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केरोसिन छिड़ककर की आत्मदाह की कोशिश
sant kabir nagar
Updated Fri, 30 Sep 2016 11:43 PM IST
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आत्मदाह की कोशिश करने वाला असगर अली।
- फोटो : अमर उजाला
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मेंहदावल कस्बे के हर्दीहट्टा मुहल्ले में शुक्रवार को मकान के विवाद ने उस समय तूल पकड़ लिया जब पुलिस उपजिलाधिकारी का आदेश लेकर जब्ती की कार्रवाई करने पहुंची। इस दौरान एक शख्स ने अपने शरीर पर केरोसिन उड़ेलकर आत्मदाह की कोशिश की। हालांकि लोगों के प्रयास ने समय रहते आग बुझा ली गई। वहीं पीड़ित का आरोप है पुलिस ने उसके परिवार की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया।
हर्दीहट्टा मुहल्ले में काफी समय से असगर अली और उनकी चचेरी भांजी फातिमा के बीच मकान संबंधी विवाद चल रहा है। फातिमा इस मकान को अमजद अली को बेचकर मुंबई चली गई। इधर कुछ माह पहले ही इस मकान को अमजद अली ने मुहल्ले के एक व्यक्ति को बैनामा कर दिया। जबकि लंबे समय से असगर अली का परिवार मकान में रह रहा है। इन लोगों ने मकान के आगे के हिस्से में दुकान खोल रखी है। शुक्रवार को थानाध्यक्ष सुधीर सिंह महिला कांस्टेबलों के साथ मकान को खाली कराकर जब्ती के लिए पहुंचे।
इस पर घर में मौजूद असगर के परिवार ने मकान खाली करने से इंकार कर दिया। तब थानाध्यक्ष द्वारा 19 सितंबर 2016 के उपजिलाधिकारी के जब्ती के आदेश का हवाला देते हुए मकान पर ताला लगाने की बात कही गई। लेकिन परिवार के लोग बाहर आने को तैयार नही थे। आरोप है कि महिला कांस्टेबलों के साथ मिलकर थानाध्यक्ष ने दुर्व्यवहार किया। इसके बाद असगर अली अचानक मिट्टी का तेल लेकर आए और अपने ऊपर उड़ेल कर उन्होंने आग लगाने की कोशिश की। लेकिन आस पास के लोगों ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। असगर अली का आरोप है कि पुलिस ने परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया। इसकी आपत्ति थानाध्यक्ष से की तो उन्होंने उन्हें मारापीटा जिससे उसका सिर फट गया। घटना के बाद पुलिस असगर अली और उनके परिजनों को उप जिलाधिकारी के समक्ष जाने की मनुहार की। करीब एक घंटे बाद असगर अली एसडीएम के पास जाने के लिए राजी हुए।
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इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार भट्ट ने बताया कि मामला यदि सिविल न्यायालय में चल रहा है और मकान रिहायशी है जिसमें परिवार दैनिक उपयोग कर रहा है तो ऐसे रिहायशी मकानों पर 145 व 146 की कार्रवाई के तहत जब्ती का आदेश नहीं हो सकता है। रिपोर्ट में जरूर कुछ छिपाया गया होगा। तभी उस पर एसडीएम के स्तर से आदेश हुआ है।
वहीं एसओ सुधीर सिंह ने बताया कि उपजिलाधिकारी द्वारा विवादित मकान के जब्ती संबंधी आदेश का पालन कराने मौके पर गया था, पर मकान पर काबिज पक्ष विरोध करने लगा। जिस पर पुलिस ने अपनी कार्रवाई करते हुए तहसील के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया। इससे होकर विपक्षी ने आत्मदाह का प्रयास किया, पर मुहल्ले के लोगों ने आग बुझाकर घटना टाला। मारने-पीटने का आरोप निराधार है। असगर अली के सिर में गिरने से चोट लगी है।
