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सड़क जर्जर, नालियां जाम, पानी का भी इंतजाम नहीं
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सड़क जर्जर, नालियां जाम, पानी का भी इंतजाम नहीं
बखिरा कस्बे में बदहाली का आलम, ग्रामीण विकास की योजनाएं हो गई बंद
नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बावजूद सुविधाएं नहीं है
संवाद न्यूज एजेंसी
बखिरा। करीब दो साल पहले बखिरा कस्बे को नगर पंचायत का दर्जा मिला। ग्रामीण विकास की योजनाए बंद हो गईं, लेकिन शहरी विकास के कार्य यहां नहीं कराए गए। यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। नालियां जाम हैं। खड़ंजा सड़क भी जर्जर हाल में है। यहां शुद्ध पानी तक का इंतजाम नहीं है।
नागरिक विजय कुमार ने कहा कि बखिरा ग्राम पंचायत को जनपद की दूसरी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का दर्जा हासिल था। यह बर्तन निर्माण के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन विकास के कार्य यहां नहीं कराए गए। नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी बखिरा व इसके मोहल्लों में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
कस्बे के अष्ठभुजा पांडेय ने कहा कि नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के बाद अन्य स्थानों का जितनी तेजी से विकास हुआ, उतनी तेजी से बखिरा नगर पंचायत में शामिल क्षेत्रों का नहीं हो सका है। अभी भी बिजली के जर्जर तार, टूटी हुई सड़कें व जाम नालियों की समस्या प्रमुख रूप से बनी हुई है।
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पवन कसेरा ने कहा कि सड़क पर अतिक्रमण व फूटपाथ पर सब्जी व फल की दुकान लगाने वालों की वजह से सड़क का काफी हिस्सा अतिक्रमणकरियों के कब्जे में है। इस वजह से आए दिन शनिचरा बाजार, मंगल बाजार, सहजनवां तिराहा, अमरडोभा, पुलिस चौकी, इंटर कॉलेज तिराहे पर जाम की स्थिति हो जाती है। आवश्यक कार्यों से आने-जाने वालों को भी काफी दिक्कत होती है। लोगों का महत्वपूर्ण समय जाम से निकलने में ही बीत जाता है। प्रतिदिन होने वाले इस जाम को लेकर नगर पंचायत तनिक भी गंभीर नहीं है। ईओ प्रदीप कुमार ने बताया कि नगर पंचायत प्रशासन नगरीय क्षेत्र के विकास के प्रति सतर्क है। जैसे ही बजट मिलेगा, वैसे ही प्राथमिकता के साथ विकास कार्य कराए जाएंगे। नालियों की सफाई भी कराई जाएगी।
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बखिरा कस्बे में बदहाली का आलम, ग्रामीण विकास की योजनाएं हो गई बंद
नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बावजूद सुविधाएं नहीं है
संवाद न्यूज एजेंसी
बखिरा। करीब दो साल पहले बखिरा कस्बे को नगर पंचायत का दर्जा मिला। ग्रामीण विकास की योजनाए बंद हो गईं, लेकिन शहरी विकास के कार्य यहां नहीं कराए गए। यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। नालियां जाम हैं। खड़ंजा सड़क भी जर्जर हाल में है। यहां शुद्ध पानी तक का इंतजाम नहीं है।
नागरिक विजय कुमार ने कहा कि बखिरा ग्राम पंचायत को जनपद की दूसरी सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का दर्जा हासिल था। यह बर्तन निर्माण के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन विकास के कार्य यहां नहीं कराए गए। नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के बाद भी बखिरा व इसके मोहल्लों में मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है।
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कस्बे के अष्ठभुजा पांडेय ने कहा कि नगरीय क्षेत्र में शामिल होने के बाद अन्य स्थानों का जितनी तेजी से विकास हुआ, उतनी तेजी से बखिरा नगर पंचायत में शामिल क्षेत्रों का नहीं हो सका है। अभी भी बिजली के जर्जर तार, टूटी हुई सड़कें व जाम नालियों की समस्या प्रमुख रूप से बनी हुई है।
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पवन कसेरा ने कहा कि सड़क पर अतिक्रमण व फूटपाथ पर सब्जी व फल की दुकान लगाने वालों की वजह से सड़क का काफी हिस्सा अतिक्रमणकरियों के कब्जे में है। इस वजह से आए दिन शनिचरा बाजार, मंगल बाजार, सहजनवां तिराहा, अमरडोभा, पुलिस चौकी, इंटर कॉलेज तिराहे पर जाम की स्थिति हो जाती है। आवश्यक कार्यों से आने-जाने वालों को भी काफी दिक्कत होती है। लोगों का महत्वपूर्ण समय जाम से निकलने में ही बीत जाता है। प्रतिदिन होने वाले इस जाम को लेकर नगर पंचायत तनिक भी गंभीर नहीं है। ईओ प्रदीप कुमार ने बताया कि नगर पंचायत प्रशासन नगरीय क्षेत्र के विकास के प्रति सतर्क है। जैसे ही बजट मिलेगा, वैसे ही प्राथमिकता के साथ विकास कार्य कराए जाएंगे। नालियों की सफाई भी कराई जाएगी।