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ब्रिटिश मौलाना प्रकरण : मदरसा भूमि का मामला फिर पहुंचा एसडीएम कोर्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसे कुल्लियातुल बनातिर रजविया की भूमि का मामला एक बार फिर एसडीएम कोर्ट पहुंच गया है। शिकायतकर्ता नूरुल हक व आसिया खातून निवासी ग्राम सहसरांव ने एसडीएम सदर कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर मदरसे की भूमि से जुड़े बैनामे को शून्य घोषित करने तथा जमीन को राज्य सरकार में निहित किए जाने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मदरसे की भूमि से जुड़े अभिलेखों और बैनामे में अनियमितता बरती गई है। मामले को लेकर प्रशासन पहले भी सक्रिय रहा है और अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके विरोध में मदरसा प्रबंधन हाईकोर्ट पहुंच गया था।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान भूमि विवाद के निस्तारण का अधिकार एसडीएम कोर्ट को बताया था। साथी ही डीएम और कमिश्नर के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद अब एक बार फिर प्रकरण एसडीएम न्यायालय में पहुंचने से मामले ने तूल पकड़ लिया है।
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शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि राजस्व अभिलेखों की जांच कर संबंधित बैनामे को निरस्त किया जाए और भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित किया जाए। वहीं, मदरसा प्रबंधन पहले ही अपने पक्ष में दस्तावेज होने का दावा करता रहा है। एसडीएम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासनिक और राजस्व महकमे की नजरें अब आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।
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हाईकोर्ट के डबल बेंच में नहीं हो सकी सुनवाई
मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच मदरसा प्रबंधन ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में याचिका दाखिल की थी, जिस पर 18 मई को सुनवाई होनी थी। मदरसा प्रबंधन की तरफ से उक्त तिथि को संशोधन प्रार्थनापत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया गया। इसकी वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। जानकारों के अनुसार अभी तक कोर्ट की तरफ से सुनवाई के लिए कोई तिथि नियत नहीं की गई है।
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मामला अभी संज्ञान में नहीं है, इस संबंध में जानकारी लेने के बाद ही कोई जवाब दिया जा सकेगा। यदि ऐसा कुछ है तो मामले की सुनवाई कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-हृदय राम तिवारी, एसडीएम, खलीलाबाद
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संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसे कुल्लियातुल बनातिर रजविया की भूमि का मामला एक बार फिर एसडीएम कोर्ट पहुंच गया है। शिकायतकर्ता नूरुल हक व आसिया खातून निवासी ग्राम सहसरांव ने एसडीएम सदर कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर मदरसे की भूमि से जुड़े बैनामे को शून्य घोषित करने तथा जमीन को राज्य सरकार में निहित किए जाने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मदरसे की भूमि से जुड़े अभिलेखों और बैनामे में अनियमितता बरती गई है। मामले को लेकर प्रशासन पहले भी सक्रिय रहा है और अवैध निर्माण मानते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके विरोध में मदरसा प्रबंधन हाईकोर्ट पहुंच गया था।
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हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान भूमि विवाद के निस्तारण का अधिकार एसडीएम कोर्ट को बताया था। साथी ही डीएम और कमिश्नर के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद अब एक बार फिर प्रकरण एसडीएम न्यायालय में पहुंचने से मामले ने तूल पकड़ लिया है।
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शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि राजस्व अभिलेखों की जांच कर संबंधित बैनामे को निरस्त किया जाए और भूमि को सरकारी संपत्ति घोषित किया जाए। वहीं, मदरसा प्रबंधन पहले ही अपने पक्ष में दस्तावेज होने का दावा करता रहा है। एसडीएम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासनिक और राजस्व महकमे की नजरें अब आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं।
हाईकोर्ट के डबल बेंच में नहीं हो सकी सुनवाई
मदरसा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच मदरसा प्रबंधन ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में याचिका दाखिल की थी, जिस पर 18 मई को सुनवाई होनी थी। मदरसा प्रबंधन की तरफ से उक्त तिथि को संशोधन प्रार्थनापत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया गया। इसकी वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। जानकारों के अनुसार अभी तक कोर्ट की तरफ से सुनवाई के लिए कोई तिथि नियत नहीं की गई है।
मामला अभी संज्ञान में नहीं है, इस संबंध में जानकारी लेने के बाद ही कोई जवाब दिया जा सकेगा। यदि ऐसा कुछ है तो मामले की सुनवाई कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
-हृदय राम तिवारी, एसडीएम, खलीलाबाद