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Sant Kabir Nagar News: श्रीराम का जन्म होते ही जयकारों से गूंजा पंडाल
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कथा सुनाते शैलेन्द्रमणि त्रिपाठी। संवाद
-दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए गुरु वशिष्ठ ने कराया था यज्ञ
संवाद न्यूज एजेंसी
सांथा। क्षेत्र के ग्राम जोगीवीर में चल रही श्रीराम कथा में बृहस्पतिवार को श्रीराम जन्मोत्सव की धूम रही। श्रीराम के जन्म होते ही पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
कथा वाचक शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या के सम्राट दशरथ को चौथे पन तक कोई पुत्र प्राप्त नहीं हुआ था। इससे वे चिंतित थे। अपनी चिंता लेकर वे गुरु वशिष्ठ के पास पहुंचे। गुरु ने उन्हें आश्वासन दिया कि उन्हें एक नहीं, बल्कि चार संतानें होंगी। राजा दशरथ अत्यंत खुश हुए। गुरु वशिष्ठ के निर्देशानुसार राजा दशरथ ने शृंगी ऋषि को आचार्य बनाकर पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया।
यज्ञ के फलस्वरूप उन्हें खीर प्रसाद के रूप में प्राप्त हुआ। राजा दशरथ ने उसका आधा भाग रानी कौशल्या को दिया। शेष आधे का आधा भाग रानी कैकेयी को। बचे हुए आधे के दो भाग करके कौशल्या और कैकेयी के माध्यम से रानी सुमित्रा को दिए गए। समय बीतने के बाद कौशल्या के गर्भ से भगवान राम का जन्म हुआ। माता कौशल्या के निवेदन पर भगवान बालक रूप में रोने लगे। इसके बाद माता कैकेयी से भरत और माता सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
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पुत्रों के जन्म से राजा दशरथ प्रसन्न हुए। उन्होंने खूब दान किया और पूरे समाज के साथ भव्य उत्सव मनाया। श्रद्धालु इस प्रसंग का वर्णन सुनकर भावविभोर हो गए। जन्मोत्सव के भजनों पर श्रद्धालुओं ने खूब नृत्य किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांथा। क्षेत्र के ग्राम जोगीवीर में चल रही श्रीराम कथा में बृहस्पतिवार को श्रीराम जन्मोत्सव की धूम रही। श्रीराम के जन्म होते ही पंडाल जयकारों से गूंज उठा।
कथा वाचक शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या के सम्राट दशरथ को चौथे पन तक कोई पुत्र प्राप्त नहीं हुआ था। इससे वे चिंतित थे। अपनी चिंता लेकर वे गुरु वशिष्ठ के पास पहुंचे। गुरु ने उन्हें आश्वासन दिया कि उन्हें एक नहीं, बल्कि चार संतानें होंगी। राजा दशरथ अत्यंत खुश हुए। गुरु वशिष्ठ के निर्देशानुसार राजा दशरथ ने शृंगी ऋषि को आचार्य बनाकर पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया।
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यज्ञ के फलस्वरूप उन्हें खीर प्रसाद के रूप में प्राप्त हुआ। राजा दशरथ ने उसका आधा भाग रानी कौशल्या को दिया। शेष आधे का आधा भाग रानी कैकेयी को। बचे हुए आधे के दो भाग करके कौशल्या और कैकेयी के माध्यम से रानी सुमित्रा को दिए गए। समय बीतने के बाद कौशल्या के गर्भ से भगवान राम का जन्म हुआ। माता कौशल्या के निवेदन पर भगवान बालक रूप में रोने लगे। इसके बाद माता कैकेयी से भरत और माता सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
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पुत्रों के जन्म से राजा दशरथ प्रसन्न हुए। उन्होंने खूब दान किया और पूरे समाज के साथ भव्य उत्सव मनाया। श्रद्धालु इस प्रसंग का वर्णन सुनकर भावविभोर हो गए। जन्मोत्सव के भजनों पर श्रद्धालुओं ने खूब नृत्य किया।