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डाॅक्कर गौतम ने हर कदम पर किया फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Apr 2018 11:32 PM IST
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डॉक्टर डी के गौतम का अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
संतकबीरनगर। बुद्घा हास्पिटल और पैरामेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉक्टर डीके गौतम ने कदम-कदम पर फर्जीवाड़ा किया। पुलिस की जांच में जब पोल खुली तो उसे जेल जाना पड़ा। इधर उसके पकड़े जाने के बाद ही अस्पताल में अफरातफरी मच गई। मरीज और तीमारदार भी यहां से चले जाना ही मुनासिब समझे।
एएनएम, जीएनएम और डीफार्मा कोर्स कर रही शीला देवी समेत पांच छात्राओं के जरिए लगाए गए लिखित आरोपों के बाद बुद्धा हास्पिटल एवं पैरामेडिकल कॉलेज के डॉयरेक्टर डॉक्टर डी के गौतम सवालों के घेरे में आए। सीओ की जांच के बाद डॉक्टर डी के गौतम व उनके अन्य सहयोगी जालसाजी और गबन के मुकदमें में आरोपी बनाए गए।
करीब चार महीने से चल रही मामले की विवेचना में फर्जीवाडे़ के कई तथ्य उजगार हुए और देर से ही सही आरोपी डॉक्टर डीके गौतम व सहयोगी महिला डॉक्टर अन्नू गिरफ्तार हो गई। विवेचक चौकी कलेक्ट्रेट धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि बुद्धा हास्पिटल व पैरामेडिकल कॉलेज के साथ आरोपी डॉक्टर डी के गौतम व सहयोगी डॉक्टर अन्नू की डिग्री की जानकारी सीएमओ से पत्राचार करके मांगी।
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सीएमओ संतकबीरनगर ने जो रिपोर्ट दिया उसके मुताबिक बुद्धा हास्पिटल व पैरामेडिकल कॉलेज अवैध ढंग संचालित करना बताया गया। जबकि दोनों डॉक्टरों की डिग्री का प्रमाण पत्र नहीं दिखाना बताया गया। जिसके बाद यह पता चला कि दोनों डॉक्टर अवैध रूप से हास्पिटल व पैरामेडिकल कॉलेज संचालित कर रहे है।
आरोपी डॉक्टर डी के गौतम को नोटिस देकर उसे पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। जिसमें आरोपी डॉक्टर ने आगरा व गाजीपुर के कॉलेज से एएनएम, जीएनएम, डीफार्मा कोर्स हेतु अनुमति पत्र मिलना बताया गया। आरोपी डॉक्टर के जरिए दिए गए दोनों पत्रों की जांच कराई गई तो प्रधानाचार्य के एसवी कॉलेेज आफ नर्सिंग मेडिकल मरदापुर सदात गाजीपुर ने लिखित जानकारी दी कि डॉक्टर डीके गौतम की संस्था को कोई कोर्स संचालित करने की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
आगरा के आईआईएमटी संस्था ने भी अवगत कराया गा कि उनके वहां एएनएम, जीएनएम, डीफार्मा का कोई कोर्स संचालित ही नहीं किया जाता है। एचडीएफासी बैंक गोला बाजार की शाखा में संचालित खाता राकेश पांडेय निवासी मधुरिया थाना तुर्कपट्टी कुशीनगर के नाम पर डॉक्टर डी के गौतम द्वारा संचालित करना पाया गया है। जिसकी पुष्टि बैंक प्रबंधक व कथित खाता धारक राकेश पांडेय द्वारा की गई।
उक्त खाते पर नाम राकेश पांडेय का था और फोटो, मोबाइल नंबर ईमेल आईडी आदि डॉक्टर डीके गौतम की थी। राकेश पांडेय का फर्जी डीएल भी डॉक्टर डीके गौतम ने अपना फोटो लगा कर बनवाया था। खाते में पहचान पत्र के रूप में लगाया गया था जो एआरटीओ की जांच से फर्जी साबित हुआ।
खाते से राकेश पांडेय के नाम पर वर्ष 2017 में डॉक्टर डीके गौतम ने लोन पर कार खरीदा था। लोन में मतदाता पहचान पत्र व पैन कार्ड पर अपना फोटो लगाकर डॉक्टर डी के गौतम ने राकेश पांडेय के नाम से बनवाया गया आईडी को भी खाते में लगाया था। कार को आरोपी डॉक्टर के पास से बरामद करते हुए सीज कर दिया।
