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Sant Kabir Nagar News: कोर्ट ने नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन की जमानत अर्जी खारिज की
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संतकबीरनगर। सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने विवाहघर के निर्माण से संबंधित पत्रावली गायब करने के मामले के आरोपी नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन अश्वनी कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अश्वनी कुमार गुप्ता पर 2012 से 2017
के बीच मगहर टाउन एरिया के विवाहघर के निर्माण के समय उससे संबंधित पत्रावली गायब किए जाने का आरोप है। उक्त कार्य में अधिशासी अधिकारी पारसनाथ और कंप्यूटर ऑपरेटर संतोष कुमार, गोरख सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। अपर जिलाधिकारी के जरिये सचिव लोकायुक्त से प्राप्त निर्देश के अनुक्रम में जांच कराकर आख्या दी गई। जांच में आरोपी दोषी पाया गए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर लिपिक संजय कुमार दुबे ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी पूर्व चेयरमैन को पुलिस ने मगहर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया था। आरोपी ने सत्र न्यायाधीश कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की और कहा कि उसने न तो कोई अपराध किया है, और न ही किसी अपराध में लिप्त रहा है। उसके कार्यकाल में अब्दुल रहमान के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। इसी कार्रवाई से अब्दुल रहमान और उसके मददगार क्षुब्ध रहने लगे। अब्दुल रहमान स्वयं ही एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज है।
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आरोपी ने जमानत प्रार्थनापत्र में कहा कि वह साक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी के जरिये जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया गया कि आरोपी जो तात्कालिक नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन था, राजनैतिक पहुंच रखने वाले प्रभावशाली व्यक्ति हैं। जमानत पर रिहा होने के बाद साक्ष्य को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि विवेचना अभी लंबित है। आरोपी के जरिये अन्य सह आरोपियों के साथ मिल कर सरकारी धन का दुरुपयोग एवं आपराधिक न्यासभंग किया गया है।
पक्षों को सुनने और प्रपत्रों का अवलोकन करने तथा इस तर्क को देखते हुए कि विवाहघर निर्माण के समय आरोपी नगर पंचायत मगहर अध्यक्ष के रूप में आसीन था। अपराध की गंभीरता केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने आरोपी अश्वनी कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी सुनवाई के बाद खारिज कर दी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अश्वनी कुमार गुप्ता पर 2012 से 2017
के बीच मगहर टाउन एरिया के विवाहघर के निर्माण के समय उससे संबंधित पत्रावली गायब किए जाने का आरोप है। उक्त कार्य में अधिशासी अधिकारी पारसनाथ और कंप्यूटर ऑपरेटर संतोष कुमार, गोरख सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। अपर जिलाधिकारी के जरिये सचिव लोकायुक्त से प्राप्त निर्देश के अनुक्रम में जांच कराकर आख्या दी गई। जांच में आरोपी दोषी पाया गए।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर लिपिक संजय कुमार दुबे ने प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी पूर्व चेयरमैन को पुलिस ने मगहर से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया था। आरोपी ने सत्र न्यायाधीश कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की और कहा कि उसने न तो कोई अपराध किया है, और न ही किसी अपराध में लिप्त रहा है। उसके कार्यकाल में अब्दुल रहमान के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी। इसी कार्रवाई से अब्दुल रहमान और उसके मददगार क्षुब्ध रहने लगे। अब्दुल रहमान स्वयं ही एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। उसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज है।
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आरोपी ने जमानत प्रार्थनापत्र में कहा कि वह साक्ष्य को प्रभावित नहीं करेगा। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी के जरिये जमानत प्रार्थनापत्र का विरोध करते हुए तर्क प्रस्तुत किया गया कि आरोपी जो तात्कालिक नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर आसीन था, राजनैतिक पहुंच रखने वाले प्रभावशाली व्यक्ति हैं। जमानत पर रिहा होने के बाद साक्ष्य को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि विवेचना अभी लंबित है। आरोपी के जरिये अन्य सह आरोपियों के साथ मिल कर सरकारी धन का दुरुपयोग एवं आपराधिक न्यासभंग किया गया है।
पक्षों को सुनने और प्रपत्रों का अवलोकन करने तथा इस तर्क को देखते हुए कि विवाहघर निर्माण के समय आरोपी नगर पंचायत मगहर अध्यक्ष के रूप में आसीन था। अपराध की गंभीरता केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए सत्र न्यायाधीश देवेंद्र सिंह ने आरोपी अश्वनी कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी सुनवाई के बाद खारिज कर दी।