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Sant Kabir Nagar News: उधार के चिकित्सक के हवाले आयुर्वेदिक अस्पताल, दवाओं का भी टोटा
Fri, 23 Feb 2024 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 23 Feb 2024 12:16 AM IST
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हरिहरपुर। क्षेत्र के महुली और हरिहरपुर स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय उधार के चिकित्सकों के भरोसे हैं। कहीं बिजली की व्यवस्था और पेयजल का इंतजाम नहीं तो वहीं दोनो आयुर्वेदिक अस्पतालों में दवाओं की कमी है। जिससे महुली और हरिहरपुर के अस्पतालों को वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित करने की सरकारी मुहिम धराशायी होती दिख रही है।
हर व्यक्ति को उसके आसपास बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। इसके लिए प्रदेश सरकार चिकित्सा इकाइयों को विकसित करने के मकसद से उन्हें नया रूप देने की मुहिम चला रही है। अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही योगा प्रशिक्षकों की तैनाती भी कर दी गई थी। लेकिन अस्पतालों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। महुली स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में सप्ताह में दो दिन चिकित्सक डॉ. गौरी दत्त मिश्रा आते हैं। तैनात फार्मासिस्ट रामबृक्ष ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी के चलते इस समय चिकित्सक अस्पताल पर नहीं आ रहे हैं। चार महीने से अस्पताल में दवा नहीं आई है। जिसके चलते अस्पताल में दवाओं की कमी हो गई है।
अस्पताल में बुनियादी जरूरतें उपलब्ध नहीं है। यहां शौचालय उपयोग के लायक नहीं है। बिजली की भी व्यवस्था नहीं है। पीने के लिए लगा हैंडपंप प्रदूषित पानी दे रहा है। देशी हैंडपंप से काम चलाना पड़ रहा है। हरिहरपुर आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट सुधीश त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल पर दो दिन के लिए धनघटा से चिकित्सक आते हैं। अस्पताल में इस समय दवाओं की कमी हो गई है। अस्पताल पर रोजाना गठिया, सुगर, सर्दी-जुकाम और पेट से संबंधित लगभग 80 से 90 मरीज आते हैं।
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मरीज उमाशंकर शुक्ल, राजेश, प्रेम प्रकाश आदि लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों की रुझान आयुर्वेद की ओर बढ़ी है। शुरुआती दौर में अस्पतालों पर चिकित्सा की सुविधा बेहतर थी लेकिन अब चिकित्सक और दवाओं की कमी के चलते स्थिति खराब हो गई है।लोगों की मांग है कि नियमित चिकित्सक की तैनाती के साथ ही आयुर्वेदिक अस्पतालों पर दवाओं की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित की जाए।
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हर व्यक्ति को उसके आसपास बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। इसके लिए प्रदेश सरकार चिकित्सा इकाइयों को विकसित करने के मकसद से उन्हें नया रूप देने की मुहिम चला रही है। अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही योगा प्रशिक्षकों की तैनाती भी कर दी गई थी। लेकिन अस्पतालों की दशा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। महुली स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल में सप्ताह में दो दिन चिकित्सक डॉ. गौरी दत्त मिश्रा आते हैं। तैनात फार्मासिस्ट रामबृक्ष ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में ड्यूटी के चलते इस समय चिकित्सक अस्पताल पर नहीं आ रहे हैं। चार महीने से अस्पताल में दवा नहीं आई है। जिसके चलते अस्पताल में दवाओं की कमी हो गई है।
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अस्पताल में बुनियादी जरूरतें उपलब्ध नहीं है। यहां शौचालय उपयोग के लायक नहीं है। बिजली की भी व्यवस्था नहीं है। पीने के लिए लगा हैंडपंप प्रदूषित पानी दे रहा है। देशी हैंडपंप से काम चलाना पड़ रहा है। हरिहरपुर आयुर्वेदिक अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट सुधीश त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल पर दो दिन के लिए धनघटा से चिकित्सक आते हैं। अस्पताल में इस समय दवाओं की कमी हो गई है। अस्पताल पर रोजाना गठिया, सुगर, सर्दी-जुकाम और पेट से संबंधित लगभग 80 से 90 मरीज आते हैं।
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मरीज उमाशंकर शुक्ल, राजेश, प्रेम प्रकाश आदि लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद से लोगों की रुझान आयुर्वेद की ओर बढ़ी है। शुरुआती दौर में अस्पतालों पर चिकित्सा की सुविधा बेहतर थी लेकिन अब चिकित्सक और दवाओं की कमी के चलते स्थिति खराब हो गई है।लोगों की मांग है कि नियमित चिकित्सक की तैनाती के साथ ही आयुर्वेदिक अस्पतालों पर दवाओं की आपूर्ति जल्द सुनिश्चित की जाए।