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Sant Kabir Nagar News: सीसीटीवी कैमरे की निगरानी फेल, अस्पताल में सक्रिय हैं मरीज माफिया
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जिला अस्पताल के ओपीडी में लगी मरीजो की भीड़।संवाद
सीएमएस कक्ष से सीधे की जाती है माॅनीटरिंग, ओपीडी में चिकित्सक कक्ष में मौजूद रहते हैं मरीज माफिया, पर नहीं होती है कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी समेत हर कक्ष में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। इसकी निगरानी सीएमएस और शासन स्तर से ऑनलाइन की जाती है। हर कक्ष में चिकित्सकाें के पास मरीज माफिया बैठे रहते हैं, पर यह कैमरे में दिखाई नहीं देते हैं। यह सब अस्पताल की शह पर संचालित हो रहा है। छह माह पहले पूर्व सीएमएस ने चार बाहरी युवकों को पकड़ा भी था, पर पुलिस ने तहरीर न मिलने पर सभी को छोड़ दिया था। एक माह पूर्व चिकित्सक और दवा व्यापारी के बीच मारपीट भी हुई थी। उसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा पा रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1400 से 1500 के करीब मरीज देखे जाते हैं। मरीज पर्चा बनवाकर ओपीडी में बैठे चिकित्सक के कक्ष में दिखाने जाते हैं। जिसके बाद चिकित्सक दवा लिखते हैं। हर कक्ष में तीन से चार युवक बाहरी बैठे रहते हैं। यह मरीज से पर्ची लेते हैं और दवा कब-कब खिलानी है, यह बताते हैं। इसके बाद मरीज से बाहर से दवा खरीदने के लिए कहते हैं और सस्ते दर पर दवा दिलाने का लालच भी देते हैं। इसमें चिकित्सक से लगायत सभी का कमीशन तय रहता है। अगर कोई मरीज इनके चंगुल में आ जाता है तो उसे निर्धारित दवा की दुकान पर ले जाकर दवा दिला देते हैं। ओपीडी के हर कक्ष में सीसीटीवी कैमरा भी लगा है। इस कैमरे की निगरानी सीएमएस कक्ष से होती है और शासन स्तर से भी ऑनलाइन की जाती है। उसके बावजूद यह मरीज माफिया इन अधिकारियों को दिखाई नहीं देते हैं।
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बाहर से दवा दिलाने के लिए युवक ने बनाया दबाव
सोमवार को ओपीडी में दवा लेने आए भरपुरवा निवासी श्याम बिहारी ने बताया कि डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने छह तरह की दवा लिख दी। उसी कमरे में मौजूद एक युवक आया और बाहर से सस्ती दर पर दवा दिलाने की बात कही। जिस पर उन्होंने मना कर दिया। बंजरिया पूर्वी निवासी अरशद ने बताया कि बच्चे को दिखाने आए थे और डॉक्टर ने पांच तरह की दवा लिखी और पांच दिन बाद फिर बुलाया। यह सभी दवा बाहर की थी। कमरे में मौजूद युवक ने दवा की पर्ची ले ली और कहा कि चलिए दवा दिला दें। जब उन्होंने दवा अंदर से लिखने की बात कही तो डॉक्टर ने बताया कि एक दवा मिलेगी अन्य दवाएं नहीं है। बाहर से ही लेनी पड़ेगी।
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छह माह पूर्व पकड़े गए चार बाहरी युवक
जिला अस्पताल में छह माह पूर्व चार बाहरी युवक ओपीडी में पकडे़ गए थे। तत्कालीन सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने इन युवकों को पकड़ा था और पुलिस के हवाले कर दिया था, पर तहरीर न मिलने पर पुलिस ने बाद में इन युवकों को छोड़ दिया था।
एक माह पूर्व कक्ष में बैठने पर शासन ने जताई थी नाराजगी
जिला अस्पताल के सीएमएस कक्ष के साथ ही महानिदेशालय लखनऊ से इसकी ऑनलाइन मानीटरिंग की जाती है। एक माह पूर्व शासन से माॅनीटरिंग के दौरान एक कक्ष में चिकित्सक के अलावा तीन अन्य लोगों के बैठे जाने पर शासन ने पूछताछ की थी, जिस पर तत्कालीन सीएमएस ने तत्काल इन युवकों को कमरे से बाहर करवा दिया था।
बाहर की दवा को लेकर चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच हो चुकी है मारपीट
जिला अस्पताल के एक चिकित्सक के बाहरी दवा लिखने और मरीज को बाहर ले जाकर दवा दिलाने को लेकर चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच मारपीट भी हो चुकी है। मरीज बाहर मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदने गया था, तो मेडिकल स्टोर संचालक ने अन्य डाॅक्टर को दिखाने की बात कही थी। जिस पर मरीज के साथ गए डॉक्टर के सहयोगी को नागवार गुजरी थी और उसके बाद मारपीट हो गई थी। मामला कोतवाली भी पहुंचा था, लेकिन बाद में डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच सुलह हो गया था।
ओपीडी के किसी भी कक्ष में चिकित्सक के अलावा अन्य कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं रहेगा, इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी और औचक जांच भी की जाएगी। साथ ही चिकित्सकों को भी हिदायत दी गई है कि अस्पताल और जन औषधि केंद्र की दवा लिखें। इसमें किसी प्रकार की कोताही न बरतें, अगर मरीज को काई बाहर ले जाकर दवा दिलाता है और पकड़ा जाता है तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।
डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमएस
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी समेत हर कक्ष में सीसीटीवी कैमरा लगाए गए हैं। इसकी निगरानी सीएमएस और शासन स्तर से ऑनलाइन की जाती है। हर कक्ष में चिकित्सकाें के पास मरीज माफिया बैठे रहते हैं, पर यह कैमरे में दिखाई नहीं देते हैं। यह सब अस्पताल की शह पर संचालित हो रहा है। छह माह पहले पूर्व सीएमएस ने चार बाहरी युवकों को पकड़ा भी था, पर पुलिस ने तहरीर न मिलने पर सभी को छोड़ दिया था। एक माह पूर्व चिकित्सक और दवा व्यापारी के बीच मारपीट भी हुई थी। उसके बावजूद अस्पताल प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा पा रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1400 से 1500 के करीब मरीज देखे जाते हैं। मरीज पर्चा बनवाकर ओपीडी में बैठे चिकित्सक के कक्ष में दिखाने जाते हैं। जिसके बाद चिकित्सक दवा लिखते हैं। हर कक्ष में तीन से चार युवक बाहरी बैठे रहते हैं। यह मरीज से पर्ची लेते हैं और दवा कब-कब खिलानी है, यह बताते हैं। इसके बाद मरीज से बाहर से दवा खरीदने के लिए कहते हैं और सस्ते दर पर दवा दिलाने का लालच भी देते हैं। इसमें चिकित्सक से लगायत सभी का कमीशन तय रहता है। अगर कोई मरीज इनके चंगुल में आ जाता है तो उसे निर्धारित दवा की दुकान पर ले जाकर दवा दिला देते हैं। ओपीडी के हर कक्ष में सीसीटीवी कैमरा भी लगा है। इस कैमरे की निगरानी सीएमएस कक्ष से होती है और शासन स्तर से भी ऑनलाइन की जाती है। उसके बावजूद यह मरीज माफिया इन अधिकारियों को दिखाई नहीं देते हैं।
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बाहर से दवा दिलाने के लिए युवक ने बनाया दबाव
सोमवार को ओपीडी में दवा लेने आए भरपुरवा निवासी श्याम बिहारी ने बताया कि डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने छह तरह की दवा लिख दी। उसी कमरे में मौजूद एक युवक आया और बाहर से सस्ती दर पर दवा दिलाने की बात कही। जिस पर उन्होंने मना कर दिया। बंजरिया पूर्वी निवासी अरशद ने बताया कि बच्चे को दिखाने आए थे और डॉक्टर ने पांच तरह की दवा लिखी और पांच दिन बाद फिर बुलाया। यह सभी दवा बाहर की थी। कमरे में मौजूद युवक ने दवा की पर्ची ले ली और कहा कि चलिए दवा दिला दें। जब उन्होंने दवा अंदर से लिखने की बात कही तो डॉक्टर ने बताया कि एक दवा मिलेगी अन्य दवाएं नहीं है। बाहर से ही लेनी पड़ेगी।
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छह माह पूर्व पकड़े गए चार बाहरी युवक
जिला अस्पताल में छह माह पूर्व चार बाहरी युवक ओपीडी में पकडे़ गए थे। तत्कालीन सीएमएस डॉ. ओपी चतुर्वेदी ने इन युवकों को पकड़ा था और पुलिस के हवाले कर दिया था, पर तहरीर न मिलने पर पुलिस ने बाद में इन युवकों को छोड़ दिया था।
एक माह पूर्व कक्ष में बैठने पर शासन ने जताई थी नाराजगी
जिला अस्पताल के सीएमएस कक्ष के साथ ही महानिदेशालय लखनऊ से इसकी ऑनलाइन मानीटरिंग की जाती है। एक माह पूर्व शासन से माॅनीटरिंग के दौरान एक कक्ष में चिकित्सक के अलावा तीन अन्य लोगों के बैठे जाने पर शासन ने पूछताछ की थी, जिस पर तत्कालीन सीएमएस ने तत्काल इन युवकों को कमरे से बाहर करवा दिया था।
बाहर की दवा को लेकर चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच हो चुकी है मारपीट
जिला अस्पताल के एक चिकित्सक के बाहरी दवा लिखने और मरीज को बाहर ले जाकर दवा दिलाने को लेकर चिकित्सक और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच मारपीट भी हो चुकी है। मरीज बाहर मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदने गया था, तो मेडिकल स्टोर संचालक ने अन्य डाॅक्टर को दिखाने की बात कही थी। जिस पर मरीज के साथ गए डॉक्टर के सहयोगी को नागवार गुजरी थी और उसके बाद मारपीट हो गई थी। मामला कोतवाली भी पहुंचा था, लेकिन बाद में डॉक्टर और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच सुलह हो गया था।
ओपीडी के किसी भी कक्ष में चिकित्सक के अलावा अन्य कोई भी बाहरी व्यक्ति नहीं रहेगा, इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी और औचक जांच भी की जाएगी। साथ ही चिकित्सकों को भी हिदायत दी गई है कि अस्पताल और जन औषधि केंद्र की दवा लिखें। इसमें किसी प्रकार की कोताही न बरतें, अगर मरीज को काई बाहर ले जाकर दवा दिलाता है और पकड़ा जाता है तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा।
डॉ. भवनाथ पांडेय, सीएमएस