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दुष्कर्म के आरोपी को दस साल की सजा
अमर उजाला ब्यूरो/संतकबीरनगर
Updated Tue, 08 Dec 2015 11:34 PM IST
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तेईस माह पूर्व शहर के एक मोहल्ले में मां संग दुष्कर्म करने वाले आरोपी बेटे को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश ए के सक्सेना ने दस साज की सजा और 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थ दंड की धनराशि न अदा करने की दशा में आरोपी को एक साल की अवधि जेल में अतिरिक्त बितानी होगी।
खलीलाबाद शहर के एक मोहल्ले की रहने वाली पीड़ित मां ने 29 जनवरी 2014 को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसका 27 वर्षीय बेटा मुकेश एक साल पहले से उसके साथ गलत काम कर रहा था। 28 जनवरी 2014 की रात में पुन: उसके साथ बलात्कार किया। विरोध करने पर नहीं माना।
लोक लाज के डर से वह चुप रही। पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ दुष्कर्म और जानमाल की धमकी का केस दर्ज किया। विवेचक आर के राय ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। एडीजीसी मोहम्मद मोकर्रम ने बताया कि अधीनस्थ न्यायालय ने चार अप्रैल 2014 को मामले सेशन कोर्ट को विचारण के लिए संदर्भित कर दिया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले का विचारण हुआ। विचारण के दौरान पीड़ित मां का बयान हुआ।
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इसके अतिरिक्त पीड़िता के पति और गवाह डॉक्टर श्वेता सिंह, विवेचक आर के राय, कांस्टेबल परशुराम की भी न्यायालय में गवाही हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने गवाहों के बयान के दौरान जिरह किया। न्यायालय ने तीन दिसंबर 2015 को आरोपी बेटे को दुष्कर्म व जानमाल की धमकी का दोषी करार दिया था।
मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायधीश ए के सक्सेना ने मां संग दुष्कर्म करने और जानमाल की धमकी देने के आरोपी बेटे को दस साल की सजा और 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की अदायगी न करने की स्थिति में एक साल की अवधि अतिरिक्त बितानी होगी।
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खलीलाबाद शहर के एक मोहल्ले की रहने वाली पीड़ित मां ने 29 जनवरी 2014 को कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसका 27 वर्षीय बेटा मुकेश एक साल पहले से उसके साथ गलत काम कर रहा था। 28 जनवरी 2014 की रात में पुन: उसके साथ बलात्कार किया। विरोध करने पर नहीं माना।
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लोक लाज के डर से वह चुप रही। पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ दुष्कर्म और जानमाल की धमकी का केस दर्ज किया। विवेचक आर के राय ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। एडीजीसी मोहम्मद मोकर्रम ने बताया कि अधीनस्थ न्यायालय ने चार अप्रैल 2014 को मामले सेशन कोर्ट को विचारण के लिए संदर्भित कर दिया था। फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले का विचारण हुआ। विचारण के दौरान पीड़ित मां का बयान हुआ।
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इसके अतिरिक्त पीड़िता के पति और गवाह डॉक्टर श्वेता सिंह, विवेचक आर के राय, कांस्टेबल परशुराम की भी न्यायालय में गवाही हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने गवाहों के बयान के दौरान जिरह किया। न्यायालय ने तीन दिसंबर 2015 को आरोपी बेटे को दुष्कर्म व जानमाल की धमकी का दोषी करार दिया था।
मंगलवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायधीश ए के सक्सेना ने मां संग दुष्कर्म करने और जानमाल की धमकी देने के आरोपी बेटे को दस साल की सजा और 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की अदायगी न करने की स्थिति में एक साल की अवधि अतिरिक्त बितानी होगी।