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Sant Kabir Nagar News: कबीरचौरा में टूटी हैं बेंच, लाइटें खराब
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कबीर की निर्वाण स्थली पर आने वाले लोगों को होती है परेशानी
मगहर। संतकबीर की महापरिनिर्वाण स्थली कबीर चौरा परिसर को केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित और सुंदरीकरण किया गया है। ताकि पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। कबीर चौरा परिसर में पर्यटकों के बैठने के लिए लाल पत्थर की बेंच और परिसर में उजाले के लिए सोलर लाइटें आदि लगाई गई हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में सोलर लाइटें खराब हो चुकी हैं।
इसके साथ ही लगभग आधा दर्जन से अधिक बेंचों को नशेड़ियों एवं असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है, जिससे यहां आने-जाने वाले पर्यटकों को बैठने में परेशानियां हो रही हैं।
संतकबीर की निर्वाण स्थली मगहर में स्थित है। यह परिसर 27 एकड़ में फैला है। इसके विकास के लिए तत्कालीन पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी के प्रयास से स्वदेश दर्शन योजना में शामिल किया गया। उसके बाद पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार ने इसे सुंदरीकरण और विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए। ताकि बाहर से आने वाले पर्यटकों को कबीर स्थली आकर्षित कर सके।
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इसके लिए पूरे परिसर में 72 सोलर लाइट, कई गजीबो का निर्माण कर उसमें बैठने के लाल पत्थर की बेंचें लगवाई गईं। इसमें से अधिकतर सोलर लाइटें रखरखाव के अभाव में खराब हो चुकी हैं। इसके अलावा लगभग आधा दर्जन से अधिक बेंचें भी टूट चुकी हैं। कबीर चौरा परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से अगस्त 2025 में शासन स्तर से चौकी स्थापित की गई है। इस चौकी पर एक एसआई, चार कांस्टेबल, तीन होमगार्ड नियुक्त हैं।
इसके बावजूद परिसर में प्रतिदिन देर शाम से रात तक नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। असामाजिक तत्व परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए लगे सामानों को क्षति पहुंचाते रहते हैं। जहां परिसर के सुंदरीकरण पर धब्बा लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ यहां आने वाले पर्यटकों को थकान महसूस होने पर बैठने की समस्या से दोचार होना पड़ता है।
इस संबंध में कबीर चौरा में सुरक्षा की दृष्टि से नियुक्त एसआई महेश्वर चौधरी ने बताया कि हमें और हमारे स्टाफ को परिसर में कोई स्थायी जगह अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे कार्य करने में कठिनाई हो रही है। जब हमें सिर छुपाने के लिए जगह नहीं है तो परिसर में सुरक्षा चाकचौबंद कैसे हो पाएगी।
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परिसर के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर पंचायत को दी गई है। टूटी बेंचों को रिप्लेसमेंट के लिए पत्र लिखा जा रहा है। लोगों से राष्ट्रीय धरोहरों को नुकसान न पहुंचाने का अनुरोध है। यह राष्ट्र की संपत्ति है, इसकी रक्षा सुरक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।
-डाॅ. कृष्ण मोहन दूबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, गोरखपुर
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मगहर। संतकबीर की महापरिनिर्वाण स्थली कबीर चौरा परिसर को केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पर्यटन स्थल के रूप में विकसित और सुंदरीकरण किया गया है। ताकि पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। कबीर चौरा परिसर में पर्यटकों के बैठने के लिए लाल पत्थर की बेंच और परिसर में उजाले के लिए सोलर लाइटें आदि लगाई गई हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में सोलर लाइटें खराब हो चुकी हैं।
इसके साथ ही लगभग आधा दर्जन से अधिक बेंचों को नशेड़ियों एवं असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया है, जिससे यहां आने-जाने वाले पर्यटकों को बैठने में परेशानियां हो रही हैं।
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संतकबीर की निर्वाण स्थली मगहर में स्थित है। यह परिसर 27 एकड़ में फैला है। इसके विकास के लिए तत्कालीन पूर्व सांसद स्वर्गीय शरद त्रिपाठी के प्रयास से स्वदेश दर्शन योजना में शामिल किया गया। उसके बाद पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार ने इसे सुंदरीकरण और विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए। ताकि बाहर से आने वाले पर्यटकों को कबीर स्थली आकर्षित कर सके।
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इसके लिए पूरे परिसर में 72 सोलर लाइट, कई गजीबो का निर्माण कर उसमें बैठने के लाल पत्थर की बेंचें लगवाई गईं। इसमें से अधिकतर सोलर लाइटें रखरखाव के अभाव में खराब हो चुकी हैं। इसके अलावा लगभग आधा दर्जन से अधिक बेंचें भी टूट चुकी हैं। कबीर चौरा परिसर में सुरक्षा की दृष्टि से अगस्त 2025 में शासन स्तर से चौकी स्थापित की गई है। इस चौकी पर एक एसआई, चार कांस्टेबल, तीन होमगार्ड नियुक्त हैं।
इसके बावजूद परिसर में प्रतिदिन देर शाम से रात तक नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। असामाजिक तत्व परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए लगे सामानों को क्षति पहुंचाते रहते हैं। जहां परिसर के सुंदरीकरण पर धब्बा लग रहा है, वहीं दूसरी तरफ यहां आने वाले पर्यटकों को थकान महसूस होने पर बैठने की समस्या से दोचार होना पड़ता है।
इस संबंध में कबीर चौरा में सुरक्षा की दृष्टि से नियुक्त एसआई महेश्वर चौधरी ने बताया कि हमें और हमारे स्टाफ को परिसर में कोई स्थायी जगह अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे कार्य करने में कठिनाई हो रही है। जब हमें सिर छुपाने के लिए जगह नहीं है तो परिसर में सुरक्षा चाकचौबंद कैसे हो पाएगी।
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परिसर के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर पंचायत को दी गई है। टूटी बेंचों को रिप्लेसमेंट के लिए पत्र लिखा जा रहा है। लोगों से राष्ट्रीय धरोहरों को नुकसान न पहुंचाने का अनुरोध है। यह राष्ट्र की संपत्ति है, इसकी रक्षा सुरक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।
-डाॅ. कृष्ण मोहन दूबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, गोरखपुर