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भागवत कथा स्वयं भगवान के मुख से प्रकट ग्रंथ है : धरणीधर

Sun, 22 Nov 2020 06:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Nov 2020 06:20 PM IST
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Bhagwat Katha is a self-proclaimed text : Dharnidhar
भागवत कथा स्वयं भगवान के मुख से प्रकट ग्रंथ है : धरणीधर
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बखिरा। स्थानीय कस्बे में श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य धरणीधर ने कहा कि भागवत स्वयं भगवान के मुख से प्रकट ग्रंथ है। यह पंचम वेद है। मृत्यु के भय का विनाश करने वाला मंगलमय ग्रंथ है। मानव जीवन के साथ-साथ सभी प्राणियों के लिए उद्धारक ग्रंथ है।
उन्होंने कहा कि नर को भी नारायण तक पहुंचाने का उत्तम सोपान है। भक्त और भगवान की गाथा अमर है। इस लिए अमर कथा है। सत्संग का मतलब श्रीमद्भागवत कथा है। सत्संग का मतलब ईश्वर में सच्ची भक्ति है। सत्संग का तात्पर्य, जहां जाने के बाद आपका आचरण, व्यवहार ,सदाचार, जीवन की गति परमात्मा की संगति के लिए बराबर बेचैन हो जाए, वही सत्संग है।
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इस अवसर पर ध्रुव नारायण चौधरी, राम शरण सिंह, महादेव प्रसाद, अशोक कुमार गुप्ता, संतोष कुमार, मनोज कुमार सिंह, अंजनी कुमार, धनुष धर पांडेय, सचिदानंद शास्त्री, अजय धर द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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