वहीं एसडीएम रामजीवन ने कहा कि थानाध्यक्ष की रिपोर्ट पर ही जब्ती की कार्रवाई की गई है। थाने द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में मामले को सिविल न्यायालय में विचाराधीन होने एवं रिहायशी मकान का होना संबंधित तथ्य छिपाया गया है। पीड़ित पक्ष सिविल न्यायालय में मामले को लंबित होने से संबंधित का कागजात प्रस्तुत करें तो इस आदेश को निरस्त कर दिया जाएगा।
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हर्दीहट्टा मुहल्ले में काफी समय से असगर अली और उनकी चचेरी भांजी फातिमा के बीच मकान संबंधी विवाद चल रहा है। फातिमा इस मकान को अमजद अली को बेचकर मुंबई चली गई। इधर कुछ माह पहले ही इस मकान को अमजद अली ने मुहल्ले के एक व्यक्ति को बैनामा कर दिया। जबकि लंबे समय से असगर अली का परिवार मकान में रह रहा है। इन लोगों ने मकान के आगे के हिस्से में दुकान खोल रखी है। शुक्रवार को थानाध्यक्ष सुधीर सिंह महिला कांस्टेबलों के साथ मकान को खाली कराकर जब्ती के लिए पहुंचे।
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इस पर घर में मौजूद असगर के परिवार ने मकान खाली करने से इंकार कर दिया। तब थानाध्यक्ष द्वारा 19 सितंबर 2016 के उपजिलाधिकारी के जब्ती के आदेश का हवाला देते हुए मकान पर ताला लगाने की बात कही गई। लेकिन परिवार के लोग बाहर आने को तैयार नही थे। आरोप है कि महिला कांस्टेबलों के साथ मिलकर थानाध्यक्ष ने दुर्व्यवहार किया। इसके बाद असगर अली अचानक मिट्टी का तेल लेकर आए और अपने ऊपर उड़ेल कर उन्होंने आग लगाने की कोशिश की। लेकिन आस पास के लोगों ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। असगर अली का आरोप है कि पुलिस ने परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया। इसकी आपत्ति थानाध्यक्ष से की तो उन्होंने उन्हें मारापीटा जिससे उसका सिर फट गया। घटना के बाद पुलिस असगर अली और उनके परिजनों को उप जिलाधिकारी के समक्ष जाने की मनुहार की। करीब एक घंटे बाद असगर अली एसडीएम के पास जाने के लिए राजी हुए।
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इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार भट्ट ने बताया कि मामला यदि सिविल न्यायालय में चल रहा है और मकान रिहायशी है जिसमें परिवार दैनिक उपयोग कर रहा है तो ऐसे रिहायशी मकानों पर 145 व 146 की कार्रवाई के तहत जब्ती का आदेश नहीं हो सकता है। रिपोर्ट में जरूर कुछ छिपाया गया होगा। तभी उस पर एसडीएम के स्तर से आदेश हुआ है।
वहीं एसओ सुधीर सिंह ने बताया कि उपजिलाधिकारी द्वारा विवादित मकान के जब्ती संबंधी आदेश का पालन कराने मौके पर गया था, पर मकान पर काबिज पक्ष विरोध करने लगा। जिस पर पुलिस ने अपनी कार्रवाई करते हुए तहसील के आदेश का पालन सुनिश्चित कराया। इससे होकर विपक्षी ने आत्मदाह का प्रयास किया, पर मुहल्ले के लोगों ने आग बुझाकर घटना टाला। मारने-पीटने का आरोप निराधार है। असगर अली के सिर में गिरने से चोट लगी है।
वहीं एसडीएम रामजीवन ने कहा कि थानाध्यक्ष की रिपोर्ट पर ही जब्ती की कार्रवाई की गई है। थाने द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में मामले को सिविल न्यायालय में विचाराधीन होने एवं रिहायशी मकान का होना संबंधित तथ्य छिपाया गया है। पीड़ित पक्ष सिविल न्यायालय में मामले को लंबित होने से संबंधित का कागजात प्रस्तुत करें तो इस आदेश को निरस्त कर दिया जाएगा।