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गाजर घास खतरनाकए इससे बचें: डॉ अरविंद
Sat, 19 Aug 2023 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 19 Aug 2023 11:45 PM IST
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- कृषि विज्ञान केंद्र पर गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही पर शनिवार को 18वां राष्ट्रीय गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। इसमें संत रतन शंकर इंटर कॉलेज बगही के छात्रों को सम्मिलित किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि गाजर घास में विनाशक गुण है। जलवायु में बढ़ने, फूलने व पकने की क्षमता, बीज का तुरंत जमाव इसके खतरनाक खरपतवार की विशिष्टता है। जिससे इसका अनवरत फैलाव फसलों एवं पर्यावरण को भी हानि पहुंचाता है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि गाजर घास को नष्ट करने के लिए मैक्सिकन बीटल, जाइगोग्रामा का संरक्षण व संवर्धन करें। इसके अलावा किसान इसके अर्क से नाइट्रोजन युक्त तरल प्राप्त करके दो प्रतिशत की दर से फसल पर छिड़काव करने से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी।
केंद्र के वैज्ञानक डॉ तरुण कुमार ने बताया कि फूल आने के पहले गाजर घास को खेत में मिलाने व कम्पोस्ट बना कर हम अपने खेत की उपजाऊपन को बढ़ा सकते हैं।
डॉ देवेश ने बताया कि इसके परागकणों से मनुष्यों में होने वाली दमा जैसी जानलेवा बीमारी, त्वचा स्पर्श से शरीर में एलर्जी होती है। इस दौरान डॉ संदीप सिंह कश्यप समेत अन्य मौजूद रहे।
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धनघटा। कृषि विज्ञान केंद्र बगही पर शनिवार को 18वां राष्ट्रीय गाजर घास जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया। इसमें संत रतन शंकर इंटर कॉलेज बगही के छात्रों को सम्मिलित किया गया। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि गाजर घास में विनाशक गुण है। जलवायु में बढ़ने, फूलने व पकने की क्षमता, बीज का तुरंत जमाव इसके खतरनाक खरपतवार की विशिष्टता है। जिससे इसका अनवरत फैलाव फसलों एवं पर्यावरण को भी हानि पहुंचाता है।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि गाजर घास को नष्ट करने के लिए मैक्सिकन बीटल, जाइगोग्रामा का संरक्षण व संवर्धन करें। इसके अलावा किसान इसके अर्क से नाइट्रोजन युक्त तरल प्राप्त करके दो प्रतिशत की दर से फसल पर छिड़काव करने से नाइट्रोजन की पूर्ति होगी।
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केंद्र के वैज्ञानक डॉ तरुण कुमार ने बताया कि फूल आने के पहले गाजर घास को खेत में मिलाने व कम्पोस्ट बना कर हम अपने खेत की उपजाऊपन को बढ़ा सकते हैं।
डॉ देवेश ने बताया कि इसके परागकणों से मनुष्यों में होने वाली दमा जैसी जानलेवा बीमारी, त्वचा स्पर्श से शरीर में एलर्जी होती है। इस दौरान डॉ संदीप सिंह कश्यप समेत अन्य मौजूद रहे।
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