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आरक्षण सूची में गड़बड़ी की बढ़ीं शिकायतें
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आरक्षण सूची में गड़बड़ी की बढ़ीं शिकायतें
संतकबीरनगर। आरक्षण सूची में गड़बड़ी के आरोप का दौर बढ़ता ही जा रहा है। लोग डीएम, सीडीओ के अलावा डीपीआरओ कार्यालय और ब्लॉक मुख्यालयों पर आपत्तियां देकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इसमें प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण में गड़बड़ी की शिकायतें अधिक पहुंच रही है। अब तक 200 से अधिक आपत्तियां पहुंच चुकी हैं।
जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों में 11 सीटें अनारक्षित हैं। सेमरियावां ब्लॉक की पांचों सीटें और बघौली ब्लॉक की तीनों सीटें आरक्षित हो गई हैं। जिला पंचायत सदस्य के वार्ड का आरक्षण तैयार करते समय कई वार्डों में वर्ष-2000 और 2005 के आरक्षण की स्थिति बगैर प्रदर्शित किए ही सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। जिला पंचायत सदस्य की सीटों की पूर्व के वर्षों का हाल देखें तो वर्ष-1997 में जनपद का सृजन हुआ था। वर्ष-2000 में 16 सीटें थी। जबकि वर्ष-2005 में 22 सीटें हुईं। वर्ष-2010 में 27 सीटें हुईं और वर्ष-2015 में 32 सीटें हो गई थीं। वर्ष-2021 में दो सीटें घटी और 30 सीटों पर चुनाव होना है।
सेमरियावां और बघौली ब्लॉक के वार्ड के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप को लेकर लोग सीडीओ और डीपीआरओ तक पहुंच रहे हैं। इससे जनप्रतिनिधियों में रोष पनप रहा है। निर्वतमान जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद का आरोप है कि आरक्षण की सूची तैयार करने में नियमों का पालन नहीं किया गया है। वर्ष-2010 में जिस सामान्य सीट पर वह चुनाव जीते थे, उसे उसी वर्ष के आरक्षण की स्थिति में पिछड़ा वर्ग दर्शा दिया गया है। वर्ष-2010 में 27 सीटें थी, जबकि आरक्षण सूची तैयार करते समय सिर्फ 22 सीटों को ही प्रदर्शित किया गया है। यही हाल ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण का भी है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सत्यपाल पाल ने डीपीआरओ से मुलाकात की। उनका कहना है कि नौ ब्लॉकों में पांच ब्लॉक आरक्षित कर दिया गया। प्रमुख पद के आरक्षण में 55.56 प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया है। नाथनगर की सीट वर्ष-1995 में अनुसूचित रही। वर्ष 2000 में सामान्य, वर्ष 2005 में पिछड़ा वर्ग, 2010 में सामान्य और 2015 में सामान्य रही। यह सीट कभी महिला हुई ही नहीं। शासन द्वारा उल्लिखित जनसंख्या आंकड़ा भी त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि 53.33 प्रतिशत से कम जनसंख्या होने पर ही दो प्रमुख पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होगा। इसमें नाथनगर विकास खंड तीसरे स्थान पर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, जो अनुचित है। डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र ने बताया कि नियमसंगत तरीके से आरक्षण सूची तैैयार करके प्रकाशित कराई गई है, जिसे आपत्ति है वह शिकायत दर्ज कराए। डीएम की गठित समिति आपत्तियों का निस्तारण करेगी। 14 मार्च को अंतिम सूची का प्रकाशन होगा।
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आरक्षण सूची पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार कर प्रकाशित कराई गई है। यदि किसी कोई आपत्ति है तो वह आवेदन कर आपत्ति दर्ज कराए। समिति आपत्ति का परीक्षण करके शिकायत का निस्तारण करेगी। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।
दिव्या मित्तल, डीएम
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संतकबीरनगर। आरक्षण सूची में गड़बड़ी के आरोप का दौर बढ़ता ही जा रहा है। लोग डीएम, सीडीओ के अलावा डीपीआरओ कार्यालय और ब्लॉक मुख्यालयों पर आपत्तियां देकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। इसमें प्रधान, जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण में गड़बड़ी की शिकायतें अधिक पहुंच रही है। अब तक 200 से अधिक आपत्तियां पहुंच चुकी हैं।
जिला पंचायत सदस्य की 30 सीटों में 11 सीटें अनारक्षित हैं। सेमरियावां ब्लॉक की पांचों सीटें और बघौली ब्लॉक की तीनों सीटें आरक्षित हो गई हैं। जिला पंचायत सदस्य के वार्ड का आरक्षण तैयार करते समय कई वार्डों में वर्ष-2000 और 2005 के आरक्षण की स्थिति बगैर प्रदर्शित किए ही सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। जिला पंचायत सदस्य की सीटों की पूर्व के वर्षों का हाल देखें तो वर्ष-1997 में जनपद का सृजन हुआ था। वर्ष-2000 में 16 सीटें थी। जबकि वर्ष-2005 में 22 सीटें हुईं। वर्ष-2010 में 27 सीटें हुईं और वर्ष-2015 में 32 सीटें हो गई थीं। वर्ष-2021 में दो सीटें घटी और 30 सीटों पर चुनाव होना है।
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सेमरियावां और बघौली ब्लॉक के वार्ड के आरक्षण में गड़बड़ी के आरोप को लेकर लोग सीडीओ और डीपीआरओ तक पहुंच रहे हैं। इससे जनप्रतिनिधियों में रोष पनप रहा है। निर्वतमान जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद का आरोप है कि आरक्षण की सूची तैयार करने में नियमों का पालन नहीं किया गया है। वर्ष-2010 में जिस सामान्य सीट पर वह चुनाव जीते थे, उसे उसी वर्ष के आरक्षण की स्थिति में पिछड़ा वर्ग दर्शा दिया गया है। वर्ष-2010 में 27 सीटें थी, जबकि आरक्षण सूची तैयार करते समय सिर्फ 22 सीटों को ही प्रदर्शित किया गया है। यही हाल ब्लॉक प्रमुख पद के आरक्षण का भी है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सत्यपाल पाल ने डीपीआरओ से मुलाकात की। उनका कहना है कि नौ ब्लॉकों में पांच ब्लॉक आरक्षित कर दिया गया। प्रमुख पद के आरक्षण में 55.56 प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया है। नाथनगर की सीट वर्ष-1995 में अनुसूचित रही। वर्ष 2000 में सामान्य, वर्ष 2005 में पिछड़ा वर्ग, 2010 में सामान्य और 2015 में सामान्य रही। यह सीट कभी महिला हुई ही नहीं। शासन द्वारा उल्लिखित जनसंख्या आंकड़ा भी त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि 53.33 प्रतिशत से कम जनसंख्या होने पर ही दो प्रमुख पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित होगा। इसमें नाथनगर विकास खंड तीसरे स्थान पर पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है, जो अनुचित है। डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र ने बताया कि नियमसंगत तरीके से आरक्षण सूची तैैयार करके प्रकाशित कराई गई है, जिसे आपत्ति है वह शिकायत दर्ज कराए। डीएम की गठित समिति आपत्तियों का निस्तारण करेगी। 14 मार्च को अंतिम सूची का प्रकाशन होगा।
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आरक्षण सूची पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार कर प्रकाशित कराई गई है। यदि किसी कोई आपत्ति है तो वह आवेदन कर आपत्ति दर्ज कराए। समिति आपत्ति का परीक्षण करके शिकायत का निस्तारण करेगी। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है।
दिव्या मित्तल, डीएम