क्षेत्र के आसपास के सिवान में दो दशक पहले खरीफ की फसलों में धान के साथ ही खेतों में ज्वार, बाजरा, मूंगफली और अरहर की खेती लहलहाती थी। खेतों में बाजरे के साथ ही लोबिया और नेसुआ की फसल भी हरी सब्जी के रूप में उपलब्ध थी। लेकिन जंगली जानवरों के चलते किसानों का इन फसलों से मोह भंग हो चुका है। व्यावसायिक खेती में शामिल अरहर और मूंगफली की फसल से होने वाली आमदनी से किसान अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। तकरीबन 300 हेक्टेयर में इन फसलों की बुआई होती थी।
अब इन किसानों की खेती बंद हो जाने से किसानों का रुख हरी सब्जी की खेती की ओर मुड़ गया। अब जिन खेतों में अरहर, मूंगफली और बाजरा की फसलें लहलहाती थी उन खेतों में हरी सब्जियां जिनमें तोरई, सरपुतिया, नेनुआ की फसलें उगाई जा रही हैं। जिससे किसान अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। महुली, बौरिहवां, डिहवा, कुर्मियाना सहित कई गांवों में हरी सब्जी की खेती होती है।
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किसान राधेश्याम, वीरेन्द्र, सुमिरन, श्रवण कुमार ने बताया कि बीते वर्षों में हरी सब्जियों की पैदावार ज्यादा होने से उसकी कम कीमत मिलती थी, इस साल हरी सब्जी की पैदावार कम है जिससे थोक भाव करीब 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से सरपुतिया बिक जा रही है।
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महुली क्षेत्र के आसपास के सिवान में दो दशक पहले खरीफ की फसलों में धान के साथ ही खेतों में ज्वार, बाजरा, मूंगफली और अरहर की खेती लहलहाती थी। खेतों में बाजरे के साथ ही लोबिया और नेसुआ की फसल भी हरी सब्जी के रूप में उपलब्ध थी। लेकिन जंगली जानवरों के चलते किसानों का इन फसलों से मोह भंग हो चुका है। व्यावसायिक खेती में शामिल अरहर और मूंगफली की फसल से होने वाली आमदनी से किसान अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। तकरीबन 300 हेक्टेयर में इन फसलों की बुआई होती थी।
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अब इन किसानों की खेती बंद हो जाने से किसानों का रुख हरी सब्जी की खेती की ओर मुड़ गया। अब जिन खेतों में अरहर, मूंगफली और बाजरा की फसलें लहलहाती थी उन खेतों में हरी सब्जियां जिनमें तोरई, सरपुतिया, नेनुआ की फसलें उगाई जा रही हैं। जिससे किसान अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर रहे हैं। महुली, बौरिहवां, डिहवा, कुर्मियाना सहित कई गांवों में हरी सब्जी की खेती होती है।
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किसान राधेश्याम, वीरेन्द्र, सुमिरन, श्रवण कुमार ने बताया कि बीते वर्षों में हरी सब्जियों की पैदावार ज्यादा होने से उसकी कम कीमत मिलती थी, इस साल हरी सब्जी की पैदावार कम है जिससे थोक भाव करीब 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से सरपुतिया बिक जा रही है।