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Sant Kabir Nagar News: एक मुट्ठी बालू लेकर कारसेवा में शामिल हुए थे लोग
Sun, 07 Jan 2024 11:27 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sun, 07 Jan 2024 11:27 PM IST
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विकेकानंद वर्मा।
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पूर्व मंत्री श्रीराम चौहान, विवेकानंद वर्मा सहित तमाम लोग पहुंचे थे अयोध्या, श्री राम का मंदिर बनने पर जताई खुशी, कहा-होंगे शामिल
फोटो है
संतकबीरनगर। 1992 में विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर कारसेवा के लिए जिले से पूर्व मंत्री श्रीम राम चौहान, विवेकानंद वर्मा सहित तमाम लोग अयोध्या गए थे। इस दौरान सरयू नदी से एक मुट्ठी बालू लेकर विवादित स्थल तक पहुंचने का आह्वान किया गया था। वहां मंच सजा था। भाषण भी चल रहा था। इसी दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और विवादित ढांचे पर चढ़ गई। मंच से एलान होता रहा कि लोग ढांचे से उतर जाएं लेकिन लोगों ने पाइप आदि के जरिए विवादित ढांचा को तोड़ना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवादित ढांचा भरभराकर ढह गया।
कारसेवा में शामिल विवेकानंद वर्मा बताते हैं कि पांच दिसंबर 1990 को पूर्व मंत्री श्रीराम चौहान के साथ वह लोग सुबह ही अयोध्या के कारसेवक पुरम पहुंच गए थे। छह दिसंबर को सुबह विवादित ढांचे के समीप मंच सजकर तैयार हो गया था। यहां से एलान हुआ कि लोग सरयू में स्नान करने के बाद एक मुट्ठी बालू लेकर कारसेवा के लिए पहुंचें। भीड़ ज्यादा थी और लोग बालू लेकर विवादित स्थल तक पहुंचे तो उनका धैर्य भी टूट गया। सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लोग परिसर में दाखिल हो गए और जिसको जो मिला उसी से विवादित ढांचे पर प्रहार करने लगा।
मंच से बार-बार लोगों को वहां से हटने का आग्रह किया जाता रहा, लेकिन लोग नहीं माने। इसके बाद ढांचा तोड़ने का सिलसिला शुरू हुआ तो जय श्रीराम के नारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया और देखते ही देखते विवादित ढांचा ढह गया। बाद में प्रशासन ने बसों के जरिए लोगों को उनके क्षेत्रों में पहुंचाया।
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विवेकानंद वर्मा बताते हैं कि वह विवादित ढांचे की ईंट लेकर आए थे। उनका कहना है आज भगवान का श्रीराम का भव्य मंदिर बन कर तैयार हो गया है। प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है। इसमें शामिल होने का भरसक प्रयास करेंगे। संवाद
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फोटो है
संतकबीरनगर। 1992 में विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर कारसेवा के लिए जिले से पूर्व मंत्री श्रीम राम चौहान, विवेकानंद वर्मा सहित तमाम लोग अयोध्या गए थे। इस दौरान सरयू नदी से एक मुट्ठी बालू लेकर विवादित स्थल तक पहुंचने का आह्वान किया गया था। वहां मंच सजा था। भाषण भी चल रहा था। इसी दौरान भीड़ बेकाबू हो गई और विवादित ढांचे पर चढ़ गई। मंच से एलान होता रहा कि लोग ढांचे से उतर जाएं लेकिन लोगों ने पाइप आदि के जरिए विवादित ढांचा को तोड़ना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवादित ढांचा भरभराकर ढह गया।
कारसेवा में शामिल विवेकानंद वर्मा बताते हैं कि पांच दिसंबर 1990 को पूर्व मंत्री श्रीराम चौहान के साथ वह लोग सुबह ही अयोध्या के कारसेवक पुरम पहुंच गए थे। छह दिसंबर को सुबह विवादित ढांचे के समीप मंच सजकर तैयार हो गया था। यहां से एलान हुआ कि लोग सरयू में स्नान करने के बाद एक मुट्ठी बालू लेकर कारसेवा के लिए पहुंचें। भीड़ ज्यादा थी और लोग बालू लेकर विवादित स्थल तक पहुंचे तो उनका धैर्य भी टूट गया। सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए लोग परिसर में दाखिल हो गए और जिसको जो मिला उसी से विवादित ढांचे पर प्रहार करने लगा।
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मंच से बार-बार लोगों को वहां से हटने का आग्रह किया जाता रहा, लेकिन लोग नहीं माने। इसके बाद ढांचा तोड़ने का सिलसिला शुरू हुआ तो जय श्रीराम के नारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो गया और देखते ही देखते विवादित ढांचा ढह गया। बाद में प्रशासन ने बसों के जरिए लोगों को उनके क्षेत्रों में पहुंचाया।
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विवेकानंद वर्मा बताते हैं कि वह विवादित ढांचे की ईंट लेकर आए थे। उनका कहना है आज भगवान का श्रीराम का भव्य मंदिर बन कर तैयार हो गया है। प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होनी है। इसमें शामिल होने का भरसक प्रयास करेंगे। संवाद