जांच में भुक्तभोगी चार और छात्र-छात्राएं सामने आए। फर्जीवाडे से अर्जित डॉक्टर डी के गौतम की संपत्ति के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है। इस मामले में डीएम और सीएमओ को आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट दी जाएगी।
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एएनएम, जीएनएम और डीफार्मा कोर्स कर रही शीला देवी समेत पांच छात्राओं के जरिए लगाए गए लिखित आरोपों के बाद बुद्धा हास्पिटल एवं पैरामेडिकल कॉलेज के डॉयरेक्टर डॉक्टर डी के गौतम सवालों के घेरे में आए। सीओ की जांच के बाद डॉक्टर डी के गौतम व उनके अन्य सहयोगी जालसाजी और गबन के मुकदमें में आरोपी बनाए गए।
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करीब चार महीने से चल रही मामले की विवेचना में फर्जीवाडे़ के कई तथ्य उजगार हुए और देर से ही सही आरोपी डॉक्टर डीके गौतम व सहयोगी महिला डॉक्टर अन्नू गिरफ्तार हो गई। विवेचक चौकी कलेक्ट्रेट धर्मेंद्र तिवारी ने बताया कि बुद्धा हास्पिटल व पैरामेडिकल कॉलेज के साथ आरोपी डॉक्टर डी के गौतम व सहयोगी डॉक्टर अन्नू की डिग्री की जानकारी सीएमओ से पत्राचार करके मांगी।
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सीएमओ संतकबीरनगर ने जो रिपोर्ट दिया उसके मुताबिक बुद्धा हास्पिटल व पैरामेडिकल कॉलेज अवैध ढंग संचालित करना बताया गया। जबकि दोनों डॉक्टरों की डिग्री का प्रमाण पत्र नहीं दिखाना बताया गया। जिसके बाद यह पता चला कि दोनों डॉक्टर अवैध रूप से हास्पिटल व पैरामेडिकल कॉलेज संचालित कर रहे है।
आरोपी डॉक्टर डी के गौतम को नोटिस देकर उसे पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। जिसमें आरोपी डॉक्टर ने आगरा व गाजीपुर के कॉलेज से एएनएम, जीएनएम, डीफार्मा कोर्स हेतु अनुमति पत्र मिलना बताया गया। आरोपी डॉक्टर के जरिए दिए गए दोनों पत्रों की जांच कराई गई तो प्रधानाचार्य के एसवी कॉलेेज आफ नर्सिंग मेडिकल मरदापुर सदात गाजीपुर ने लिखित जानकारी दी कि डॉक्टर डीके गौतम की संस्था को कोई कोर्स संचालित करने की कोई अनुमति नहीं दी गई है।
आगरा के आईआईएमटी संस्था ने भी अवगत कराया गा कि उनके वहां एएनएम, जीएनएम, डीफार्मा का कोई कोर्स संचालित ही नहीं किया जाता है। एचडीएफासी बैंक गोला बाजार की शाखा में संचालित खाता राकेश पांडेय निवासी मधुरिया थाना तुर्कपट्टी कुशीनगर के नाम पर डॉक्टर डी के गौतम द्वारा संचालित करना पाया गया है। जिसकी पुष्टि बैंक प्रबंधक व कथित खाता धारक राकेश पांडेय द्वारा की गई।
उक्त खाते पर नाम राकेश पांडेय का था और फोटो, मोबाइल नंबर ईमेल आईडी आदि डॉक्टर डीके गौतम की थी। राकेश पांडेय का फर्जी डीएल भी डॉक्टर डीके गौतम ने अपना फोटो लगा कर बनवाया था। खाते में पहचान पत्र के रूप में लगाया गया था जो एआरटीओ की जांच से फर्जी साबित हुआ।
खाते से राकेश पांडेय के नाम पर वर्ष 2017 में डॉक्टर डीके गौतम ने लोन पर कार खरीदा था। लोन में मतदाता पहचान पत्र व पैन कार्ड पर अपना फोटो लगाकर डॉक्टर डी के गौतम ने राकेश पांडेय के नाम से बनवाया गया आईडी को भी खाते में लगाया था। कार को आरोपी डॉक्टर के पास से बरामद करते हुए सीज कर दिया।
जांच में भुक्तभोगी चार और छात्र-छात्राएं सामने आए। फर्जीवाडे से अर्जित डॉक्टर डी के गौतम की संपत्ति के बारे में जांच पड़ताल की जा रही है। इस मामले में डीएम और सीएमओ को आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट दी जाएगी।