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Sant Kabir Nagar News: सभासद और उसके साथियों को कोर्मिट से मिला अरेस्ट स्टे
Wed, 12 Feb 2025 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Wed, 12 Feb 2025 11:57 PM IST
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धर्मसिंहवा। नगर पंचायत धर्मसिंहवा में 16 जनवरी की शाम को सभासद और पीआरवी सिपाहियों के बीच विवाद के मामले में हाई कोर्ट ने सभासद व उसके अन्य साथियों की गिरफ्तारी पर अगली तारीख तक रोक लगा दी है। स्थानीय पुलिस हाथ पर हाथ धरी रह गई और सभासद एवं उसके साथियों को कोर्ट ने अरेस्ट स्टे दे दिया है।
सभासद शशि कपूर राय ने हाई कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दाखिल किया था। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्राथमिकी पूरी तरह से झूठे आरोपों पर केवल याचिकाकर्ताओं को परेशान करने के लिए दर्ज की गई है। केस दर्ज कराने वाला होमगार्ड है और उसकी पत्नी कस्बा धर्मसिंहवा में उचित मूल्य के दुकान की डीलर है। याचिकाकर्ताओं ने होमगार्ड की पत्नी के खिलाफ वितरण के संबंध में कुछ शिकायतें की थीं। आरोप है कि उसी के विरोध में मनगढ़ंत कहानी के साथ आरोपित ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह भी तर्क दिया गया है कि होमगार्ड सामान्य जाति (ब्राह्मण) से संबंधित है और ऐसे में एससीएसटी अधिनियम लागू करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि सभी कथित अपराधों में केवल सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान तथ्यों और परिस्थितियों के तहत आरोपित प्राथमिकी रद्द किए जाने योग्य है और मामले पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। साथ ही अगली तारीख तक याचिकाकर्ताओं को एफआईआर के अनुसार गिरफ्तार न करने और पुलिस जांच में सहयोग करने के आदेश दिए।
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सभासद शशि कपूर राय ने हाई कोर्ट में अपने अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दाखिल किया था। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्राथमिकी पूरी तरह से झूठे आरोपों पर केवल याचिकाकर्ताओं को परेशान करने के लिए दर्ज की गई है। केस दर्ज कराने वाला होमगार्ड है और उसकी पत्नी कस्बा धर्मसिंहवा में उचित मूल्य के दुकान की डीलर है। याचिकाकर्ताओं ने होमगार्ड की पत्नी के खिलाफ वितरण के संबंध में कुछ शिकायतें की थीं। आरोप है कि उसी के विरोध में मनगढ़ंत कहानी के साथ आरोपित ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। यह भी तर्क दिया गया है कि होमगार्ड सामान्य जाति (ब्राह्मण) से संबंधित है और ऐसे में एससीएसटी अधिनियम लागू करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
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अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि सभी कथित अपराधों में केवल सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान तथ्यों और परिस्थितियों के तहत आरोपित प्राथमिकी रद्द किए जाने योग्य है और मामले पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। साथ ही अगली तारीख तक याचिकाकर्ताओं को एफआईआर के अनुसार गिरफ्तार न करने और पुलिस जांच में सहयोग करने के आदेश दिए।
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