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Sant Kabir Nagar News: मिठाई खरीदो आज, अच्छी या खराब पता चलेगा एक माह बाद
Sat, 04 Mar 2023 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Sat, 04 Mar 2023 11:25 PM IST
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मिठाई की दुकान वर मिठाई की खरीदारी करते लोग।संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। इस होली पर मिठाई जरा देख समझ कर ही खरीदें, कहीं ऐसा न हो कि हलवाई आपको बासी मिठाई चिपका दे। हम डरा नहीं रहे हैं, आपको सिर्फ सावधान कर रहे है। नियम के तहत दुकानदारों को खुद अपनी दुकानों पर तैयार मिठाई की वैधता तिथि का अंकन करना है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग इस लापरवाही की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे पुरानी मिठाईयों की खपत होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
शासन से एक जून 2022 को निर्देश जारी हुआ था कि दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों पर तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की बनने व उपयोग करने योग्य तिथि यानी उसकी वैधता तिथि का अंकन करेंगे। जिससे ग्राहकों को पता चले कि जो मिठाई वह खरीद रहे हैं, वह कब बनी और वह कब तक उपयोग करने लायक है। इस नियम का अनुपालन कराए जाने की जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की है। इसमें दूध से बनी मिठाईयां जैसे छेना, रसगुल्ला और रबड़ी बनने के बाद सिर्फ दो दिन के खाने के लिए सुरक्षित मानी गई है। जबकि बर्फी पांच दिन के लिए सुरक्षित है। सूखी मिठाईयां और बेसन से बनी मिठाइयों की वैधता सात दिन है। आलम यह है कि होली के त्योहार के मद्देनजर कुछ दिन पहले से ही मिठाई तैयार करके भंडारित कराई जाती है, ताकि समय पर उसकी बिक्री की जा सके। ऐसा मामला पूर्व में जिले में सामने आया भी था। उसमें कई दुकानदारों पर कार्रवाई हुई भी थी। इसके बावजूद जिले में अधिकांश दुकानों पर दुकानदार मिठाई आदि की वैधता का अंकन नहीं कर रहे हैं। जिससे ग्राहकों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि कौन सी मिठाई कब बनी और कितने दिन इस्तेमाल के योग्य है। विभाग के अधिकारी भी इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। इससे बासी मिठाईयों की बिक्री की पूरी आशंका बनी हुई है।
कोट
नियम है कि दुकानदार अपने यहां तैयार मिठाई आदि खाद्य पदार्थ की वैधता का निर्धारण स्वयं करें। इस दिशा में अभी कार्रवाई करने का निर्देश नहीं है। दुकानदारों को जागरूक करके ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लोग भी मिठाई या खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें।
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- जेपी तिवारी, अभिहित अधिकारी
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नमूनों की 40 दिन बाद आती है रिपोर्ट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग जब त्योहार आता है, तभी अधिक सतर्क होता है। इसमें जो नमूने लिए जा रहे है, उसकी रिपोर्ट 40 दिन में आने का नियम है। ऐसे में मिलावटी पदार्थ के खपत की पूरी आशंका है। अभियान में अभी तक खोआ, पनीर, दाल, बेसन, चना आदि के कुल 13 नमूने लिए गए है, जिसकी रिपोर्ट 40 दिन बाद आएगी। पूर्व में लिए गए दस ऐसे नमूने हैं, जिनकी रिपोर्ट 40 दिन गुजर जाने के बाद भी नहीं आ पाई है। ऐसे में भी सभी को सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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कानपुर से चोरी-चुपके आ रहा मिलावटी खोवा
होली के पर्व पर कानपुर से मिलावटी खोआ की खेप पहुंच रही है। मेंहदावल बाईपास और रेलवे स्टेशन पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने सख्ती की तो अब मिलावट खोर इसे निजी वाहनों से भी भेज रहे है। यहां से यह खोवा जिले के विभिन्न बाजारों में पहुुंचाया रहा है। पूर्व के वर्षो में मेंहदावल बाईपास पर रोडवेज की बसों में मिलावटी खोवा पकड़ा भी जा चुका है। जिसे विभाग ने नष्ट कराया था।
60 प्रतिशत से अधिक नमूने जांच में हुए फेल
पिछले एक साल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने 1132 स्थानों का निरीक्षण किया। जबकि 109 जगह छापा मारा था। कुल 113 नमूने जुटाए थे। इसमें से जांच में 48 नमूने अधोमानक पाए गए। जबकि 16 नमूने असुरक्षित पाए गए। 20 नमूने मिसब्रांड और चार मामले नियम उल्लंघन के पाए गए थे। अभिहित अधिकारी जेपी तिवारी ने बताया कि 69 मामलों में वाद दायर किया गया था। 59 मामले में निर्णय आया और 13,96,500 रुपये का जुर्माना किया गया है।
