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Sant Kabir Nagar News: ठंड में बच्चों को हाइपोथर्मिया का खतरा
Tue, 14 Jan 2025 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Tue, 14 Jan 2025 11:15 PM IST
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जिला अस्पताल की ओपीडी में बच्चे का इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ।
संतकबीरनगर। ठंड के चलते छोटे बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा बना रहता है। इस खतरे से बचने के लिए कंगारू मदर केयर काफी कारगर साबित हो रहा है। चिकित्सक भी इसकी सलाह देते है। इस पद्धति के अनुसार मां अपने बच्चे सीने से लगाकर रखती है। जिससे तापमान सामान्य रहता है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि मां और शिशु के बीच स्किन-टू-स्किन संपर्क कंगारू केयर कहलाता है। इसके हर एक सेशन में मां कुछ घंटों के लिए शिशु को अपने सीने से लगाकर रखती है। शिशु को डायपर के अलावा और कुछ नहीं पहनाया जाता है। जिले में गर्भकाल में देखभाल न होने के कारण नवजात शिशु समय से पहले ही जन्म ले रहे हैं। वहीं, अवैध अस्पताल भी इसका मुख्य कारण है।
उन्होंने बताया कि जब बच्चा ठंडा बुखार से पीड़ित होता है तो देखभाल के इस तरीके में शिशु को मां के सीने से लगाकर गर्माहट दी जाती है, इससे शिशु तेजी से विकास करता है। उन्होंने बताया कि लगातार स्तनपान व केएमसी देने से 85 फीसदी शिशु स्वस्थ हो जाते हैं। कम वजन या समय से पहले जन्मे शिशुओं में स्वयं को गरम बनाए रखने की क्षमता नहीं होती। ऐसे में तापमान सामान्य से कम होने पर शिशु को हाइपोथर्मिया हो सकता है और वह गंभीर बीमार हो सकते हैं।
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इस विधि को अपनाने से प्रसव के बाद प्लेसेंटा/आंवल जल्दी बाहर आने के साथ ही मां का दूध भी जल्दी उतरता है। केएमसी प्रशिक्षित नर्सें शिशुओं को मां के सीने से इस प्रकार लगाकर रखती हैं कि मां की त्वचा से शिशु की त्वचा का लगाव हो सके। सुविधा के लिए प्रत्येक बच्चे के लिए एक गाउन, एक थर्मामीटर, एक केएमसी रैप और एक बेबी कैप दिया जाता है।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि मां और शिशु के बीच स्किन-टू-स्किन संपर्क कंगारू केयर कहलाता है। इसके हर एक सेशन में मां कुछ घंटों के लिए शिशु को अपने सीने से लगाकर रखती है। शिशु को डायपर के अलावा और कुछ नहीं पहनाया जाता है। जिले में गर्भकाल में देखभाल न होने के कारण नवजात शिशु समय से पहले ही जन्म ले रहे हैं। वहीं, अवैध अस्पताल भी इसका मुख्य कारण है।
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उन्होंने बताया कि जब बच्चा ठंडा बुखार से पीड़ित होता है तो देखभाल के इस तरीके में शिशु को मां के सीने से लगाकर गर्माहट दी जाती है, इससे शिशु तेजी से विकास करता है। उन्होंने बताया कि लगातार स्तनपान व केएमसी देने से 85 फीसदी शिशु स्वस्थ हो जाते हैं। कम वजन या समय से पहले जन्मे शिशुओं में स्वयं को गरम बनाए रखने की क्षमता नहीं होती। ऐसे में तापमान सामान्य से कम होने पर शिशु को हाइपोथर्मिया हो सकता है और वह गंभीर बीमार हो सकते हैं।
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इस विधि को अपनाने से प्रसव के बाद प्लेसेंटा/आंवल जल्दी बाहर आने के साथ ही मां का दूध भी जल्दी उतरता है। केएमसी प्रशिक्षित नर्सें शिशुओं को मां के सीने से इस प्रकार लगाकर रखती हैं कि मां की त्वचा से शिशु की त्वचा का लगाव हो सके। सुविधा के लिए प्रत्येक बच्चे के लिए एक गाउन, एक थर्मामीटर, एक केएमसी रैप और एक बेबी कैप दिया जाता है।