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संतकबीरनगर। इस होली पर मिठाई जरा देख समझ कर ही खरीदें, कहीं ऐसा न हो कि हलवाई आपको बासी मिठाई चिपका दे। हम डरा नहीं रहे हैं, आपको सिर्फ सावधान कर रहे है। नियम के तहत दुकानदारों को खुद अपनी दुकानों पर तैयार मिठाई की वैधता तिथि का अंकन करना है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग इस लापरवाही की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे पुरानी मिठाईयों की खपत होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
शासन से एक जून 2022 को निर्देश जारी हुआ था कि दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों पर तैयार होने वाले खाद्य पदार्थों की बनने व उपयोग करने योग्य तिथि यानी उसकी वैधता तिथि का अंकन करेंगे। जिससे ग्राहकों को पता चले कि जो मिठाई वह खरीद रहे हैं, वह कब बनी और वह कब तक उपयोग करने लायक है। इस नियम का अनुपालन कराए जाने की जिम्मेदार खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की है। इसमें दूध से बनी मिठाईयां जैसे छेना, रसगुल्ला और रबड़ी बनने के बाद सिर्फ दो दिन के खाने के लिए सुरक्षित मानी गई है। जबकि बर्फी पांच दिन के लिए सुरक्षित है। सूखी मिठाईयां और बेसन से बनी मिठाइयों की वैधता सात दिन है। आलम यह है कि होली के त्योहार के मद्देनजर कुछ दिन पहले से ही मिठाई तैयार करके भंडारित कराई जाती है, ताकि समय पर उसकी बिक्री की जा सके। ऐसा मामला पूर्व में जिले में सामने आया भी था। उसमें कई दुकानदारों पर कार्रवाई हुई भी थी। इसके बावजूद जिले में अधिकांश दुकानों पर दुकानदार मिठाई आदि की वैधता का अंकन नहीं कर रहे हैं। जिससे ग्राहकों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि कौन सी मिठाई कब बनी और कितने दिन इस्तेमाल के योग्य है। विभाग के अधिकारी भी इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। इससे बासी मिठाईयों की बिक्री की पूरी आशंका बनी हुई है।
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नियम है कि दुकानदार अपने यहां तैयार मिठाई आदि खाद्य पदार्थ की वैधता का निर्धारण स्वयं करें। इस दिशा में अभी कार्रवाई करने का निर्देश नहीं है। दुकानदारों को जागरूक करके ऐसा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लोग भी मिठाई या खाद्य पदार्थ खरीदते समय उसकी गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें।
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- जेपी तिवारी, अभिहित अधिकारी
नमूनों की 40 दिन बाद आती है रिपोर्ट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग जब त्योहार आता है, तभी अधिक सतर्क होता है। इसमें जो नमूने लिए जा रहे है, उसकी रिपोर्ट 40 दिन में आने का नियम है। ऐसे में मिलावटी पदार्थ के खपत की पूरी आशंका है। अभियान में अभी तक खोआ, पनीर, दाल, बेसन, चना आदि के कुल 13 नमूने लिए गए है, जिसकी रिपोर्ट 40 दिन बाद आएगी। पूर्व में लिए गए दस ऐसे नमूने हैं, जिनकी रिपोर्ट 40 दिन गुजर जाने के बाद भी नहीं आ पाई है। ऐसे में भी सभी को सतर्कता बरतने की जरूरत है।
कानपुर से चोरी-चुपके आ रहा मिलावटी खोवा
होली के पर्व पर कानपुर से मिलावटी खोआ की खेप पहुंच रही है। मेंहदावल बाईपास और रेलवे स्टेशन पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने सख्ती की तो अब मिलावट खोर इसे निजी वाहनों से भी भेज रहे है। यहां से यह खोवा जिले के विभिन्न बाजारों में पहुुंचाया रहा है। पूर्व के वर्षो में मेंहदावल बाईपास पर रोडवेज की बसों में मिलावटी खोवा पकड़ा भी जा चुका है। जिसे विभाग ने नष्ट कराया था।
60 प्रतिशत से अधिक नमूने जांच में हुए फेल
पिछले एक साल में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने 1132 स्थानों का निरीक्षण किया। जबकि 109 जगह छापा मारा था। कुल 113 नमूने जुटाए थे। इसमें से जांच में 48 नमूने अधोमानक पाए गए। जबकि 16 नमूने असुरक्षित पाए गए। 20 नमूने मिसब्रांड और चार मामले नियम उल्लंघन के पाए गए थे। अभिहित अधिकारी जेपी तिवारी ने बताया कि 69 मामलों में वाद दायर किया गया था। 59 मामले में निर्णय आया और 13,96,500 रुपये का जुर्माना किया गया है।